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UP Politics: मांग 200 सीटों की, मगर MLC चुनावों में ‘शून्य’ का झटका; यूपी में कांग्रेस की दावेदारी पर उठे सवाल

UP Politics

UP Politics: उत्तर प्रदेश की सियासत में आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर गठबंधन के भीतर अभी से रस्साकशी शुरू हो गई है। हाल ही में लखनऊ, अमेठी और रायबरेली में कांग्रेस कार्यालयों के बाहर लगे “200 सीट हक है हमारा” और “यूपी को है राहुल गांधी पर भरोसा” के होर्डिंग्स ने सूबे की राजनीति में भूचाल ला दिया है।

2024 के लोकसभा चुनावों में समाजवादी पार्टी (सपा) के साथ मिलकर बेहतर प्रदर्शन करने के बाद उत्साहित कांग्रेस उत्तर प्रदेश की कुल 403 विधानसभा सीटों में से करीब 175 से 200 सीटों की मांग कर रही है। लेकिन इस राजनीतिक महत्वाकांक्षा के बीच, देश के चार बड़े राज्यों उत्तर प्रदेश, बिहार, कर्नाटक और महाराष्ट्र में हुए 28 विधान परिषद (MLC) सीटों के नतीजों ने कांग्रेस को एक तगड़ा झटका दिया है।

अक्टूबर 2026 में घोषित हुए इन MLC चुनाव परिणामों के अनुसार, बैलेट पेपर से हुए इन चुनावों में कांग्रेस इन चार राज्यों की अधिकांश सीटों पर अपना खाता भी नहीं खोल पाई। खासतौर से उत्तर प्रदेश, बिहार और कर्नाटक में कांग्रेस का प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा है, जिसने गठबंधन के भीतर उसकी सौदेबाजी की क्षमता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

UP Politics: MLC चुनाव 2026 में BJP-सपा की टक्कर, कांग्रेस का कमजोर प्रदर्शन

अक्टूबर 2026 में शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों की विधान परिषद सीटों पर हुए द्विवार्षिक चुनावों के नतीजों में विभिन्न राज्यों में अलग-अलग राजनीतिक दलों का प्रदर्शन देखने को मिला। उत्तर प्रदेश की कुल 11 सीटों में से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने 6 और समाजवादी पार्टी ने 5 सीटों पर जीत दर्ज की। कर्नाटक की 4 सीटों में भाजपा को 3 और जनता दल (सेक्युलर) यानी जद (एस) को 1 सीट मिली। बिहार की 8 सीटों में भाजपा ने 3, जनता दल (यूनाइटेड) ने 1, राष्ट्रीय जनता दल ने 1 और जन सुराज ने 1 सीट जीती, जबकि 2 सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवार विजयी रहे।

महाराष्ट्र की 5 सीटों में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) ने 2 सीटें हासिल कीं, जबकि भाजपा, शिवसेना और कांग्रेस को 1-1 सीट मिली। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, कांग्रेस ने इन चुनावों में कुल 12 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे, लेकिन उसे केवल महाराष्ट्र के नागपुर में जीत मिली। उत्तर प्रदेश, बिहार और कर्नाटक में पार्टी अपना खाता नहीं खोल सकी। (UP Politics)

MLC चुनाव में शून्य सीटें मिलने पर सहयोगियों ने घेरा

उत्तर प्रदेश कांग्रेस ने राष्ट्रीय स्तर पर चलाए जा रहे ‘संगठन सृजन अभियान’ के तहत आंतरिक सर्वे (A, B, C, D ग्रेडिंग मॉडल) के आधार पर सपा से 200 सीटों की बड़ी मांग की है। कांग्रेस का तर्क है कि 2024 के लोकसभा चुनावों में पार्टी ने 6 लोकसभा सीटें जीती थीं, जिससे जमीनी स्तर पर पार्टी कार्यकर्ता बेहद उत्साहित हैं। प्रियंका गांधी और राहुल गांधी की अगुवाई में पार्टी नवंबर के मध्य तक सीट शेयरिंग को अंतिम रूप देना चाहती है।

