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यूपी राज्यसभा चुनाव की तस्वीर साफ! निर्दलीय उम्मीदवारों के नामांकन खारिज; 10 सीटों पर अब 10 ही उम्मीदवार

UP Rajya Sabha Election

UP Rajya Sabha Election: उत्तर प्रदेश में होने वाले आगामी राज्यसभा चुनाव की तस्वीर पूरी तरह साफ हो गई है। निर्वाचन आयोग द्वारा नामांकन पत्रों की स्क्रूटनी के दौरान दोनों निर्दलीय प्रत्याशियों का नामांकन खारिज कर दिया गया है। इसके बाद अब उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों के लिए केवल 10 उम्मीदवार ही मैदान में शेष बचे हैं, जिससे भाजपा के 8 और समाजवादी पार्टी के 2 प्रत्याशियों का निर्विरोध चुना जाना पूरी तरह तय माना जा रहा है।

UP Rajya Sabha Election: स्क्रूटनी में क्यों कटे निर्दलीय प्रत्याशियों के पर्चे?

उत्तर प्रदेश राज्यसभा द्विवार्षिक चुनाव के लिए कुल 12 प्रत्याशियों ने नामांकन दाखिल किया था। मुख्य मुकाबला भारतीय जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी के बीच था, लेकिन दो निर्दलीय उम्मीदवारों कांटे सायन्ना और ओंकार नाथ चौरसिया की एंट्री से चुनावी गणित में थोड़ी हलचल दिखाई दे रही थी। रिटर्निंग ऑफिसर और विशेष सचिव अजीत वर्मा द्वारा की गई जांच में दोनों निर्दलीय उम्मीदवारों के पर्चों में गंभीर कमियां पाई गईं।

कांटे सायन्ना के नामांकन पत्र में प्रस्तावक का कॉलम खाली था और आवश्यक 10 विधायकों का समर्थन नहीं था। वहीं, ओंकार नाथ चौरसिया का आवश्यक प्रस्तावक न होने और जरूरी दस्तावेजों की कमी के कारण इनका पर्चा भी निरस्त कर दिया गया।

राज्यसभा चुनाव नियमों के अनुसार, किसी भी उम्मीदवार के नामांकन के लिए विधानसभा के कम से कम 10 विधायकों का प्रस्तावक के रूप में हस्ताक्षर होना जरूरी है। किसी भी राजनीतिक दल का समर्थन न होने के कारण ये दोनों निर्दलीय उम्मीदवार इस औपचारिकता को पूरा नहीं कर सके, जिसके चलते चुनाव आयोग ने इनके आवेदन निरस्त कर दिए। (UP Rajya Sabha Election)

अब मैदान में केवल ये 10 चेहरे, निर्विरोध निर्वाचन तय

    दोनों निर्दलीय उम्मीदवारों के बाहर होने के बाद, अब चुनावी मैदान में सीटों के बराबर यानी ठीक 10 उम्मीदवार ही बचे हैं। इसके कारण आगामी 16 अक्टूबर को होने वाले मतदान की आवश्यकता समाप्त हो गई है। 9 अक्टूबर को नाम वापसी की अंतिम समय सीमा समाप्त होते ही इन सभी उम्मीदवारों के निर्विरोध निर्वाचन की आधिकारिक घोषणा कर दी जाएगी।

    वैध पाए गए उम्मीदवारों की लिस्ट में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की ओर से धर्मपाल सिंह, राधाकांत ओझा, विद्यासागर सोनकर, प्रकाश पाल, गोपी कृष्णा पांडेय, प्रियंका सिंह रावत, श्रुति गंगवार और राम प्रताप सिंह चौहान शामिल हैं। वहीं, समाजवादी पार्टी (SP) की ओर से प्रो. राम गोपाल यादव और धनराज परिमल नाथवानी के नाम वैध उम्मीदवारों की सूची में शामिल हैं। (UP Rajya Sabha Election)

    अखिलेश यादव का ‘मास्टरस्ट्रोक’ या रणनीति?

    इस चुनाव में सबसे ज्यादा चर्चा समाजवादी पार्टी के रुख की रही। उत्तर प्रदेश विधानसभा में मौजूदा संख्या बल के हिसाब से एक राज्यसभा उम्मीदवार को जीतने के लिए 37 प्रथम वरीयता के वोटों की जरूरत होती है।भाजपा नीत एनडीए गठबंधन के पास वर्तमान में 288 विधायकों का मजबूत समर्थन है, जिससे उनके 8 उम्मीदवारों की जीत बेहद आसान थी। वहीं, सपा और कांग्रेस गठबंधन के पास करीब 102 विधायक हैं, जो दो सीटों को आसानी से जिताने के लिए काफी थे।

    राजनीतिक गलियारों में कयास लगाए जा रहे थे कि सपा अपना तीसरा उम्मीदवार उतारकर भाजपा को चुनौती दे सकती है और चुनाव को दिलचस्प बना सकती है। इसके लिए क्रॉस-वोटिंग की संभावनाएं भी तलाशी जा रही थीं। लेकिन ऐन वक्त पर सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने तीसरा उम्मीदवार न उतारने का फैसला किया। अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के जरिए अपनी रणनीति साफ करते हुए लिखा, “अब हमारी नजर तीन पर नहीं, बल्कि 403 पर है।” (UP Rajya Sabha Election)

    इसका सीधा संदेश था कि सपा राज्यसभा की एक अतिरिक्त सीट के फेर में पड़कर विधायकों की क्रॉस-वोटिंग का जोखिम नहीं उठाना चाहती थी, बल्कि उनका पूरा ध्यान आगामी 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की सभी 403 सीटों पर केंद्रित है।

    भाजपा का शक्ति प्रदर्शन और आगामी संदेश

    दूसरी तरफ, भारतीय जनता पार्टी ने इस चुनाव को आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 के सेमीफाइनल के रूप में लिया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, दोनों उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक, और एनडीए के सहयोगी दलों (निषाद पार्टी, अपना दल-एस, रालोद और सुभासपा) के प्रमुखों की मौजूदगी में भाजपा उम्मीदवारों ने नामांकन दाखिल कर अपनी एकजुटता और मजबूत सांगठनिक शक्ति का प्रदर्शन किया था। भाजपा नेताओं का दावा है कि उनके उम्मीदवारों का सामाजिक समीकरण (PDA की काट) 2027 के चुनावों में विपक्ष के नैरेटिव को पूरी तरह ध्वस्त कर देगा। (UP Rajya Sabha Election)

    दो निर्दलीय उम्मीदवारों के पर्चे खारिज होने के साथ ही उत्तर प्रदेश राज्यसभा चुनाव का सस्पेंस पूरी तरह खत्म हो चुका है। बिना किसी क्रास-वोटिंग के डर या राजनीतिक जोड़-तोड़ के, भाजपा अपने कोटे की 8 और सपा अपने कोटे की 2 सीटें आसानी से जीतने जा रही है। औपचारिक तौर पर बस 9 अक्टूबर की तारीख का इंतजार है, जब लखनऊ के विधान भवन से सभी 10 दिग्गजों के निर्विरोध चुने जाने का आधिकारिक प्रमाण पत्र जारी कर दिया जाएगा।

    Vaishali
    Author: Vaishali

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