Satya Niketan building collapse: दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में हुआ पांच मंजिला इमारत हादसा इस वक्त पूरे देश में चर्चा का विषय बना हुआ है। दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस के पास स्थित “होस्टल डेज़” बॉयज पीजी के ढहने से 7 लोगों की मौत हो चुकी है। इस भीषण त्रासदी के बाद प्रशासन और पुलिस पूरी तरह से एक्शन मोड में आ गए हैं। पुलिस ने इस मामले में पांचवीं गिरफ्तारी करते हुए उत्तर प्रदेश के कासगंज से लेबर कॉन्ट्रैक्टर (ठेकेदार) सनोज को गिरफ्तार कर लिया है।
Satya Niketan building collapse: कासगंज से दबोचा गया ठेकेदार सनोज
हादसे के बाद से ही फरार चल रहे लेबर कॉन्ट्रैक्टर सनोज की तलाश में दिल्ली पुलिस लगातार छापेमारी कर रही थी। अंततः तकनीकी सर्विलांस और खुफिया सूचनाओं के आधार पर पुलिस ने उसे उत्तर प्रदेश के कासगंज से धर दबोचा। जांच में सामने आया है कि हादसे से पहले इमारत के बेसमेंट और ग्राउंड फ्लोर में पिछले 8-10 दिनों से गुपचुप तरीके से भारी मरम्मत और बदलाव का काम चल रहा था। सनोज इसी निर्माण कार्य के लिए मजदूर और तकनीकी रेख-देख संभाल रहा था।
मकान मालिक दंपती जेल में, बेटा पुलिस रिमांड पर
ठेकेदार सनोज से पहले पुलिस इस मामले में मुख्य आरोपी और इमारत के मालिकों को गिरफ्तार कर चुकी है। इमारत के मुख्य मालिक, हादसे के बाद वह दिल्ली से फरार होकर राजस्थान के भिवाड़ी भाग गए थे, जहां से पुलिस ने उन्हें धर दबोचा। अदालत ने इस मामले में मकान मालिक हरिराम गुप्ता (81 वर्ष) और उर्मिला गुप्ता (75 वर्ष) को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। (Satya Niketan building collapse)
यह संपत्ति उर्मिला के नाम पर रजिस्टर्ड थी और बिजली का कनेक्शन हरिराम के नाम पर था। कोर्ट ने महेश (मालिक दंपती का बेटा) को दो दिन की पुलिस कस्टडी में भेजा है। पूछताछ में महेश ने स्वीकार किया है कि अगस्त 2025 में इस पांच मंजिला इमारत को ‘हॉस्टल डेज’ नामक पीजी ऑपरेटर को लीज पर दिया गया था, लेकिन इसके रखरखाव और मेंटेनेंस का काम वही संभाल रहा था।
किराएनामे में छिपी थी बड़ी लापरवाही
जांच के दौरान पुलिस के हाथ एक बेहद चौंकाने वाला दस्तावेज लगा है। मकान मालिकों और पीजी ऑपरेटर के बीच हुए रेंट एग्रीमेंट में एक ऐसी शर्त जोड़ी गई थी, जो उनकी लापरवाही को साफ दर्शाती है। इस समझौते में लिखा था कि यदि इमारत में किसी हादसे के कारण किरायेदारों या छात्रों की जान जाती है, तो उसकी जिम्मेदारी मकान मालिक की नहीं होगी। इससे यह स्पष्ट होता है कि मालिकों को इमारत के जर्जर और असुरक्षित होने का पहले से आभास था, इसके बावजूद उन्होंने उसमें भारी बदलाव और मरम्मत का जोखिम लिया। (Satya Niketan building collapse)
दिल्ली सरकार की सख्त कार्रवाई और मुआवजा
सत्य निकेतन हादसे के बाद दिल्ली की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा हुआ है। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने खुद एम्स (AIIMS) ट्रॉमा सेंटर जाकर घायलों और पीड़ित छात्रों के परिवारों से मुलाकात की। मुख्यमंत्री ने इस हादसे में घायलों के लिए ₹5-5 लाख की आर्थिक सहायता का एलान किया है। मृतकों के परिजनों के लिए भी जल्द ही मुआवजे की घोषणा की जाएगी।
MCD अधिकारियों पर गाज
लापरवाही बरतने और अवैध निर्माण को नजरअंदाज करने के आरोप में दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के निर्देश पर नगर निगम (MCD) के 5 अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया है, जिनमें डिप्टी कमिश्नर, सुपरिटेंडिंग इंजीनियर, एग्जीक्यूटिव इंजीनियर, असिस्टेंट इंजीनियर और जूनियर इंजीनियर शामिल हैं। (Satya Niketan building collapse)
पूरी दिल्ली में सीलिंग और बुलडोजर एक्शन
मुख्यमंत्री ने आदेश दिया है कि दिल्ली में जहां भी पांचवीं मंजिल या उससे ऊंची अवैध इमारतें हैं, उन्हें तुरंत सील किया जाए। हादसे वाली इमारत के पास स्थित एक और जर्जर इमारत को ढहाने का आदेश भी दे दिया गया है।
इस दर्दनाक हादसे से सबक लेते हुए दिल्ली सरकार अब सार्वजनिक और व्यावसायिक गतिविधियों के लिए इस्तेमाल होने वाली इमारतों (जैसे पीजी, स्कूल, नर्सिंग होम) के लिए एक नई नीति लाने जा रही है। इसके तहत सभी पीजी और हॉस्टलों का पीरियोडिक स्ट्रक्चरल ऑडिट और बिल्डिंग सेफ्टी सर्टिफिकेशन अनिवार्य किया जाएगा। जब तक सुरक्षा प्रमाण पत्र नहीं मिलेगा, तब तक ऐसी इमारतों में छात्रों को रखने की अनुमति नहीं होगी। (Satya Niketan building collapse)
सत्य निकेतन का यह हादसा एक बार फिर याद दिलाता है कि चंद रुपयों के लालच में सुरक्षा मानकों और निगम के नियमों को ताक पर रखना मासूम जिंदगियों पर कितना भारी पड़ सकता है। फिलहाल पुलिस लेबर कॉन्ट्रैक्टर सनोज और मकान मालिकों के बेटे महेश को आमने-सामने बिठाकर पूछताछ करने की तैयारी में है ताकि हादसे की मुख्य वजहों की कड़ियों को पूरी तरह जोड़ा जा सके।









