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4 महीने में 22 को फांसी की सजा, कौन हैं जज रवि कुमार दिवाकर? ज्ञानवापी से फिर सुर्खियों तक का सफर

UP judge Ravi Kumar Diwakar

UP judge Ravi Kumar Diwakar: उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले में तैनात अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (ADJ) हैं, जो हाल ही में महज चार महीनों के भीतर 10 अलग-अलग जघन्य आपराधिक मामलों में 22 लोगों को मौत की सजा (फांसी) सुनाने के कारण राष्ट्रीय सुर्खियों में आए हैं। उनके इतने कम समय में दिए गए इन सख्त फैसलों को पश्चिमी उत्तर प्रदेश के न्यायिक इतिहास में एक दुर्लभ रिकॉर्ड माना जा रहा है।

UP judge Ravi Kumar Diwakar: 17 साल के न्यायिक करियर में 35 मौत की सजाएं

लखनऊ के रहने वाले 46 वर्षीय रवि कुमार दिवाकर ने वर्ष 2009 में बतौर अतिरिक्त सिविल जज (आजमगढ़) अपने न्यायिक करियर की शुरुआत की थी। वह 29 नवंबर 2025 से मुजफ्फरनगर के अपर जिला एवं सत्र न्यायालय (फास्ट ट्रैक कोर्ट संख्या-3) में न्यायाधीश के रूप में कार्यरत हैं।

मुजफ्फरनगर में अपनी वर्तमान पोस्टिंग से पहले, उन्होंने सुल्तानपुर, बदायूं, वाराणसी और बरेली सहित उत्तर प्रदेश के कई जिलों में अपनी सेवाएं दीं। अपने 17 साल के न्यायिक करियर में वह अब तक कुल 35 दोषियों को मौत की सजा सुना चुके हैं, जिसमें से अकेले 22 सजाएं उन्होंने पिछले चार महीनों में दी हैं।

अप्रैल से शुरू हुआ मौत की सजाओं का सिलसिला

मुजफ्फरनगर कोर्ट में फांसी की सजा सुनाने का यह सिलसिला 6 अप्रैल 2026 को शुरू हुआ था। दिवाकर के फैसलों में एक वकील, एक होम गार्ड, एक किसान की हत्या और राजमार्ग पर लूटपाट के दौरान हुई हत्या के मामलों में मौत की सजाएं शामिल हैं। 6 अप्रैल को वकील समीर सैफी की हत्या के मामले में तीन लोगों को मौत की सजा सुनाई गई। (UP judge Ravi Kumar Diwakar)

इसके बाद 28 अप्रैल को एक अन्य हत्या के मामले में चार लोगों को मौत की सजा सुनाई गई। 20 जून को दो लोगों को मौत की सजा सुनाई गई, जबकि 2 जुलाई को एक, 6 जुलाई को दो और 17 जुलाई को चार लोगों को मौत की सजा मिली। पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, शेष पांच सजाएं अगस्त में सुनाई गईं, जिनमें से एक 12 अगस्त को और चार 31 अगस्त को सुनाई गईं।

ज्ञानवापी सर्वे के आदेश से मिली थी देशव्यापी पहचान

जज रवि कुमार दिवाकर का नाम इससे पहले मई 2022 में पूरे देश में चर्चा में आया था। वाराणसी में सिविल जज (सीनियर डिवीजन) के पद पर रहते हुए उन्होंने ही ज्ञानवापी मस्जिद परिसर का वीडियोग्राफी सर्वे कराने का ऐतिहासिक आदेश दिया था। इस सर्वे के दौरान परिसर के वज़ूखाने में एक कथित संरचना मिली थी, जिसे हिंदू पक्ष ने ‘शिवलिंग’ और मुस्लिम पक्ष ने ‘फव्वारा’ बताया था। ज्ञानवापी मामले के बाद से ही उन्हें लगातार धमकियां मिलती रही हैं, जिसके कारण उनकी सुरक्षा बढ़ाई गई थी। (UP judge Ravi Kumar Diwakar)

बरेली दंगों के आदेश से भी आए थे चर्चा में, सख्त फैसलों के बीच सुरक्षा को लेकर चिंता

मार्च 2024 में बरेली दंगों से संबंधित एक आदेश में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को प्लेटो के “दार्शनिक राजा” के उदाहरण के रूप में संदर्भित करने वाली टिप्पणी के बाद वे फिर से सुर्खियों में आए। बाद में इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने उन टिप्पणियों को रिकॉर्ड से हटा दिया। हाल ही में 22 अपराधियों को फांसी की सजा सुनाने के बाद उन्होंने फिर से अपनी सुरक्षा पर चिंता जताई है और बिना अनुमति के सुरक्षाकर्मी हटाए जाने को लेकर उत्तर प्रदेश के डीजीपी (DGP) को पत्र भी लिखा है।

Vaishali
Author: Vaishali

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