US-Israel-Iran War: दुनिया जब तीसरे विश्वयुद्ध की आहट से कांप रही थी, ठीक उसी वक्त सत्ता के गलियारों से एक ऐसी खबर आई जिसने वैश्विक राजनीति के समीकरण बदल दिए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच हुई एक ‘सीक्रेट’ फोन कॉल ने पूरी दुनिया में हलचल मचा दी है।
US-Israel-Iran War: क्या ट्रंप और पुतिन बनेंगे ‘पीसमेकर’?
ईरान और इजरायल के बीच धधकती आग को बुझाने के लिए दुनिया के दो सबसे शक्तिशाली नेता एक साथ आए हैं। सूत्रों के मुताबिक, ट्रंप ने पुतिन से स्पष्ट संकेत दिए हैं कि ईरान के खिलाफ चल रहा यह खूनी संघर्ष अब अपने अंतिम पड़ाव पर है।
आपको बता दें कि, इस बातचीत के बाद शांति की उम्मीदें तो जागी हैं, लेकिन चुनौतियां अभी भी पहाड़ जैसी हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि, क्या दोनों नेताओं ने ईरान को बातचीत की मेज पर लाने के लिए एक साझा रणनीति पर चर्चा की है? हालांकि शांति की बात हो रही है, लेकिन कच्चे तेल की सप्लाई चेन को लेकर तनाव अभी भी बरकरार है। (US-Israel-Iran War)
सुरक्षा का ‘बफर जोन’: क्या यही है मध्य-पूर्व में शांति का नया फॉर्मूला?
ट्रंप और पुतिन जानते हैं कि अगर तेल की कीमतें आसमान छूती रहीं, तो शांति का समझौता भी अर्थव्यवस्था को नहीं बचा पाएगा। फिलहाल, इजरायल की सुरक्षा और ईरान की क्षेत्रीय महत्वाकांक्षाओं के बीच एक ‘बफर जोन’ बनाने पर सहमति बन सकती है। (US-Israel-Iran War)
पिछले कई महीनों से शेयर बाजार गिर रहे थे और परमाणु हमले की धमकियां आम हो गई थीं। ऐसे में वाशिंगटन और मॉस्को का एक सुर में बोलना यह दर्शाता है कि अब ‘सुपरपावर’ अपनी जिम्मेदारी समझ रहे हैं। और यदि ट्रंप और पुतिन वास्तव में एकजुट होकर दबाव बनाते हैं, तो ईरान और इजरायल के पास पीछे हटने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा। यह न केवल मध्य पूर्व के लिए, बल्कि पूरी मानवता के लिए एक बड़ी जीत होगी।
क्या यह फोन कॉल सिर्फ एक कूटनीतिक चाल है या वास्तव में शांति की शुरुआत? यह तो आने वाला वक्त बताएगा, लेकिन फिलहाल दुनिया ने उस डर से राहत पाई है जो पिछले कई हफ्तों से उसे सोने नहीं दे रहा था। (US-Israel-Iran War)









