Supreme Court: भारत के सर्वोच्च न्यायालय को तीन नए जज मिल गए हैं। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अगुवाई वाले कॉलेजियम की सिफारिशों पर अपनी औपचारिक मुहर लगा दी है। राष्ट्रपति की इस ऐतिहासिक मंजूरी के साथ ही देश की शीर्ष अदालत में तीन नए जजों की नियुक्ति का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है। इन नियुक्तियों के बाद, सुप्रीम कोर्ट में जजों की कुल संख्या अब 34 से बढ़कर 37 हो जाएगी।
सोमवार को जारी हुई इस आधिकारिक मंजूरी के बाद नियुक्त किए गए तीनों नवनियुक्त न्यायाधीश मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026 को सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में अपने पद और गोपनीयता की शपथ ग्रहण करेंगे।इस फैसले के बाद सुप्रीम कोर्ट में जजों की खाली सीटों को भरने और मामलों की पेंडेंसी को कम करने में बड़ी मदद मिलेगी।
कौन हैं Supreme Court के तीन नए जज?
सुप्रीम कोर्ट में नियुक्त किए गए ये तीनों जज कानून के क्षेत्र में बेहद अनुभवी हैं और अलग-अलग राज्यों के हाईकोर्ट में लंबे समय से अपनी सेवाएं दे रहे थे।
जस्टिस सुनीता अग्रवाल: जस्टिस सुनीता अग्रवाल वर्तमान में गुजरात हाई कोर्ट की चीफ जस्टिस के रूप में कार्यरत हैं। उनका मूल हाई कोर्ट इलाहाबाद उच्च न्यायालय रहा है, जहाँ उन्हें 21 नवंबर 2011 को न्यायाधीश नियुक्त किया गया था। वह 23 जुलाई 2023 से गुजरात हाई कोर्ट का नेतृत्व कर रही थीं। शीर्ष अदालत में उनका आगमन महिला प्रतिनिधित्व के लिहाज से भी काफी अहम माना जा रहा है।
जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय: जस्टिस डी.के. उपाध्याय मौजूदा समय में दिल्ली हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस के पद पर तैनात हैं। इनका मूल कैडर भी इलाहाबाद हाई कोर्ट ही है। अपनी त्वरित निर्णय क्षमता और बेहतरीन न्यायिक समझ के लिए जाने जाने वाले जस्टिस उपाध्याय अब सुप्रीम कोर्ट में अपनी सेवाएं देंगे।
जस्टिस अपरेश कुमार सिंह: जस्टिस अपरेश कुमार सिंह फिलहाल तेलंगाना हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस की कमान संभाल रहे हैं। उनका मूल उच्च न्यायालय झारखंड हाई कोर्ट है। न्यायिक प्रशासनिक कार्यों और कई ऐतिहासिक फैसलों में अपनी अहम भूमिका निभाने के कारण कॉलेजियम ने इन्हें शीर्ष अदालत के लिए प्रमोट करने की सिफारिश की थी। (Supreme Court)
क्या होता है ‘कॉलेजियम’ और यह कैसे काम करता है?
भारत में सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के जजों की नियुक्ति के लिए एक खास सिस्टम है, जिसे कॉलेजियम सिस्टम कहा जाता है। कॉलेजियम में भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) और सुप्रीम कोर्ट के चार सबसे वरिष्ठ जज शामिल होते हैं। यह कॉलेजियम आपस में चर्चा करके तय करता है कि किस योग्य व्यक्ति या हाईकोर्ट के जज को सुप्रीम कोर्ट का जज बनाया जाना चाहिए।
कॉलेजियम जब नामों की एक लिस्ट तैयार कर लेता है, तो उसे केंद्र सरकार (कानून मंत्रालय) के पास भेजा जाता है। सरकार इन नामों की जांच करती है और फिर इसे अंतिम मंजूरी के लिए देश के राष्ट्रपति के पास भेजा जाता है। राष्ट्रपति के हस्ताक्षर (मुहर) होते ही जजों की नियुक्ति पक्की हो जाती है। (Supreme Court)
कॉलेजियम की सिफारिश पर राष्ट्रपति की मुहर
सुप्रीम कोर्ट के पांच सदस्यीय कॉलेजियम ने 28 सितंबर 2026 को हुई अपनी बैठक में इन तीनों वरिष्ठ जजों को सर्वोच्च न्यायालय में जज के रूप में प्रमोट करने का सर्वसम्मत प्रस्ताव पारित किया था। इस पांच सदस्यीय कॉलेजियम की अध्यक्षता सीजेआई सूर्यकांत कर रहे थे। उनके साथ इस पैनल में जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस बी.वी. नागरत्ना, जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा शामिल थे। कॉलेजियम द्वारा भेजी गई सिफारिशी फाइल को केंद्रीय कानून मंत्रालय के माध्यम से आगे बढ़ाया गया, जिसके बाद सोमवार को राष्ट्रपति भवन से इसे अंतिम मंजूरी जारी की गई।
इस नियुक्ति का आम जनता और कोर्ट पर क्या असर होगा?
सुप्रीम कोर्ट में नए जजों के आने के कई बड़े फायदे होते हैं, जिनका सीधा असर देश की जनता पर पड़ता है। भारत की अदालतों में लाखों मामले लंबित हैं। जब कोर्ट में जजों की संख्या पूरी होती है, तो मामलों की सुनवाई तेजी से होती है और लोगों को जल्दी न्याय मिलता है। जजों की संख्या बढ़ने से मुख्य न्यायाधीश अलग-अलग मामलों (जैसे संवैधानिक मामले, सिविल मामले, क्रिमिनल मामले) के लिए ज्यादा बेंच बना सकते हैं। अलग-अलग राज्यों के अनुभवी जजों के आने से सुप्रीम कोर्ट के फैसलों में और अधिक निखार और विविधता आती है। (Supreme Court)









