UP Politics: उत्तर प्रदेश की सियासत में 10 सितंबर 2026 को एक ऐसा नजारा देखने को मिला, जिसने सत्ता के गलियारों से लेकर पुलिस महकमे तक हड़कंप मचा दिया। सूबे की भाजपा सरकार में कैबिनेट मंत्री और निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. संजय निषाद लखनऊ स्थित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) के पोस्टमार्टम हाउस के बाहर धरने पर बैठ गए।
यह कदम उन्होंने अपनी ही सरकार की पुलिस के खिलाफ, गोंडा के एक बर्तन व्यापारी और अपनी पार्टी के सक्रिय कार्यकर्ता विनोद कुमार साहनी की निर्मम हत्या के विरोध में उठाया है। इस धरने ने जहां उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था की स्थिति पर विपक्ष को बैठे-बिठाए एक बड़ा मुद्दा थमा दिया है, वहीं सरकार के भीतर गठबंधन सहयोगियों के बीच बढ़ते असंतोष को भी चौराहे पर लाकर खड़ा कर दिया है।
UP Politics: क्या है पूरा मामला?
यह पूरा मामला उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले के परसपुर थाना क्षेत्र का है। मृतक विनोद कुमार साहनी पेशे से बर्तन कारोबारी थे और निषाद पार्टी के जमीनी कार्यकर्ता थे। आरोप है कि कुछ सामंतवादी मानसिकता रखने वाले दबंगों ने उन पर गोली और चाकुओं से जानलेवा हमला किया।
घायल अवस्था में परिजनों ने उन्हें तत्काल स्थानीय परसपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) पहुंचाया, जहां से नाजुक हालत को देखते हुए डॉक्टरों ने उन्हें गोंडा मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया। स्थिति में सुधार न होने पर उन्हें बेहतर इलाज के लिए लखनऊ के KGMU अस्पताल में भर्ती कराया गया। करीब एक दिन तक जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ने के बाद, गुरुवार दोपहर को विनोद ने दम तोड़ दिया। (UP Politics)
लखनऊ के KGMU में सियासी उबाल: धरने पर बैठे मंत्री
जैसे ही विनोद साहनी की मौत की खबर लखनऊ फैली, कैबिनेट मंत्री डॉ. संजय निषाद तुरंत KGMU के पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे। उन्होंने शोकाकुल परिजनों से मुलाकात की और हर संभव मदद का भरोसा दिया। इसके बाद वे पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली और आरोपियों की गिरफ्तारी न होने से आक्रोशित होकर पोस्टमार्टम हाउस के बाहर ही जमीन पर धरने पर बैठ गए। इस धरने की गंभीरता को देखते हुए वीआईपी मूवमेंट बढ़ गया।
संजय निषाद के समर्थन में विकासशील इंसान पार्टी (VIP) के प्रमुख मुकेश सहनी और समाजवादी पार्टी के नेता राजपाल कश्यप भी KGMU पोस्टमार्टम हाउस पहुंच गए। विपक्षी नेताओं की मौजूदगी और अपनी ही सरकार के मंत्री के धरने ने इस मामले को पूरी तरह से राजनीतिक रंग दे दिया है। धरने पर बैठे संजय निषाद ने दो टूक शब्दों में कहा, “अपराधी की कोई जाति नहीं होती। जिस तरह से हमारे कार्यकर्ता को निशाना बनाया गया, वह बेहद पीड़ादायक है। हम इस अन्याय को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेंगे।” (UP Politics)
मंत्री संजय निषाद की प्रमुख मांगें और अल्टीमेटम
अपनी ही सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलने वाले संजय निषाद ने गोंडा पुलिस प्रशासन पर गंभीर लापरवाही और ढुलमुल रवैया अपनाने का आरोप लगाया है। उन्होंने मांग की है कि पुलिस सभी नामजद आरोपियों को अविलंब गिरफ्तार करे और मामले में सख्त से सख्त धाराएं जोड़ी जाएं। परिजनों के आरोपों के आधार पर, लापरवाही बरतने वाले परसपुर के थानाध्यक्ष और शाहपुर के चौकी इंचार्ज सहित संबंधित पुलिसकर्मियों को तत्काल सस्पेंड नहीं, बल्कि सीधे सेवा से बर्खास्त किया जाए।
डॉ. निषाद ने पुलिस प्रशासन को अल्टीमेटम दिया है कि यदि गुरुवार की रात तक सभी आरोपियों की गिरफ्तारी और पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो वे शुक्रवार को खुद गोंडा पहुंचकर एसएसपी (SSP) कार्यालय और उनके सरकारी आवास का घेराव करेंगे। (UP Politics)
सरकार और पुलिस के लिए असहज स्थिति
यह पहला मौका नहीं है जब डॉ. संजय निषाद ने कानून-व्यवस्था या प्रशासनिक रवैये को लेकर अपनी नाराजगी जताई हो, लेकिन लखनऊ के एक प्रमुख मेडिकल संस्थान के पोस्टमार्टम हाउस पर धरना देना सरकार के लिए बेहद असहज करने वाली स्थिति है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार हमेशा अपराध और अपराधियों के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ और सख्त पुलिस कार्रवाई की बात करती है। ऐसे में जब सरकार का एक कैबिनेट मंत्री खुद पुलिस पर निष्क्रियता का आरोप लगाकर धरने पर बैठ जाए, तो पुलिस प्रशासन के इकबाल पर गंभीर सवाल उठते हैं।
गठबंधन के भीतर का तनाव
लोकसभा चुनाव 2024 के बाद से ही निषाद पार्टी और भाजपा के बीच कई मुद्दों जैसे अनुसूचित जाति आरक्षण और सीटों का बंटवारा को लेकर अंदरूनी खींचतान की खबरें आती रही हैं। इस घटना ने उस सियासी खाई को और चौड़ा करने का काम किया है। मुकेश सहनी और सपा नेता राजपाल कश्यप का मौके पर पहुंचना यह दर्शाता है कि विपक्षी दल पिछड़े और निषाद समुदाय के वोट बैंक को साधने के लिए इस मुद्दे को छोड़ने वाले नहीं हैं। (UP Politics)









