UP Rajya Sabha Election 2026: उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले चुनाव आयोग ने उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव की तारीखों का आधिकारिक ऐलान कर दिया है, जिसने पूरे राज्य के सियासी माहौल को पूरी तरह से गरमा दिया है। 22 सितंबर 2026 को जारी कार्यक्रम के मुताबिक 29 सितंबर को चुनाव की अधिसूचना जारी होगी और 6 अक्टूबर तक पर्चे भरे जाएंगे।
इसके बाद 16 अक्टूबर को सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक वोट डाले जाएंगे और उसी दिन शाम 5 बजे से वोटों की गिनती शुरू हो जाएगी। यूपी के साथ-साथ उत्तराखंड की 1 सीट और पश्चिम बंगाल की 1 खाली सीट पर भी इसी दिन वोटिंग होगी।
भाजपा-सपा-बसपा के कई मौजूदा सांसदों की सीटें खाली
यह चुनाव इसलिए भी बेहद खास है क्योंकि इन सीटों पर चुने जाने वाले सदस्यों का कार्यकाल नवंबर 2026 में खत्म हो रहा है। इस चुनाव में रिटायर होने वाले बड़े चेहरों की बात करें तो इनमें केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी, अरुण सिंह, बृजलाल, बीएल वर्मा, नीरज शेखर, गीता शाक्य और सीमा द्विवेदी जैसे भाजपा के बड़े नाम शामिल हैं। इसके साथ ही सपा से रामगोपाल यादव और बसपा से रामजी गौतम की सीटें भी खाली हो रही हैं।
हालांकि भाजपा के पूर्व उपमुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा की सीट उनके इस्तीफा देने और अंडमान-निकोबार के उपराज्यपाल बनने की वजह से पहले ही खाली हो चुकी थी। अब इन 10 सीटों पर कौन से पुराने चेहरे वापस लौटेंगे और किन नए नामों को मौका मिलेगा, इस पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं। (UP Rajya Sabha Election 2026)
397 विधायक, 6 खाली सीटें और 37 वोट का कोटा, समझिए राज्यसभा चुनाव का पूरा गणित
चुनाव आयोग ने वोटिंग के लिए साफ निर्देश दिए हैं कि विधायकों को अपनी पसंद दर्ज करने के लिए केवल चुनाव अधिकारी द्वारा दिए गए खास बैंगनी रंग के स्केच पेन का ही इस्तेमाल करना होगा। अगर यूपी विधानसभा के मौजूदा आंकड़ों और वोटों के गणित को समझें तो यह चुनाव पूरी तरह से नंबर गेम का खेल है। विधानसभा में कुल 397 सदस्य दर्ज हैं और 6 सीटें फिलहाल खाली चल रही हैं।
राज्यसभा चुनाव सिंगल ट्रांसफरेबल वोट सिस्टम यानी आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली से होता है। इस हिसाब से 397 विधायकों के वोटों के आधार पर एक राज्यसभा सीट जीतने के लिए उम्मीदवार को कम से कम 37 प्रथम वरीयता के वोटों का कोटा हासिल करना होगा। (UP Rajya Sabha Election 2026)
289 विधायकों के साथ NDA का मजबूत गणित
इसी गणित के आधार पर भाजपा और सपा के बीच सीटों का बंटवारा पूरी तरह तय होता दिख रहा है। सत्तारूढ़ भाजपा के पास अपने 256 विधायक हैं। अगर इसमें उसके सहयोगियों- अपना दल (सोनेलाल) के 13, राष्ट्रीय लोकदल के 9, सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के 6 और निषाद पार्टी के 5 विधायकों को जोड़ दें, तो एनडीए खेमे के पास कुल 289 विधायकों का अटूट बल बनता है।
