Uttar Pradesh: उत्तर प्रदेश के राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) जिलों में वायु प्रदूषण को 35% तक कम करने के लक्ष्य के साथ 1 अक्टूबर 2026 से एक ऐतिहासिक और बेहद कड़ा नियम लागू हो गया है। अब यूपी के एनसीआर में आने वाले सभी 8 जिलों में वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण पत्र (PUCC) के बिना वाहनों को पेट्रोल, डीजल या सीएनजी नहीं मिलेगी। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के दिशा-निर्देशों के तहत इस ‘नो पीयूसी, नो फ्यूल’ (No PUC, No Fuel) अभियान को धरातल पर उतार दिया गया है।
सर्दियों की दस्तक के साथ ही दिल्ली-एनसीआर की हवा दमघोंटू होने लगती है। इसी जहरीले स्मॉग और प्रदूषण से निपटने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने इस बार तकनीक और कड़े नियमों का एक मजबूत चक्रव्यूह तैयार किया है।
Uttar Pradesh: यूपी के इन 8 जिलों में लागू हुआ नियम
यह नियम उत्तर प्रदेश के उन 8 जिलों में सख्ती से लागू किया गया है जो एनसीआर (NCR) का हिस्सा हैं। अगर आप इन जिलों में रहते हैं या अपनी गाड़ी लेकर यहां जा रहे हैं, तो अपना PUC सर्टिफिकेट जरूर चेक कर लें।
- गौतमबुद्ध नगर (नोएडा/ग्रेटर नोएडा)
- गाजियाबाद
- बुलंदशहर
- मेरठ
- हापुड़
- बागपत
- मुजफ्फरनगर
- शामली
हाईटेक तकनीक से लैस हुए पेट्रोल पंप, ऐसे होगी जांच
कागजी खानापूर्ति और धोखाधड़ी को रोकने के लिए इस बार प्रशासन ने हाईटेक तकनीक का सहारा लिया है। एनसीआर के लगभग 1,041 पेट्रोल पंपों पर ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) कैमरे और विशेष ऐप की व्यवस्था की गई है। जैसे ही कोई वाहन पंप पर आएगा, कैमरा उसकी नंबर प्लेट को स्कैन कर लेगा। नंबर प्लेट स्कैन होते ही एनआईसी (NIC) द्वारा विकसित विशेष ऐप के जरिए वाहन के पीयूसी (PUC) डेटा की रियल-टाइम जांच होगी। (Uttar Pradesh)
अगर वाहन का प्रदूषण सर्टिफिकेट वैध नहीं हुआ या एक्सपायर हो चुका होगा, तो मशीन या सेल्समैन ईंधन देने से मना कर देंगे। सेल्समैन वाहन की फोटो लेकर सीधे एनजीटी (NGT) पोर्टल और विभागीय ग्रुप्स पर अपलोड कर रहे हैं ताकि नियमों का पालन पूरी पारदर्शिता के साथ हो सके।
35% प्रदूषण घटाने का महा-लक्ष्य और ‘नया सफर’ योजना
उत्तर प्रदेश सरकार का मुख्य उद्देश्य वर्ष 2026 तक एनसीआर क्षेत्र में वाहनों से होने वाले उत्सर्जन और औद्योगिक वायु प्रदूषण के स्तर को 30 से 35 प्रतिशत तक कम करना है। इस विजन को पूरा करने के लिए केवल पीयूसी नियम ही नहीं, बल्कि कई अन्य मोर्चों पर भी काम चल रहा है। सरकार ने लाखों की संख्या में एंड-ऑफ-लाइफ (EoL) यानी अपनी तय समयसीमा पूरी कर चुके वाहनों को चिह्नित किया है। दिल्ली-एनसीआर में 10 साल पुराने डीजल और 15 साल पुराने पेट्रोल वाहनों को पूरी तरह प्रतिबंधित और जब्त कर कबाड़ में बदलने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। (Uttar Pradesh)
प्रदूषण को तेजी से घटाने के लिए पब्लिक ट्रांसपोर्ट को इलेक्ट्रिक में बदला जा रहा है। बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रिक बसों को सड़कों पर उतारा जा रहा है। यदि कोई वाहन बिना वैध पीयूसी के सड़क पर दौड़ता हुआ पाया जाता है, तो मोटर वाहन अधिनियम के तहत 10,000 रुपये का भारी-भरकम जुर्माना लगाने का प्रावधान है।
आम जनता और वाहन मालिकों के लिए जरूरी सलाह
इस कड़े नियम के लागू होने के बाद किसी भी परेशानी या विवाद से बचने के लिए वाहन मालिकों को तुरंत कुछ कदम उठाने चाहिए। अपने वाहन के प्रदूषण सर्टिफिकेट की एक्सपायरी डेट तुरंत चेक करें। यदि वह खत्म हो चुका है, तो नजदीकी अधिकृत पीयूसी केंद्र पर जाकर इसे तुरंत रीन्यू कराएं। जितना हो सके इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) या पब्लिक ट्रांसपोर्ट का उपयोग करें। (Uttar Pradesh)
पेट्रोल पंपों पर तैनात सेल्समैन और कर्मचारियों के साथ सहयोग करें, क्योंकि यह व्यवस्था जनता के स्वास्थ्य और स्वच्छ हवा के अधिकार को सुरक्षित करने के लिए ही बनाई गई है। प्रदूषण मुक्त एनसीआर बनाने की दिशा में यूपी सरकार का यह कदम बेहद साहसिक है। अगर इसे पूरी कड़ाई और जनता की भागीदारी के साथ लागू रखा गया, तो आने वाले दिनों में एनसीआर के नागरिकों को सर्दियों के मौसम में भी साफ और सांस लेने योग्य हवा मिल सकेगी।









