Trump Gaza Peace Plan: आज पूरी दुनिया की नज़रें भारत की ओर मुड़ गई हैं। यह खबर केवल कूटनीति की नहीं, बल्कि इस बात की गवाह है कि अब दुनिया का कोई भी बड़ा फैसला भारत की सहमति के बिना मुमकिन नहीं है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक विशेष पत्र लिखकर उन्हें अपने प्रस्तावित “बोर्ड ऑफ पीस” (Board of Peace) में शामिल होने का न्योता दिया है। यह न्योता साफ संदेश देता है कि दुनिया के सबसे जटिल विवादों, खासकर गाजा संघर्ष को सुलझाने की चाबी अब भारत के पास है।
वैश्विक राजनीति में भारत का लोहा (Trump Gaza Peace Plan)
अमेरिकी राष्ट्रपति का यह कदम वैश्विक राजनीति में भारत के बढ़ते ‘लोहे’ को स्वीकार करना है। ट्रम्प जानते हैं कि, भारत दुनिया का इकलौता ऐसा देश है, जिसके संबंध इज़राइल और अरब देशों, दोनों के साथ बेहद मजबूत और भरोसेमंद हैं। पीएम मोदी की ‘विश्व मित्र’ की छवि ने उन्हें एक ऐसा मध्यस्थ बना दिया है, जिसकी बात पुतिन से लेकर ट्रम्प और अरब देशों के सुल्तान तक सुनते हैं। इसका साफ सन्देश यह है कि, अब वाशिंगटन या लंदन बैठकर दुनिया के फैसले नहीं होते; अब फैसलों की धुरी नई दिल्ली बन चुकी है।
आपको बता दें कि, ट्रम्प की यह पहल वैश्विक विवादों को खत्म करने के लिए एक ‘सुपर-कौंसिल’ की तरह होगी। इस बोर्ड का पहला और सबसे बड़ा मिशन गज़ा संघर्ष को स्थायी रूप से रोकना है। भारत इस बोर्ड में केवल एक सदस्य नहीं, बल्कि एक ‘निर्णायक’ की भूमिका में होगा, जो पश्चिमी देशों और ग्लोबल साउथ (विकासशील देशों) के बीच एक सेतु का काम करेगा। (Trump Gaza Peace Plan)
वैश्विक शांति में भारत की भूमिका
यह केवल एक आमंत्रण नहीं है, यह इस बात की आधिकारिक घोषणा है कि भारत अब दुनिया का नया ‘शांतिदूत’ है। ट्रम्प का मोदी को पत्र लिखना यह साबित करता है कि अमेरिका भी मानता है कि भारत की भागीदारी के बिना वैश्विक शांति का कोई भी प्रयास अधूरा है। इस खबर के बाद चीन और पाकिस्तान जैसे पड़ोसी देशों में खलबली मच गई है। जहाँ एक ओर अमेरिका भारत को वैश्विक शांति का नेतृत्व सौंप रहा है, वहीं दूसरी ओर यूरोप के कई देश भी अब इस शांति बोर्ड का हिस्सा बनने के लिए भारत की ओर देख रहे हैं। (Trump Gaza Peace Plan)









