Yamuna Expressway Bus Fire: ग्रेटर नोएडा में यमुना एक्सप्रेस-वे पर एक बार फिर रफ्तार के इस कॉरिडोर पर मौत का तांडव देखने को मिला है। बुधवार देर रात जेवर थाना क्षेत्र के तहत दयानतपुर गांव और एयरपोर्ट इंटरचेंज के पास एक चलती हुई डबल डेकर स्लीपर एसी बस में अचानक भीषण आग लग गई। इस दर्दनाक हादसे में 9 यात्रियों की जिंदा जलकर मौत हो गई, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल बताए जा रहे हैं। बस में करीब 35 से 50 यात्री सवार थे, जिनमें से कई लोगों ने खिड़की के शीशे तोड़कर और बस से कूदकर अपनी जान बचाई।
Yamuna Expressway Bus Fire: आधी रात को मौत का तांडव… कैसे हुआ हादसा?
यह भीषण हादसा बुधवार और गुरुवार की दरम्यानी रात करीब 12 बजे हुआ। राज कल्पना ट्रैवल्स की यह डबल डेकर स्लीपर एसी बस (रजिस्ट्रेशन नंबर BR 32 PA 8647) दिल्ली/नोएडा से सवारियां लेकर महोबा/बिहार की ओर जा रही थी। बस जब यमुना एक्सप्रेस-वे पर जेवर के पास दयानतपुर गांव के नजदीक पहुंची, तभी अचानक चालक को बस के अगले हिस्से यानी इंजन की तरफ से धुआं और आग की लपटें उठती हुई दिखाई दीं।
चालक ने तुरंत सूझबूझ दिखाते हुए बस को ओवरटेकिंग लेन से हटाकर एक्सप्रेस-वे के किनारे पर खड़ा किया और खुद आग बुझाने का प्रयास किया। लेकिन एसी बस होने और अंदर ज्वलनशील मैटेरियल होने के कारण आग ने पलक झपकते ही विकराल रूप धारण कर लिया। (Yamuna Expressway Bus Fire)
दम घुटने और भगदड़ से बेबस हुए यात्री
प्रत्यक्षदर्शियों और हादसे में सुरक्षित बचे यात्रियों के अनुसार, जब आग लगी तब अधिकांश यात्री गहरी नींद में सो रहे थे। चालक और परिचालक के शोर मचाने पर जब लोगों की आंखें खुलीं, तो पूरी बस काले और जहरीले धुएं से भर चुकी थी। बस के एसी होने के कारण सभी शीशे पूरी तरह बंद थे और आग मुख्य दरवाजे के पास लगी थी, जिसके कारण बाहर निकलने का मुख्य रास्ता बंद हो गया।
बस के अंदर पूरी तरह अंधेरा छा गया और धुएं की वजह से लोगों का दम घुटने लगा। चीख-पुकार और भगदड़ के बीच, जिन यात्रियों को मौका मिला उन्होंने खिड़कियों के शीशे तोड़े और बस से नीचे छलांग लगा दी। 20 से अधिक यात्रियों ने इस तरह अपनी जान बचाई। हालांकि, जो यात्री बस के पिछले केबिनों में गहरे फंसे थे या धुएं के कारण बेहोश हो गए, वे बाहर नहीं निकल सके और 9 लोग अंदर ही जिंदा जल गए। (Yamuna Expressway Bus Fire)
रेस्क्यू ऑपरेशन और खौफनाक मंजर
हादसे की सूचना मिलते ही जेवर थाना पुलिस और एक्सप्रेस-वे की सुरक्षा टीम मौके पर पहुंची। दमकल की 5 गाड़ियों को तुरंत घटना स्थल पर रवाना किया गया। करीब 45 मिनट की कड़ी मशक्कत के बाद फायर फाइटर्स ने आग पर काबू पाया, लेकिन तब तक बस पूरी तरह से जलकर लोहे का ढांचा बन चुकी थी।
अग्निकांड का मंजर इतना खौफनाक था कि बस के भीतर फंसे यात्रियों के शव पूरी तरह कंकाल में तब्दील हो गए थे। शवों को बाहर निकालने के लिए गैस कटर से बस की बॉडी को काटना पड़ा। यह रेस्क्यू ऑपरेशन करीब 5 घंटे तक चला। पुलिस ने सभी शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम और शिनाख्त के लिए भेज दिया है।
सरकार की कार्रवाई और मुआवजे का ऐलान
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस भीषण सड़क हादसे का तुरंत संज्ञान लिया। उन्होंने ट्वीट कर मृतकों के शोक संतप्त परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की और अधिकारियों को निर्देश दिए कि हादसे में घायल हुए लोगों को तुरंत और समुचित चिकित्सा उपचार मुहैया कराया जाए। इसके साथ ही उन्होंने पीड़ितों के लिए आर्थिक सहायता की घोषणा की है। मृतकों के परिवार को ₹2-2 लाख की अनुग्रह राशि दी जाएगी। इसके अलावा, हादसे में घायल हुए प्रत्येक यात्री को ₹50,000 की सहायता राशि प्रदान की जाएगी। (Yamuna Expressway Bus Fire)
इन सवालों के घेरे में प्रशासन और ट्रैवल एजेंसियां
यमुना एक्सप्रेस-वे पर यह कोई पहला बस अग्निकांड नहीं है। इस हादसे ने एक बार फिर एक्सप्रेस-वे पर दौड़ने वाली प्राइवेट स्लीपर बसों के संचालन पर कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। अधिकांश निजी स्लीपर बसों में तय क्षमता से अधिक सवारियां भरी जाती हैं और अंदर कस्टमाइज्ड केबिन बना दिए जाते हैं, जो इमरजेंसी रास्ते को ब्लॉक कर देते हैं। शुरुआती जांच में आग का कारण शॉर्ट सर्किट बताया जा रहा है। लंबी दूरी तय करने वाली इन बसों का नियमित मैकेनिकल और इलेक्ट्रिकल ऑडिट न होना ऐसे हादसों को निमंत्रण देता है।









