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ट्रंप की सनक या सर्वशक्तिशाली होने का अहंकार? ग्रीनलैंड विवाद पर अमेरिका ने यूरोप के खिलाफ छेड़ा ‘टैरिफ युद्ध’, दुनिया में दहशत!

Trump Greenland Tariff Threat

Trump Greenland Tariff Threat: क्या दुनिया एक ऐसे दौर में प्रवेश कर चुकी है, जहाँ कूटनीति की जगह ‘तानाशाही सनक’ ने ले ली है? अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक ताज़ा फैसले ने पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया है। ग्रीनलैंड को खरीदने की अपनी ‘अजीबोगरीब’ जिद पूरी न होने पर ट्रंप ने अब अपने सबसे पुराने सहयोगियों यानी यूरोपीय देशों पर आर्थिक हमला बोल दिया है।

यूरोपीय देशों पर ट्रंप का 10% टैरिफ (Trump Greenland Tariff Threat)

फिलहाल अब ​इसे ट्रंप का पागलपन कहें या अपनी शक्ति का घमंड, लेकिन 8 यूरोपीय देशों पर 10% आयात शुल्क (Tariff) लगाने के उनके ऐलान ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को तबाही के मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया है।

देखा जाए तो डोनाल्ड ट्रंप का यह कदम किसी लोकतांत्रिक राष्ट्राध्यक्ष के फैसले से ज्यादा एक ‘तानाशाह की सनक’ जैसा नजर आ रहा है। अमेरिका ने डेनमार्क, फ्रांस, जर्मनी और ब्रिटेन सहित 8 प्रमुख यूरोपीय देशों को निशाना बनाया है। और जहां ट्रंप का साफ संदेश है—”या तो ग्रीनलैंड हमें बेचो, या आर्थिक तबाही के लिए तैयार रहो।” (Trump Greenland Tariff Threat)

इतना ही नहीं, राष्ट्रपति ने खुलेआम धमकी दी है कि यदि ग्रीनलैंड की बिक्री पर सहमति नहीं बनी, तो इस टैरिफ को 25% तक बढ़ाया जायेगा, यदि जानकारों की माने तो यह अंतरराष्ट्रीय संबंधों के इतिहास में ‘ब्लैकमेलिंग’ का सबसे बड़ा उदाहरण है।

उर्सुला वॉन डेर लेयेन की कड़ी निंदा

फिलहाल ट्रंप की इस आर्थिक बमबारी के बाद यूरोपीय संघ (EU) में हड़कंप मच गया है और आनन-फानन में आज ब्रसेल्स में एक आपातकालीन बैठक बुलाई गई है। जहां यूरोपीय संघ की प्रमुख उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने ट्रंप के इस कदम की कड़ी निंदा करते हुए इसे “बेहद खतरनाक और विनाशकारी कदम” बताया है। तो वहीं, इस खबर ने वैश्विक बाजारों में डर का माहौल पैदा कर दिया है। और जहां ट्रंप का यह रवैया दिखाता है कि वे खुद को दुनिया के नियम-कायदों से ऊपर ‘सर्वशक्तिशाली’ समझने के अहंकार में डूबे हुए हैं। (Trump Greenland Tariff Threat)

आपको बताते चलें कि, इतिहास गवाह है कि जब-जब सत्ता का अहंकार किसी राष्ट्र प्रमुख के सिर चढ़कर बोलता है, तब-तब दुनिया ने विनाश देखा है। ग्रीनलैंड जैसे संप्रभु क्षेत्र को खरीदने की जिद में अपने ही सहयोगियों का गला घोंटना ट्रंप की उस ‘तानाशाही मानसिकता’ को दर्शाता है, जहाँ देश और व्यापार सिर्फ उनके निजी खिलौने मात्र हैं।

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