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Russia: अंतरिक्ष में महाशक्ति की ‘विराट’ छलांग! चंद्रमा पर परमाणु बिजली घर बनाएगा रूस, दुनिया रह गई दंग!

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Russia: अंतरिक्ष की गहराइयों को नापने की होड़ में रूस ने एक ऐसा ऐलान किया है, जिसने पूरी दुनिया को आश्चर्यचकित कर दिया है। रूस ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की है कि वह अगले दशक (2030-2035) के भीतर चंद्रमा की सतह पर एक ‘परमाणु ऊर्जा संयंत्र’ (Nuclear Power Plant) स्थापित करने की योजना बना रहा है।

Russia: रोबोटिक्स की मदद से बनेगा चंद्रमा का पहला बिजलीघर

यदि यह मिशन सफल होता है, तो यह मानव इतिहास में अंतरिक्ष अन्वेषण (Space Exploration) के नजरिए से सबसे बड़ा और क्रांतिकारी कदम होगा। यदि देखा जाए तो यह ​अभी तक चंद्रमा पर इंसानों के रहने या वहां बेस बनाने की कल्पना केवल फिल्मों तक सीमित थी, लेकिन रूस इसे हकीकत में बदलने जा रहा है।

इस प्रोजेक्ट की सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इस विशालकाय प्लांट का निर्माण इंसानों द्वारा नहीं, बल्कि पूरी तरह से स्वचालित रोबोटिक तकनीक के जरिए किया जाएगा।

रूस की इस ‘न्यूक्लियर’ योजना के बारे में बात करें तो, चंद्रमा पर रातें बहुत लंबी और ठंडी होती हैं (करीब 14 पृथ्वी दिनों के बराबर), जहाँ सोलर पैनल काम नहीं कर पाते। ऐसे में परमाणु ऊर्जा ही एकमात्र विकल्प है जो वहां चौबीसों घंटे बिजली दे सके। (Russia)

रोस्कोस्मोस (रूसी अंतरिक्ष एजेंसी) के अनुसार, इंसानी दखल के बिना रोबोट्स चांद की सतह पर इस जटिल प्लांट को असेंबल करेंगे। यह प्लांट भविष्य में चांद पर बनने वाली इंसानी बस्तियों और वहां होने वाली माइनिंग (खनन) के लिए जरूरी ऊर्जा प्रदान करेगा।

रूस और चीन का सहयोग: अंतरिक्ष में एक नई साझेदारी
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रूस इस महत्वाकांक्षी परियोजना में चीन के साथ मिलकर ‘इंटरनेशनल लूनर रिसर्च स्टेशन’ (ILRS) विकसित करने पर भी विचार कर रहा है। रूस के इस कदम को वैज्ञानिक समुदाय एक “गेम चेंजर” मान रहा है। जहां अब तक देश केवल चांद पर पहुंचने की कोशिश कर रहे थे, वहीं रूस ने वहां ‘बिजली’ पैदा करने की तैयारी शुरू कर दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीक भविष्य में मंगल (Mars) जैसे ग्रहों पर जाने के लिए एक लॉन्चिंग पैड का काम करेगी। (Russia)

दुनिया भर के वैज्ञानिक इस बात को लेकर भी उत्सुक और चिंतित हैं कि चांद के निर्वात वातावरण में परमाणु रिएक्टर को ठंडा कैसे रखा जाएगा और वहां से निकलने वाले रेडिएशन को कैसे नियंत्रित किया जाएगा। रूस के इस “सरप्राइज” ने अमेरिका (NASA) और अन्य देशों के बीच अंतरिक्ष प्रतिस्पर्धा को और तेज कर दिया है।

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