UP Politics: उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना के खिलाफ सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक और अभद्र टिप्पणी करने के मामले में कानपुर पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। भारतीय जनता युवा मोर्चा (BJYM) के एक नेता की शिकायत पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने कांग्रेस के नगर ग्रामीण जिलाध्यक्ष समेत 6 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। इस मामले को लेकर राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं।
UP Politics: क्या है पूरा मामला?
यह मामला कानपुर के चकेरी थाना क्षेत्र का है। सफीपुर लाल बंगला निवासी और BJYM के रामादेवी मंडल उपाध्यक्ष अंशु गुप्ता ने पुलिस में एक लिखित तहरीर दी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि 17 अक्टूबर 2026 को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना को निशाना बनाते हुए बेहद अपमानजनक और आपत्तिजनक टिप्पणियां की गईं। इसके साथ ही कुछ आपत्तिजनक वीडियो भी पोस्ट किए गए, जिनका मुख्य उद्देश्य विधानसभा अध्यक्ष की सामाजिक और राजनीतिक छवि को धूमिल करना था।
फर्जी आईडी ‘बहानाजी’ का खेल
शिकायतकर्ता अंशु गुप्ता के अनुसार, सोशल मीडिया पर ‘बहानाजी’ नाम से एक फर्जी फेसबुक आईडी बनाई गई है। इस फर्जी प्रोफाइल का इस्तेमाल करके लगातार यूपी विधानसभा अध्यक्ष के खिलाफ भ्रामक, अशोभनीय और अमर्यादित सामग्रियां साझा की जा रही थीं। (UP Politics)
कांग्रेस जिलाध्यक्ष समेत 6 लोग नामजद
बीजेपी नेता की तहरीर के आधार पर चकेरी पुलिस ने त्वरित एक्शन लिया है। इस मामले में कुल 6 लोगों को आरोपी बनाया गया है, जिनमें मुख्य रूप से कांग्रेस के नगर ग्रामीण जिलाध्यक्ष संदीप शुक्ला शामिल हैं। संदीप शुक्ला के अलावा पुलिस ने 5 अन्य स्थानीय युवकों को भी नामजद किया है, जिनमें तरुष पटवा, अंकित कनौजिया, रवि पटवा, निखिल गुप्ता, संदीप शुक्ला (कांग्रेस नेता) शामिल हैं।
पुलिस की कानूनी कार्रवाई और धाराएं
चकेरी थाना प्रभारी अजय प्रकाश मिश्र ने मीडिया को बताया कि BJYM नेता की शिकायत पर अपराधिक मानहानि और सूचना प्रौद्योगिकी (IT) अधिनियम की अन्य सुसंगत धाराओं के तहत मुकदमा रजिस्टर्ड कर लिया गया है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने इसे गंभीरता से लिया है। वर्तमान में चकेरी थाना पुलिस के साथ-साथ साइबर सेल की टीम को भी काम पर लगाया गया है। (UP Politics)
साइबर एक्सपर्ट्स उन सभी लिंक्स, वीडियो और फर्जी फेसबुक आईडी की तकनीकी जांच कर रहे हैं जहां से ये पोस्ट वायरल हुए थे। पुलिस का कहना है कि साक्ष्यों को डिजिटल रूप से इकट्ठा करने के बाद आरोपियों के खिलाफ आगे की कड़ी वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
पहले भी आ चुके हैं ऐसे मामले
गौरतलब है कि अगस्त 2026 में ही उत्तर प्रदेश विधानसभा सचिवालय के प्रमुख सचिव प्रदीप कुमार दुबे ने सूचना विभाग को एक पत्र जारी किया था। उस पत्र में साफ चेतावनी दी गई थी कि विधानसभा अध्यक्ष या विधानसभा के अधिकारियों/कर्मचारियों के खिलाफ सोशल मीडिया पर भ्रामक, असत्य या आपत्तिजनक जानकारी पोस्ट करने वालों पर सख्त एफआईआर की जाएगी। इसके बावजूद सितंबर महीने में भी नौबस्ता थाने में एक अनूप गुप्ता नामक युवक पर महाना के खिलाफ अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने पर केस दर्ज हुआ था। (UP Politics)
सोशल मीडिया पर राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के चक्कर में अमर्यादित भाषा का प्रयोग लगातार बढ़ता जा रहा है। यूपी विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना जैसे संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति के खिलाफ फर्जी आईडी बनाकर की गई इस टिप्पणी ने अब कानूनी रूप ले लिया है। कांग्रेस और बीजेपी नेताओं के बीच इस मामले को लेकर कानपुर में राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गई है। अब देखना यह होगा कि साइबर सेल की जांच में इस फर्जी आईडी ‘बहानाजी’ के पीछे का असली मास्टरमाइंड कौन निकलता है।