हालांकि, इस दावेदारी के तुरंत बाद आए यूपी MLC चुनाव के नतीजों ने कांग्रेस की इस रणनीति को बैकफुट पर धकेल दिया है। उत्तर प्रदेश की 11 MLC सीटों में से 6 पर भाजपा ने और 5 पर समाजवादी पार्टी ने जीत दर्ज की। कांग्रेस के खाते में ‘जीरो’ सीटें आईं। इसे लेकर विपक्षी दलों और सहयोगियों ने भी तंज कसना शुरू कर दिया है। (UP Politics)

सुभासपा नेता ओमप्रकाश राजभर ने अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए कहा कि यूपी में तो कांग्रेस वालों को प्रत्याशी भी नहीं मिला, जहां मिला वहां रिजल्ट में जीरो आया। अगर वे 200 सीटें मांगें, तो उन्हें यह जीरो याद दिला दीजिएगा। वहीं, आम आदमी पार्टी (AAP) के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने कांग्रेस की 200 सीटों की मांग को ‘तर्कहीन’ और ‘अनुचित’ बताते हुए सलाह दी कि कांग्रेस को पिछले विधानसभा चुनाव के प्रदर्शन को ध्यान में रखकर बातचीत करनी चाहिए।

कर्नाटक और बिहार में लगा सबसे बड़ा झटका

कांग्रेस के लिए सबसे चिंताजनक परिणाम कर्नाटक और बिहार से आए हैं। कर्नाटक में कांग्रेस की पूर्ण बहुमत वाली सरकार होने के बावजूद, भाजपा-जद(एस) गठबंधन ने चारों सीटों पर क्लीन स्वीप कर दिया। जद(एस) के ए.पी. रंगनाथ ने बेंगलुरु शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से कांग्रेस के मौजूदा MLC पुट्टन्ना को हरा दिया, जो कि सत्तारूढ़ डी.के. शिवकुमार और सिद्धारमैया सरकार के संगठनात्मक ढांचे के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है।

वहीं, बिहार की 8 सीटों में से दरभंग शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में प्रशांत किशोर की नवगठित ‘जन सुराज पार्टी’ के सुरेश प्रसाद राय ने कांग्रेस के सिटिंग MLC मदन मोहन झा को हरा दिया। इस हार से बिहार में भी कांग्रेस के जमीनी जनाधार पर गंभीर सवाल उठे हैं। (UP Politics)

बैलेट पेपर बनाम EVM की बहस पर उठे सवाल

चुनाव नतीजों के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कांग्रेस पर तंज कसते हुए लिखा, “4 बड़े राज्यों की 28 MLC सीटों पर चुनाव हुए। चुनाव बैलेट पेपर से हुए थे। अनुमान लगाइए कांग्रेस ने कितनी सीटें जीतीं?”

कांग्रेस लगातार आम चुनावों में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) पर सवाल उठाती आई है और बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग करती रही है, ऐसे में राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बैलेट पेपर से हुए इन MLC चुनावों में पार्टी की करारी हार ने विपक्षी नैरेटिव को कमजोर किया है।

गठबंधन के भीतर क्या बदलेगा समीकरण?

हालांकि, एमएलसी चुनाव के नतीजे आम जनता की पसंद को पूरी तरह नहीं दिखाते, क्योंकि इसमें केवल रजिस्टर्ड स्नातक और शिक्षक ही वोट देते हैं। फिर भी, इन नतीजों से यह पता चलता है कि किस पार्टी का संगठन अपने क्षेत्र में कितना मजबूत है। (UP Politics)

समाजवादी पार्टी के नेताओं का मानना है कि सीटों का बंटवारा इस आधार पर होना चाहिए कि कौन-सी पार्टी चुनाव जीतने में सक्षम है। ऐसे में, एमएलसी चुनाव में कांग्रेस को एक भी सीट नहीं मिलने और वाराणसी जैसे अहम क्षेत्रों में सपा के प्रदर्शन का असर आगे सीट बंटवारे की बातचीत पर पड़ सकता है। उत्तर प्रदेश में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए कांग्रेस को केवल प्रचार पर ध्यान देने के बजाय जमीनी स्तर पर संगठन को मजबूत करना होगा और कार्यकर्ताओं को सक्रिय करना होगा।

Vaishali
Author: Vaishali

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