SC Hearing on Delhi Riots: भाजपा सांसद और बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा ने सोमवार को 2020 के दिल्ली दंगों से जुड़े मामले में उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिकाएं खारिज करने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि आरोपियों के जेल में रहने से जांच में तेजी आएगी।
भाजपा नेता का सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर समर्थन (SC Hearing on Delhi Riots)
भाजपा नेता ने जोर देकर कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने बहुत ही तर्कसंगत आदेश दिया है। जमानत याचिका खारिज करते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि इन दोनों व्यक्तियों की ‘साजिश’ प्रथम दृष्टया सिद्ध हो चुकी है, इसलिए इस स्थिति में जमानत नहीं दी जा सकती। निश्चित रूप से, जब तक वे जेल में रहेंगे, जांच में तेजी आएगी।
मनन कुमार मिश्रा का यह बयान सुप्रीम कोर्ट द्वारा उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिका खारिज करने के बाद आया है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने गुलफिशा फातिमा, मीरान हैदर, शिफा उर रहमान, मोहम्मद सलीम खान और शादाब अहमद को जमानत दे दी है। (SC Hearing on Delhi Riots)
दिल्ली दंगों में उमर खालिद और शरजील इमाम की भूमिका
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को उमर खालिद और शरजील इमाम को 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के पीछे कथित तौर पर रची गई एक बड़ी साजिश से संबंधित मामले में जमानत देने से इनकार कर दिया। न्यायालय ने कहा कि उमर खालिद और शरजील इमाम अभियोजन और साक्ष्य दोनों के संदर्भ में गुणात्मक रूप से भिन्न स्थिति में हैं।
इसमें कहा गया कि कथित अपराधों में उनकी भूमिका केंद्रीय थी। इन दोनों के संबंध में, यद्यपि कारावास की अवधि निरंतर और लंबी है, यह संवैधानिक जनादेश का उल्लंघन नहीं करती है और न ही कानूनों के तहत वैधानिक प्रतिबंध का उल्लंघन करती है। (SC Hearing on Delhi Riots)
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अरविंद कुमार और एनवी अंजारी की बेंच ने गुलफिशा फातिमा, मीरान हैदर, शिफा उर रहमान, मोहम्मद सलीम खान और शादाब अहमद द्वारा दायर जमानत याचिकाओं पर फैसला सुनाया। इससे पहले 10 दिसंबर को सर्वोच्च न्यायालय ने सभी पक्षों की विस्तृत दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।
2 सितंबर, 2025 को दिल्ली उच्च न्यायालय ने इस मामले में उमर खालिद और शरजील इमाम सहित नौ आरोपियों की जमानत याचिका खारिज कर दी, जिसके बाद आरोपियों ने सर्वोच्च न्यायालय का रुख किया। उच्च न्यायालय ने पाया था कि प्रथम दृष्टया, पूरी साजिश में इमाम और खालिद की भूमिका गंभीर थी, क्योंकि उन्होंने मुस्लिम समुदाय के सदस्यों को बड़े पैमाने पर लामबंद करने के लिए सांप्रदायिक आधार पर भड़काऊ भाषण दिए थे। (SC Hearing on Delhi Riots)
2020 के दिल्ली दंगों का प्रभाव
उमर खालिद, शरजील इमाम और अन्य को फरवरी 2020 में दिल्ली दंगों के मामले में गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के कड़े प्रावधानों के तहत जनवरी 2020 में गिरफ्तार किया गया था। तत्कालीन प्रस्तावित नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) के विरोध प्रदर्शनों के दौरान हिंसा भड़क उठी थी, जिसमें 53 लोग मारे गए थे और 700 से अधिक लोग घायल हुए थे। (SC Hearing on Delhi Riots)









