UP Politics: बहुजन समाज पार्टी (BSP) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने आगामी विधानसभा चुनावों से पहले पार्टी संगठन को चुस्त-दुरुस्त करने के लिए एक बड़ा संगठनात्मक फेरबदल किया है। मायावती ने पहले से चले आ रहे छह सेक्टरों के ढांचे को खत्म करके पूरे देश के संगठनात्मक ढांचे को तीन नए सेक्टरों में पुनर्गठित किया है। इस नए फैसले के तहत सबसे महत्वपूर्ण कदम यह उठाया गया है कि राजनीतिक रूप से देश के सबसे अहम राज्य उत्तर प्रदेश और उसके पड़ोसी राज्य उत्तराखंड की कमान मायावती ने सीधे अपने हाथों में रखी है।
हाल ही में पार्टी मुख्यालय लखनऊ में हुई राष्ट्रीय कार्यकारिणी और वरिष्ठ पदाधिकारियों की मैराथन बैठक के बाद इस त्रि-स्तरीय फॉर्मूले को आधिकारिक रूप से अमलीजामा पहनाया गया। यह सांगठनिक बदलाव ऐसे समय में आया है, जब पार्टी अपने अस्तित्व की सबसे कठिन राजनीतिक लड़ाई लड़ रही है और आगामी विधानसभा चुनावों में अपने दम पर उतरने का ऐलान कर चुकी है।
UP Politics: तीन नए सेक्टर और उनके सिपहसालार
मायावती द्वारा तैयार की गई इस नई व्यवस्था के तहत, पूर्व में मौजूद छह सेक्टरों की व्यवस्था को समाप्त कर देश को तीन व्यापक जोन या सेक्टरों में बांट दिया गया है। इन तीन सेक्टरों की जिम्मेदारी बेहद सधे हुए और भरोसेमंद नेताओं को सौंपी गई है।
सेक्टर-1: (उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड) इस सबसे महत्वपूर्ण सेक्टर की कमान खुद बसपा सुप्रीमो मायावती संभालेंगी। लखनऊ स्थित केंद्रीय कार्यालय से इन दोनों राज्यों के जमीनी कामकाज, बूथ कमेटियों और चुनावी तैयारियों की हर दिन समीक्षा की जाएगी।
सेक्टर-2: इसमें 10 राज्यों को शामिल किया गया है। (दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, चंडीगढ़, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, बिहार और झारखंड)। राज्यसभा सांसद रामजी गौतम और वरिष्ठ नेता सुरेश राव को इस सेक्टर का जिम्मा दिया गया है। रामजी गौतम लंबे समय से मायावती के संकटमोचक रहे हैं और उन्हें इन 10 राज्यों में कैडर को पुनर्जीवित करने का काम सौंपा गया है। (UP Politics)
सेक्टर-3: इस सेक्टर के तहत 9 राज्यों को रखा गया है, जिसका प्रभारी पूर्व राज्यसभा सदस्य राजाराम और अतरसिंह यादव को बनाया गया है। राजाराम जमीनी स्तर पर संगठन के काम के लिए जाने जाते हैं।
युवाओं और नए चेहरों पर दांव: ईशान आनंद का बढ़ता कद
इस सांगठनिक फेरबदल की पृष्ठभूमि में बसपा के भीतर चल रहा ‘पॉवर शिफ्ट’ भी एक बड़ा कारण है। मायावती ने बड़े भतीजे आकाश आनंद को अपरिपक्वता और अन्य सांगठनिक कारणों से राष्ट्रीय संयोजक के पद से पूरी तरह मुक्त कर दिया था। इसके ठीक बाद, उन्होंने छोटे भतीजे ईशान आनंद पर बड़ा भरोसा जताते हुए उन्हें पार्टी का नया राष्ट्रीय संयोजक नियुक्त किया है।
लंदन से लॉ की पढ़ाई कर चुके युवा ईशान आनंद को इस नई व्यवस्था में काफी सक्रिय भूमिका दी गई है। बाढ़ प्रभावित और सांगठनिक रूप से कमजोर राज्यों का दौरा करने और वहां के युवाओं व दलित मतदाताओं को सीधे पार्टी से जोड़ने की जिम्मेदारी ईशान को सौंपी गई है। वह सीधे इन राज्यों से ग्राउंड रिपोर्ट तैयार कर मायावती को सौंपेंगे। (UP Politics)
बूथ और विधानसभा स्तर पर आक्रामक माइक्रो-मैनेजमेंट
इस बड़े फेरबदल के साथ ही मायावती ने पार्टी के भीतर शीर्ष स्तर के कई पदों को भी तर्कसंगत बनाया है। पुराने दो-दो जिला प्रभारियों के पदों को पूरी तरह खत्म कर दिया गया है ताकि कमान की चेन सीधी और पारदर्शी रहे। अब सीधे विधानसभा क्षेत्र अध्यक्षों, महासचिवों और प्रभारियों को जिम्मेदारी दी गई है। प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र के सभी सेक्टरों (आमतौर पर 35 से 40 सेक्टर) को दो हिस्सों में बांटा गया है।
जमीनी कमियों को दूर करने के लिए पदाधिकारियों को हर दिन कम से कम 4 नए बूथों का गठन करने का कड़ा निर्देश मिला है। बसपा के सांगठनिक ढांचे में एक सेक्टर के तहत 10 बूथ आते हैं, और इस पूरे रीस्ट्रक्चरिंग कार्य को आगामी तीन महीनों के अंदर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। (UP Politics)
‘अकेले चलो’ की राह और मिशन-2027
पार्टी के भीतर हुए इस कायाकल्प का मकसद उत्तर प्रदेश का आगामी विधानसभा चुनाव है। उत्तर प्रदेश की राजनीति में फिलहाल समाजवादी पार्टी (SP) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच सीधी टक्कर देखी जा रही है, जिससे बसपा हाशिए पर नजर आने लगी है। हालिया आम चुनावों में पार्टी का खाता तक नहीं खुल सका था।
इस संकट से उबरने के लिए मायावती ने साफ कर दिया है कि बसपा उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब में किसी भी बड़ी या क्षेत्रीय पार्टी के साथ कोई गठबंधन नहीं करेगी और पूरी तरह अपने दम पर चुनाव मैदान में उतरेगी। उनका मानना है कि गठबंधन करने से बसपा का मूल कैडर वोट बैंक दूसरी पार्टियों में स्थानांतरित हो जाता है, लेकिन पार्टी को बदले में सहयोगियों का वोट नहीं मिल पाता। (UP Politics)
करो या मरो की स्थिति में बसपा
मायावती द्वारा देश को तीन सेक्टरों में बांटना और उत्तर प्रदेश की सीधे खुद मॉनिटरिंग करना यह दर्शाता है कि वे अब किसी भी तीसरे स्तर के फीडबैक पर निर्भर नहीं रहना चाहतीं। नए और शिक्षित युवाओं जैसे ईशान आनंद को आगे लाना और बूथ स्तर के संगठन को नए सिरे से खड़ा करना, बसपा को पारंपरिक ढर्रे से निकालकर आधुनिक और आक्रामक चुनावी मशीनरी में बदलने का एक साहसिक प्रयास है। यह सांगठनिक सर्जरी आगामी चुनावों में हाथी की रफ्तार कितनी बढ़ा पाती है, यह तो वक्त तय करेगा, लेकिन मायावती ने यह साफ संदेश दे दिया है कि वे मैदान छोड़ने के मूड में बिल्कुल नहीं हैं।









