Sonam Wangchuk Ultimatum: लद्दाख के प्रसिद्ध पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने दिल्ली में विपक्षी दलों के विरोध प्रदर्शन के दौरान नेताओं और कार्यकर्ताओं की सामूहिक गिरफ्तारियों पर गहरी नाराजगी जताते हुए केंद्र सरकार को 24 घंटे का कड़ा अल्टीमेटम दिया है। वांगचुक ने दोटूक शब्दों में कहा कि यदि रविवार तक सभी हिरासत में लिए गए लोगों को ससम्मान रिहा नहीं किया गया, तो वह स्वयं अनशन (भूख हड़ताल) या पदयात्रा शुरू करने पर मजबूर होंगे। देश के मौजूदा हालातों की तुलना ‘अघोषित आपातकाल’ से करते हुए उन्होंने लोकतांत्रिक अधिकारों के दमन पर गहरी चिंता व्यक्त की है।
Sonam Wangchuk Ultimatum: लोकतंत्र या अघोषित आपातकाल? वांगचुक का तीखा सवाल
राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और अन्य विपक्षी गुटों द्वारा मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन का आयोजन किया गया था। चुनाव में कथित गड़बड़ियों और मतों की चोरी के आरोपों को लेकर विपक्ष सड़क पर उतरा था, लेकिन दिल्ली पुलिस ने कानून-व्यवस्था और अनुमति न होने का हवाला देकर प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेना शुरू कर दिया।
गिरफ्तार होने वाले प्रमुख नेताओं में तृणमूल कांग्रेस (TMC) प्रमुख ममता बनर्जी, आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल और संजय सिंह समेत कई अन्य छात्र संगठनों के नेता शामिल हैं। नेताओं की इस सामूहिक गिरफ्तारी की कड़ी निंदा करते हुए सोनम वांगचुक ने सोशल मीडिया पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा, “कल जब मैंने इस प्रदर्शन में शांति और एकजुटता की अपील करते हुए संदेश जारी किया था, तब मैंने सपने में भी नहीं सोचा था कि दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र आज एक ‘अघोषित आपातकाल’ के दौर से गुजर रहा होगा।” (Sonam Wangchuk Ultimatum)
उन्होंने आगे कहा कि वह यह देखकर खुश थे कि जन आंदोलन का नेतृत्व करने के लिए इतने सारे वरिष्ठ नेता मौजूद हैं, लेकिन सरकार ने संवाद करने के बजाय दमन का रास्ता चुना और सभी को सलाखों के पीछे भेज दिया।
सरकार को 24 घंटे का अल्टीमेटम: ‘रिहा करो या अनशन झेलने को तैयार रहो’
सोनम वांगचुक ने सरकार से बेहद साफ शब्दों में अपील की है कि वे इस मसले को और न उलझाएं। उन्होंने कहा कि मैं सरकार से निवेदन करता हूं कि तत्काल प्रभाव से इन सभी राजनीतिक और सामाजिक कार्यकर्ताओं के खिलाफ दर्ज मामलों को खत्म कर उनकी रिहाई सुनिश्चित की जाए।
अगर अगले 24 घंटों के भीतर इन सभी लोगों को आजाद नहीं किया जाता है, तो वांगचुक दिल्ली या लेह में एक बार फिर शांतिपूर्ण अनशन या पदयात्रा की शुरुआत करेंगे। हालांकि, गांधीवादी विचारधारा पर चलने वाले वांगचुक ने यह उम्मीद भी जताई कि सरकार समझदारी दिखाते हुए बातचीत के जरिए इस संकट का समाधान निकालेगी ताकि उन्हें इस तरह का कोई कठोर कदम उठाने की जरूरत न पड़े। (Sonam Wangchuk Ultimatum)
आखिर इस बड़े प्रदर्शन से क्यों दूर रहे सोनम वांगचुक?
सोनम वांगचुक ने विपक्ष के इस बड़े आंदोलन को अपना पूरा नैतिक समर्थन दिया था, लेकिन वे खुद शारीरिक रूप से जंतर-मंतर के इस प्रदर्शन में शामिल नहीं हुए। उनकी इस दूरी को लेकर उठ रहे सवालों पर विराम लगाते हुए उन्होंने इसके पीछे की अत्यंत महत्वपूर्ण वैज्ञानिक और क्षेत्रीय वजहें साझा कीं। वांगचुक ने बताया कि लद्दाख में सर्दियों का मौसम तेजी से करीब आ रहा है और इस दौरान हिमालयी क्षेत्र में पानी और सुरक्षा से जुड़े कई मिशनों को पूरा करना बेहद जरूरी है। उन्होंने अपनी प्राथमिकताओं को गिनाते हुए बताया कि वे इस समय इन कार्यों में व्यस्त हैं।
सर्दियों के दौरान लद्दाख में पानी को संचित करने के लिए कृत्रिम ग्लेशियरों का निर्माण करना, ताकि गर्मियों में खेती के लिए पानी मिल सके। ग्लेशियर पिघलने से बनने वाली झीलों के फटने के खतरे से निपटने के लिए वैज्ञानिक प्रयोग करना। ऊंचे हिमालयी क्षेत्रों में 200 से अधिक ऐसी खतरनाक झीलें मौजूद हैं जो कभी भी भीषण बाढ़ का कारण बन सकती हैं। वांगचुक और उनकी टीम इन प्राकृतिक खतरों को कम करने के तकनीकी प्रयासों में जुटी हुई है। (Sonam Wangchuk Ultimatum)
उन्होंने साफ किया कि देश के पर्यावरण और पानी की सुरक्षा का यह काम समय के पाबंद होने के कारण बेहद संवेदनशील है, इसी वजह से वे दिल्ली के आंदोलन में प्रत्यक्ष रूप से नहीं पहुंच सके।
गिरफ्तार नेताओं की रिहाई पर टिकी नजर
सोनम वांगचुक का यह अल्टीमेटम ऐसे समय पर आया है जब दिल्ली की सुरक्षा व्यवस्था अत्यंत कड़ी है और विपक्ष तथा सरकार के बीच गतिरोध चरम पर है। वांगचुक का इतिहास रहा है कि वे जनहित और अधिकारों के लिए महीनों तक अनशन करने से पीछे नहीं हटते। अब पूरी देश की नजरें केंद्र सरकार के रुख पर टिकी हैं कि क्या सरकार रविवार की समयसीमा से पहले गिरफ्तार नेताओं को रिहा कर बातचीत का रास्ता चुनती है, या फिर सोनम वांगचुक को एक बार फिर भूख हड़ताल के मोर्चे पर उतरना पड़ेगा।









