Trump on Greenland: आज पूरी दुनिया की सांसें थमी हुई हैं और मानवता एक ऐसे मोड़ पर खड़ी है जहाँ से केवल तबाही का मंजर नज़र आ रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक ताज़ा फरमान ने वैश्विक शांति के ताबूत में आखिरी कील ठोंक दी है। दुनिया जिसे अब तक ‘कोल्ड वॉर’ समझ रही थी, वह अब परमाणु विनाश (Nuclear Armageddon) की आहट में बदल चुकी है।
Trump on Greenland: ग्रीनलैंड पर अमेरिका का दावा
अमेरिकी राष्ट्रपति ने नॉर्वे के प्रधानमंत्री को एक ऐसा पत्र लिखा है, जिसे कूटनीति की भाषा में ‘खतरनाक’ भी कहना छोटा शब्द होगा। ट्रंप ने न केवल ग्रीनलैंड पर अमेरिकी मालिकाना हक का दावा ठोका है, बल्कि पूरी निर्लज्जता से ऐलान कर दिया है कि “अमेरिका अब किसी भी अंतरराष्ट्रीय शांति समझौते से बंधा नहीं है।” इतना ही नहीं, ग्रीनलैंड पर 100% टैरिफ लगाने की धमकी देकर उन्होंने वैश्विक अर्थव्यवस्था की रीढ़ तोड़ने का ब्लूप्रिंट तैयार कर लिया है। (Trump on Greenland)

‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति: क्या यह केवल अमेरिका की जीत है या पूरी मानवता की हार?
ट्रंप की नीति अब साफ़ है—’अमेरिका फर्स्ट’, चाहे उसके लिए पूरी दुनिया को जलकर राख होना पड़े। राजनैतिक विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप ने पूरी दुनिया को बारूद के ढेर पर बिठा दिया है और उनके हाथ में ‘ग्रीनलैंड’ वह माचिस की तीली है जिसे वे बार-बार जलाकर दुनिया के चेहरे के करीब ला रहे हैं। शांति की अपील को दरकिनार करते हुए वाशिंगटन ने साफ कर दिया है कि उसे केवल अपने संसाधनों और विस्तार से मतलब है। ट्रम्प के इस एक कदम ने दशकों से चले आ रहे अंतरराष्ट्रीय कानूनों को कचरे के डिब्बे में डाल दिया है।
ट्रंप के इस पागलपन के खिलाफ अब पूरी दुनिया लामबंद हो गई है। यूरोपीय संघ (EU) ने इसे अपनी संप्रभुता पर सीधा हमला करार देते हुए ‘महायुद्ध’ की चेतावनी दी है। “अगर ग्रीनलैंड की बर्फ पर अमेरिकी बूट पड़े, तो समझ लीजिए कि दुनिया ने आखिरी बार सूरज उगते देखा है। हम अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए किसी भी हद तक जाएंगे।” (Trump on Greenland)
यह वो चेतावनी है जो यूरोपी संघ ने कड़े शब्दों में दुनियां के सामने रख दी है। अब यह लड़ाई केवल बयानों तक सीमित नहीं रही, अब रूस, चीन और यूरोपीय संघ के कई देश अब ग्रीनलैंड के संरक्षण के लिए एक साथ खड़े हो गए हैं। और अटलांटिक सागर में युद्धपोतों की तैनाती शुरू हो गई है। यह केवल एक विवाद नहीं, बल्कि तीसरे विश्वयुद्ध का बिगुल है जो अब बज चुका है।
मानवता आज उस अंधेरे गर्त में है जहाँ से वापसी का कोई रास्ता नहीं दिखता। एक व्यक्ति की जिद और ‘अमेरिका फर्स्ट’ के जुनून ने 8 अरब लोगों की जिंदगी को दांव पर लगा दिया है। अगर आज यह माचिस की तीली जल गई, तो इतिहास लिखने के लिए भी कोई नहीं बचेगा। (Trump on Greenland)









