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लाल किले से पहली बार गूंजा ‘वंदे मातरम’, बदला स्वतंत्रता दिवस समारोह का प्रोटोकॉल; मोदी सरकार के फैसले पर सियासी बहस तेज

Vande Mataram

Vande Mataram: 15 अगस्त 2026 को भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान इतिहास में पहली बार लाल किले की प्राचीर से राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ गाया गया। यह ऐतिहासिक कदम ‘वंदे मातरम’ गीत की रचना के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में उठाया गया है। इस साल स्वतंत्रता दिवस समारोह के पारंपरिक प्रोटोकॉल में बड़ा बदलाव किया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लाल किले पहुंचने पर राष्ट्रध्वज फहराने और राष्ट्रगान (‘जन गण मन’) बजाने से ठीक पहले ‘वंदे मातरम’ का पूर्ण गायन किया गया।

Vande Mataram: ‘हर दिल वंदे मातरम की धुन पर धड़क रहा है’- पीएम मोदी

इस अवसर को ऐतिहासिक बताते हुए पीएम मोदी ने कहा कि आजादी के बाद यह पहली बार है कि 15 अगस्त के समारोह के दौरान लाल किले की प्राचीरों से ‘वंदे मातरम’ की गूंज सुनाई दी है। लाल किले की प्राचीर से राष्ट्र को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “आज हर दिल वंदे मातरम की धुन पर धड़क रहा है। आज हर घर तिरंगा है, हर मन तिरंगा है।”

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “यह एक ऐतिहासिक दिन है। स्वतंत्रता के बाद, यह पहली बार है कि लाल किले की प्राचीरों से ‘वंदे मातरम’ की गूंज सुनाई दे रही है। आज इस समारोह में उपस्थित सभी लोगों के लिए भी यह एक ऐतिहासिक क्षण है। स्वतंत्रता के बाद पहली बार 15 अगस्त को लाल किले पर ‘वंदे मातरम’ गूंज रहा है।” (Vande Mataram)

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि राष्ट्रगान हर दिल में गूंज रहा है, जबकि तिरंगा हर घर में लहरा रहा है और हर मन में बसा हुआ है। उन्होंने कहा, “आज हम सभी 80वां स्वतंत्रता दिवस मना रहे हैं। आज ‘वंदे मातरम’ का नारा हर दिल में गूंज रहा है। आज तिरंगा हर घर में लहरा रहा है और हर मन में बसा है। राष्ट्र नए संकल्पों को अपनाते हुए उत्साह और जोश के साथ आगे बढ़ रहा है।”

सेना के बैंड ने बजाई गीत की पूरी धुन, हजारों लोगों ने गाया

हाल ही में भारत सरकार द्वारा कानून (राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम संशोधन विधेयक, 2026) में बदलाव कर राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ (Vande Mataram) को आधिकारिक तौर पर राष्ट्रगान के समकक्ष कानूनी दर्जा और संरक्षण दिया गया है। सेना के बैंड द्वारा ‘वंदे मातरम’ की पूर्ण धुन बजाई गई, जिसे समारोह में उपस्थित 5,000 से अधिक विशेष अतिथियों और उपस्थित जनसमूह ने गाया।

इसके साथ ही, वायुसेना के हेलीकॉप्टर द्वारा आसमान से पुष्पवर्षा के दौरान तिरंगे झंडे के साथ ‘वंदे मातरम’ का विशेष ध्वज भी लहराया गया। बता दें, इस अमर गीत की रचना 1876 में बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा की गई थी, जिसे बाद में उनके प्रसिद्ध उपन्यास ‘आनंदमठ’ (1882) में शामिल किया गया था।

शशि थरूर ने अनिवार्य पूर्ण संस्करण पर जताई आपत्ति

वंदे मातरम (Vande Mataram) को लेकर कई आलोचकों का तर्क रहा है कि यह संघ परिवार के बड़े हिंदुत्व एजेंडे का हिस्सा है, जिसके तहत भारत की विविधता और बहुलता का जश्न मनाने वाले राष्ट्रगान की जगह ‘वंदे मातरम’ के सभी छह पदों को प्रमुखता देने की कोशिश हो रही है। ‘वंदे मातरम’ के इन पदों में हिंदू देवी-देवताओं, जिनमें दुर्गा, सरस्वती और लक्ष्मी संदर्भ शामिल हैं, और भारत को एक पूजनीय मातृ देवी के रूप में प्रस्तुत किया गया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और लोकसभा सांसद शशि थरूर ने आपत्ति जताई थी।

थरूर ने एक्स पर लिखा था, ”राष्ट्रपति ने वंदे मातरम संशोधन को मंज़ूरी दे दी है। इसे संसद में बिना चर्चा के पारित किया गया था। इसके तहत राष्ट्रगान के अलावा, हर आधिकारिक समारोह की शुरुआत और अंत में राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ का पूरा संस्करण गाना अनिवार्य होगा।”

”मैं दोनों का बहुत सम्मान करता हूँ और ‘वंदे मातरम’ के पहले दो पद गा सकता हूँ, लेकिन इसके बाक़ी चार पद नहीं, क्योंकि अब तक उन्हें गाना अनिवार्य नहीं था। मैं सिर्फ़ एक व्यावहारिक पहलू की ओर ध्यान दिलाना चाहता हूं, जिसे हमारे अति-उत्साही लोगों ने नज़रअंदाज कर दिया है- इंसानी स्वभाव।” (Vande Mataram)

थरूर का सवाल: क्या सम्मान और धैर्य को कानून से लागू किया जा सकता है?

थरूर ने लिखा है, ”जन गण मन के दौरान लोगों को सम्मानपूर्वक खड़े होकर क़रीब 52 सेकंड तक ध्यान केंद्रित रखना होता है। वहीं ‘वंदे मातरम्’ का पूरा संस्करण तीन मिनट 10 सेकंड का है। तमिलनाडु ने अभी फ़ैसला किया है कि इन दोनों से पहले राज्य गीत ‘तमिल थाई वाज़्थु’ भी गाया जाएगा, जो क़रीब दो मिनट का है।”

”क्या हम सचमुच उम्मीद करते हैं कि हर समारोह की शुरुआत और अंत में लोग क़रीब छह मिनट तक स्थिर खड़े रहकर सम्मानपूर्वक इन गीतों को सुनेंगे? यानी हर समारोह में कुल 12 अतिरिक्त मिनट? क्या सम्मान और धैर्य को क़ानून बनाकर लागू किया जा सकता है? मुझे डर है कि विधेयक का मक़सद यानी राष्ट्रीय गीत के प्रति अधिक सम्मान पैदा करना, पूरा नहीं होगा। बल्कि इसका उल्टा असर हो सकता है।” (Vande Mataram)

DMK ने लगाया हिंदुत्व एजेंडा आगे बढ़ाने का आरोप

दरअसल, मोदी सरकार ने जब संसद में महज 15 मिनट की चर्चा के बाद यह विधेयक पारित कराया, तब भी विपक्षी सांसदों ने इसका विरोध किया था। द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) की सांसद के. कनिमोई ने बीजेपी पर राष्ट्रवाद की आड़ में हिंदुत्व का एजेंडा लाने का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था कि यह क़ानून “फ़ेडरलिज़म के खिलाफ” है और राष्ट्रवाद को कानून के जरिए थोपा नहीं जा सकता।


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Author: Vaishali

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