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BSP में फिर बढ़ा पारिवारिक घमासान, मायावती ने आकाश आनंद पर लगाए गंभीर आरोप; बोलीं- मेरी बीमारी की झूठी अफवाहें…

UP Politics

UP Politics: उत्तर प्रदेश की राजनीति और बहुजन समाज पार्टी (BSP) के भीतर चल रहा पारिवारिक घमासान एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। बसपा सुप्रीमो मायावती ने अपने भतीजे और पार्टी के पूर्व नेशनल कोऑर्डिनेटर आकाश आनंद पर सीधा और तीखा हमला बोला है।

लखनऊ में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में मायावती ने बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि आकाश आनंद उनके गंभीर रूप से बीमार होने की झूठी खबरें और अफवाहें फैलाकर समाज और पार्टी कार्यकर्ताओं में भ्रम पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं।

UP Politics: क्या है पूरा मामला?

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बसपा प्रमुख मायावती ने कहा कि शनिवार रात को आकाश आनंद ने उनके लखनऊ आवास पर तैनात पर्सनल सेक्रेटरी आलोक कुमार को फोन किया था। फोन पर आकाश ने आलोक कुमार से पूछा, “क्या बहनजी बहुत बीमार हैं?” इस पर सचिव ने जवाब दिया कि बहनजी पूरी तरह स्वस्थ हैं और नियमित रूप से अपना काम कर रही हैं।

मायावती ने दावा किया कि सच जानने के बाद आकाश आनंद ने आलोक कुमार से कहा, “बहनजी को मत बताना कि मैंने फोन किया था।” बसपा प्रमुख ने इस कॉल पर आपत्ति जताते हुए कहा कि आकाश की मंशा इसके पीछे सही भी हो सकती है और खराब भी। (UP Politics)

ससुर के इशारे पर काम कर रहे हैं आकाश

मायावती ने इस दौरान आकाश आनंद की राजनीतिक समझ और आत्मनिर्भरता पर भी बड़ा हमला बोला।उन्होंने साफ तौर पर कहा कि आकाश आनंद आज भी अपने ससुर पूर्व राज्यसभा सांसद अशोक सिद्धार्थ के दिमाग और इशारे पर काम कर रहे हैं और वह अपने दिमाग का इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं।

गौरतलब है कि कुछ दिन पहले ही मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर यह शर्त रखी थी कि अगर आकाश आनंद को पार्टी में वापसी करनी है, तो उनके ससुर अशोक सिद्धार्थ को राजनीति से संन्यास लेना होगा। अशोक सिद्धार्थ द्वारा संन्यास की घोषणा के महज कुछ ही घंटों बाद मायावती ने एक और चौंकाने वाला फैसला लेते हुए आकाश आनंद को पार्टी से निष्कासित कर दिया था। (UP Politics)

परिवारवाद पर मायावती का सख्त रुख और दीपिका आनंद का जिक्र

प्रेस कॉन्फ्रेंस से ठीक एक दिन पहले, शनिवार को मायावती ने सोशल मीडिया पर एक लंबा पोस्ट शेयर कर पार्टी के सिद्धांतों और संस्थापक मान्यवर कांशीराम के आदर्शों की याद दिलाई थी। मायावती ने कहा कि कांशीराम जी की तरह उन्होंने भी हमेशा अपने भाई-बहनों और रिश्तेदारों को विधायक, सांसद या मंत्री जैसे राजनीतिक लाभ के पदों से दूर रखा है। उन्होंने साफ कर दिया कि उनके भाई आनंद कुमार के दोनों बेटों आकाश आनंद और ईशान आनंद में से किसी को भी अब बसपा में कोई राजनीतिक पद या जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी।

दीपिका आनंद को आगे करने के संकेत

मायावती ने यह भी जोड़ा कि वह अविवाहित हैं, इसलिए सांगठनिक कार्यों में मदद के लिए अपने भाई आनंद कुमार को साथ रखती हैं। लेकिन भविष्य में अगर उनके भाई को मदद की जरूरत पड़ी, तो उनकी इकलौती बेटी कुमारी दीपिका आनंद उनकी मदद कर सकती हैं। इसे भविष्य में दीपिका आनंद को पार्टी में किसी बड़ी भूमिका में लाने के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। (UP Politics)

सांगठनिक बदलाव और आगामी रणनीति

इस घरेलू और राजनीतिक विवाद के बीच मायावती ने बहुजन समाज पार्टी के भीतर कई बड़े प्रशासनिक बदलाव भी किए हैं। पार्टी में आंतरिक गुटबाजी को रोकने और संगठन को कसने के लिए उन्होंने ‘मुख्य सेक्टर प्रभारी’ के पद को पूरी तरह से खत्म कर दिया है। उनका मानना है कि इससे पार्टी को जमीनी स्तर पर फायदा होगा। बेटों को किनारे करने के बावजूद मायावती ने अपने भाई और बसपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष आनंद कुमार पर अपना भरोसा बरकरार रखा है और संगठन में उनकी ताकत को और बढ़ा दिया है।

उत्तर प्रदेश की राजनीति पर इसका असर

उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव नजदीक आ रहे हैं। ऐसे में बसपा जो लगातार कई चुनावों से राजनीतिक रूप से कमजोर हुई है, उसके लिए यह आंतरिक कलह एक बड़ा झटका साबित हो सकती है। एक तरफ जहां आकाश आनंद को युवाओं के बीच बसपा का एक आक्रामक और नया चेहरा माना जा रहा था, वहीं मायावती द्वारा उन्हें बार-बार किनारे करने और अब सीधे तौर पर साजिश रचने का आरोप लगाने से यह साफ हो गया है कि बसपा में फिलहाल उत्तराधिकार की लड़ाई थमी नहीं है। (UP Politics)

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस विवाद से पार्टी के पारंपरिक कैडर और दलित समाज में एक गलत संदेश जा सकता है, जिसका सीधा फायदा समाजवादी पार्टी या भाजपा जैसी विरोधी पार्टियां उठाने की कोशिश करेंगी।

Vaishali
Author: Vaishali

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