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अखिलेश यादव के 18,000 हलफनामों के दावे पर UP CEO ने दिया जवाब, जानें क्या कहा?

UP CEO to Akhilesh Yadav Allegations: उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने 1 सितंबर को चुनाव आयोग पर निशाना साधा। उन्होंने लिखा कि जब ‘जुगाड़ आयोग’AI से सवा करोड़ का घपला पकड़ सकता है तो फिर हमारे स्तर पर दिए गए 18 हजार शपथपत्रों में से केवल 14 का ही जवाब क्यों दिया गया। बचे 17,986 एफिडेविट का जवाब क्यों नहीं दिया गया?

अखिलेश यादव की इस टिप्पणी पर उत्तर प्रदेश के मुख्य चुनाव अधिकारी (सीईओ) ने शुक्रवार को जवाब दिया। सीईओ ने कहा कि उनके कार्यालय को भी 4 सितंबर (गुरुवार) तक इस मामले में मूल रूप में कोई हलफनामा प्राप्त नहीं हुआ है। उन्होंने नागरिकों को आश्वासन दिया कि यदि भविष्य में कोई हलफनामा प्राप्त होता है तो चुनाव आयोग मामले की जांच करेगा।

यूपी सीईओ ने एक एक्स पोस्ट शेयर करते हुए लिखा, “18 हजार हलफनामों के मामले के संबंध में सूचित करना है कि यह मामला भारत निर्वाचन आयोग और उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी से संबंधित है । जिला निर्वाचन अधिकारियों से पूछताछ करने पर पता चला है कि 2022 के विधान सभा चुनाव से पहले बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम गलत तरीके से हटाए जाने की शिकायतों से संबंधित तथाकथित 18 हजार हलफनामों में से 4 सितंबर 2025 तक एक भी हलफनामा संबंधित 33 जिलों के जिला निर्वाचन अधिकारियों या संबंधित 74 विधानसभा क्षेत्रों के निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों को मूल रूप में प्राप्त नहीं हुआ है।”

राज्य चुनाव आयोग ने नागरिकों को आश्वासन दिया कि यदि भविष्य में कोई हलफनामा प्राप्त होता है तो चुनाव आयोग मामले की जांच करेगा। पोस्ट में आगे कहा गया है कि उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय को भी इस मामले से संबंधित 4 सितंबर 2025 तक मूल रूप में कोई हलफनामा प्राप्त नहीं हुआ है। इस शिकायत से संबंधित मूल हलफनामे प्राप्त होते ही त्वरित रूप से गहन जांच कर प्रभावी कार्रवाई की जाएगी और आम जनता को सूचित किया जाएगा।”

अखिलेश यादव ने एक्स पर एक मीडिया रिपोर्ट साझा की, जिसमें मतदाता सूचियों में त्रुटियों को ठीक करने में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के उपयोग का दावा किया गया है। सपा प्रमुख ने लिखा, “जब जुगाड़ आयोग एआई के साथ 1.25 करोड़ का अपना घोटाला पकड़ सकता है, तो केवल 14 हलफनामों का जवाब देने के बाद हमारे द्वारा दिए गए 18,000 हलफनामों में से शेष 17,986 हलफनामों पर ध्यान क्यों नहीं देता?”

आयोगों का समझाया अंतर

वहूीं, एक जवाब में यूपी के सीईओ ने भारत के चुनाव आयोग (ईसीआई) और राज्य चुनाव आयोग की भूमिकाओं और कर्तव्यों के बीच अंतर को स्पष्ट किया। यूपी के सीईओ ने एक्स पर लिखा, “उत्तर प्रदेश के राज्य चुनाव आयोग के हवाले से एआई यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जरिए मतदाता सूचियों में त्रुटियों की पहचान करने और उन्हें ठीक करने की खबर हाल के दिनों में उत्तर प्रदेश के अखबारों में प्रकाशित हुई थी। उत्तर प्रदेश का राज्य चुनाव आयोग उत्तर प्रदेश में स्थित पंचायती राज संस्थाओं और शहरी स्थानीय निकायों के चुनाव से संबंधित मतदाता सूची तैयार करने और उनके चुनाव कराने के लिए जिम्मेदार है।”

पोस्ट में आगे लिखा, “इसके विपरीत, भारत के चुनाव आयोग को लोकसभा, विधानसभा और विधान परिषद के चुनावों से संबंधित मतदाता सूचियों को तैयार करने और बनाए रखने के साथ-साथ इन सदनों के लिए चुनाव कराने का काम सौंपा गया है। अक्सर, आम जनता और यहाँ तक कि मीडिया में भी इस अंतर को लेकर स्पष्टता का अभाव होता है और लोग इन दोनों आयोगों के कार्यों में अंतर से अनजान होते हैं।”

सोशल मीडिया पोस्ट में कहा गया है कि एआई का उपयोग करके मतदाता सूचियों में सुधार से संबंधित रिपोर्ट ईसीआई से संबंधित नहीं है। यूपी के सीईओ ने लिखा, “सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों में भी इस अंतर को लेकर अक्सर जागरूकता की कमी होती है। इस अवसर का उपयोग इस अंतर को उजागर करने के लिए किया जा रहा है। एआई का उपयोग करके मतदाता सूचियों को शुद्ध करने की खबर का भारत के चुनाव आयोग से कोई संबंध नहीं है।”

यह खबर कुछ मीडिया रिपोर्टों में उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची से 1.25 करोड़ नामों को एआई के इस्तेमाल से हटाए जाने का दावा किए जाने के बाद आई है।

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