Shraddha Dubey Case: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में चर्चित कारोबारी शिवा शर्मा की मौत और मुख्य आरोपी मॉडल श्रद्धा दुबे की फरारी का मामला अब एक बड़े राजनीतिक विवाद में बदल चुका है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस पूरे प्रकरण को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अगुवाई वाली भाजपा सरकार पर अब तक का सबसे तीखा हमला बोला है।
मंगलवार को मीडिया से बातचीत के दौरान अखिलेश यादव ने दो टूक शब्दों में कहा, “यह मामला कोई सामान्य मामला नहीं है। यह वह मामला है जो सरकार को ले डूबेगा।” अखिलेश यादव के इस बयान ने उत्तर प्रदेश की सियासत में हलचल तेज कर दी है। समाजवादी पार्टी इसे सिर्फ एक आपराधिक घटना नहीं, बल्कि सत्ता के शीर्ष पर बैठे रसूखदार लोगों और नौकरशाहों के गठजोड़ के रूप में पेश कर रही है।
Shraddha Dubey Case: क्या है पूरा मामला?
लखनऊ के जाने-माने कारोबारी शिवा शर्मा की गत 9 अक्टूबर को संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी।आरोप है कि लखनऊ स्थित मॉडल श्रद्धा दुबे के फ्लैट की बालकनी से गिरकर या धक्का दिए जाने से उनकी जान गई। शिवा शर्मा की मां ने श्रद्धा दुबे, उसकी बहन और दो अन्य सहयोगियों के खिलाफ हत्या की FIR दर्ज कराई, जिसमें आरोप लगाया गया कि शिवा को जानबूझकर ऊपर से धक्का दिया गया। घटना के बाद से ही श्रद्धा दुबे फरार चल रही है और पुलिस ने उस पर साथ ही उसके साथियों पर 50-50 हजार रुपये का इनाम भी घोषित कर रखा है।
अखिलेश यादव के आरोपों के केंद्र में क्या है?
अखिलेश यादव ने इस मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली और प्रशासनिक ढिलाई पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका सबसे बड़ा आक्षेप श्रद्धा दुबे की रहस्यमयी फरारी और उसके बाद की घटनाओं को लेकर है। अखिलेश यादव का कहना है कि जिस आरोपी मॉडल को यूपी पुलिस पिछले 11 दिनों से ढूंढ नहीं पा रही है, वह लगातार सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर रही है। हद तो तब हो गई, जब रविवार को फरार चल रही श्रद्धा दुबे ने समाचार एजेंसी ANI को एक लंबा इंटरव्यू दिया और फिर से गायब हो गई। अखिलेश ने व्यंग्य करते हुए कहा कि ऐसा नहीं है कि पुलिस पकड़ नहीं पा रही है, बल्कि असलियत कुछ और है। (Shraddha Dubey Case)
राजनीतिक गलियारों और सूत्रों के हवाले से यह चर्चा जोरों पर है कि श्रद्धा दुबे को शासन में बैठे किसी बड़े और रसूखदार नौकरशाह का संरक्षण मिला हुआ है, जो उसे पुलिसिया कार्रवाई से बचा रहा है। अखिलेश यादव का इशारा भी इसी हाई-प्रोफाइल नेक्सस की तरफ था। उन्होंने अंदेशा जताया कि रसूखदारों के नाम सामने आने के डर से ही इस मामले को दबाने या आरोपी को बचाने का प्रयास किया जा रहा है। सपा प्रमुख ने मीडिया के एक हिस्से पर भी तंज कसा। उन्होंने कहा कि आज पूरा सिस्टम और चैनल दो भागों में बंटे नजर आ रहे हैं- कुछ लोग श्रद्धा के पक्ष में माहौल बना रहे हैं और कुछ उसके खिलाफ। उन्होंने मांग की कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और पीड़ित परिवार को न्याय मिलना चाहिए।
पुलिस महकमे में मची खलबली
श्रद्धा दुबे के खुलेआम इंटरव्यू देने और पुलिस के हाथ खाली रहने से सरकार की जो फजीहत हुई, उसका असर प्रशासनिक फेरबदल के रूप में देखने को मिला है। कानून-व्यवस्था पर उठते सवालों के बीच सरकार ने हजरतगंज के इंस्पेक्टर विक्रम सिंह को लाइन हाजिर कर दिया, जबकि डीसीपी विक्रांत वीर को हटाकर डीजीपी मुख्यालय से संबद्ध कर दिया गया है। इसके अलावा इलाके के एसीपी रजनीश वर्मा का भी तबादला कर उन्हें क्राइम ब्रांच भेज दिया गया है। अधिकारियों पर गिरी यह गाज साफ दर्शाती है कि मामला सरकार के लिए गले की हड्डी बन चुका है। (Shraddha Dubey Case)
सरकार को घेरने की रणनीति
विपक्षी दल खासकर समाजवादी पार्टी इस मुद्दे को आगामी राजनीतिक लड़ाइयों और उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था के बड़े ढर्रे से जोड़कर देख रही है। अखिलेश यादव ने इस बहाने उत्तर प्रदेश में जंगलराज, भ्रष्टाचार, और अपराधियों को मिल रहे कथित वीआईपी संरक्षण के मुद्दे को एक बार फिर हवा दे दी है। उनका यह कहना कि इस बार गाड़ी नहीं पलटी, बल्कि सरकार पलटने की नौबत आ जाएगी। यह संकेत है कि विपक्षी दल इस मामले को शांत नहीं होने देगा।
फिलहाल, पुलिस की टीमें श्रद्धा दुबे की तलाश में जुटी हैं और उसकी लोकेशन पश्चिमी उत्तर प्रदेश के आसपास होने का अनुमान लगाया जा रहा है, जहां वह किसी पुराने मामले में कोर्ट के सामने सरेंडर करने की फिराक में है। लेकिन श्रद्धा दुबे जब भी पकड़ी जाएगी या सरेंडर करेगी, उसके खुलासे यूपी की राजनीति और प्रशासनिक हलकों में एक बड़ा तूफान ला सकते हैं। अखिलेश यादव का यह बयान कि ‘यह केस सरकार को ले डूबेगा’, आने वाले दिनों में उत्तर प्रदेश की राजनीति का पारा और चढ़ाने का काम करेगा। (Shraddha Dubey Case)