37 वोटों के कोटे के हिसाब से एनडीए आसानी से 7 सीटें अपने नाम कर सकता है और उसके पास 30 अतिरिक्त वोट बचते हैं। लेकिन इस चुनाव का सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि भाजपा और उसके सहयोगी दल अपनी ताकत के दम पर आसानी से 8 सीटें जीतने की मजबूत स्थिति में दिख रहे हैं। (UP Rajya Sabha Election 2026)
101 विधायकों के दम पर सपा का नंबर गेम मजबूत, 74 वोट से 2 सीटों का दावा
दूसरी तरफ मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी के पास विधानसभा में 101 विधायक हैं। 37 वोटों के कोटे के हिसाब से सपा आसानी से 2 सीटें जीत सकती है, जिसके लिए उसे 74 वोटों की जरूरत होगी और उसके पास 27 अतिरिक्त वोट बचेंगे। इस चुनाव में सपा को सीधा फायदा मिलता दिख रहा है।
2020 में सपा के पास केवल 1 सीट आई थी, लेकिन इस बार विधायकों की बढ़ी हुई संख्या के दम पर सपा अपनी पुरानी 1 सीट की जगह 2 सीटें राज्यसभा भेजने में कामयाब रहेगी। सपा के लिए अपनी राजनीतिक ताकत को सीटों में बदलना एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। (UP Rajya Sabha Election 2026)
बसपा के पास एक भी विधायक नहीं, रामजी गौतम की सीट पर संकट
इस पूरे चुनाव का सबसे बड़ा झटका बहुजन समाज पार्टी को लगा है। बसपा के पास वर्तमान विधानसभा में एक भी विधायक नहीं बचा है। अगस्त 2026 में बसपा के इकलौते विधायक उमाशंकर सिंह के निधन के बाद विधानसभा में बसपा का खाता पूरी तरह शून्य हो चुका है।
विधायक न होने के कारण बसपा अपने बलबूते पर 37 वोटों का जरूरी कोटा खड़ा ही नहीं कर सकती। इसका सीधा नुकसान यह हुआ है कि बसपा अपने मौजूदा राज्यसभा सांसद रामजी गौतम की सीट दोबारा नहीं बचा पाएगी। बसपा की यह खाली हो रही सीट सीधे तौर पर समाजवादी पार्टी के खाते में जाती दिख रही है।
यूपी के साथ उत्तराखंड और बंगाल में भी 16 अक्टूबर को मतदान
अगर यूपी के बाहर नजर डालें तो उत्तराखंड की 1 राज्यसभा सीट के लिए भी 16 अक्टूबर को ही वोट डाले जाएंगे। उत्तराखंड से मौजूदा सांसद नरेश बंसल का कार्यकाल नवंबर 2026 में पूरा हो रहा है, जो नवंबर 2020 से राज्यसभा में राज्य का प्रतिनिधित्व कर रहे थे। (UP Rajya Sabha Election 2026)
वहीं पश्चिम बंगाल में मामला नियमित चुनाव का न होकर एक खाली हुई सीट के उपचुनाव का है। पश्चिम बंगाल की यह सीट 16 जुलाई 2026 को रुक्मिणी मल्लिक के इस्तीफे के बाद खाली हुई थी। चुनाव आयोग ने तय किया है कि बंगाल की इस सीट पर भी वोटिंग और काउंटिंग 16 अक्टूबर को ही यूपी और उत्तराखंड के साथ कराई जाएगी।
NDA-सपा के बीच सीटों का गणित तय करेगा राज्यसभा की तस्वीर
अगर पूरे समीकरण को एक साथ जोड़कर देखें तो 2027 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले हो रहा यह राज्यसभा चुनाव यूपी की राजनीति में नए शक्ति संतुलन को साफ-साफ दिखा रहा है। 10 सीटों के इस गणित में भाजपा नीत एनडीए अपने 8 सदस्यों को उच्च सदन भेजने में सफल रहेगा, जबकि समाजवादी पार्टी 2 सीटों पर अपना कब्जा जमाएगी।
बसपा का राज्यसभा से सफाया होना और सपा की सीटों का बढ़ना यह बताता है कि आने वाले विधानसभा चुनाव में असली मुकाबला किन दो ताकतों के बीच होने वाला है। 16 अक्टूबर को आने वाले नतीजे यूपी की भावी राजनीति की एक नई तस्वीर साफ कर देंगे। (UP Rajya Sabha Election 2026)









