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कैबिनेट बैठक में योगी सरकार का बड़ा फैसला, परिवार के बीच संपत्ति दान हुआ सस्ता

 

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने नए साल 2026 की शुरुआत में प्रदेश की जनता को एक ऐतिहासिक तोहफा दिया है। लखनऊ के लोकभवन में हुई कैबिनेट बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ‘संपत्ति और विरासत’ से जुड़े नियमों में क्रांतिकारी बदलाव करते हुए ‘गिफ्ट डीड’ (Gift Deed) के दायरे को और व्यापक बना दिया है।

दरअसल, पहले परिवार के भीतर ही जमीन या मकान किसी दूसरे सदस्य के नाम करने पर भारी-भरकम स्टाम्प ड्यूटी चुकानी पड़ती थी, जिसके डर से लोग अक्सर रजिस्ट्री कराने से बचते थे। इससे न केवल पारिवारिक विवाद बढ़ते थे, बल्कि अदालतों में मुकदमों का बोझ भी बढ़ता था। अब योगी सरकार ने फैसला लिया है कि यदि कोई व्यक्ति अपने पुत्र, पुत्री, पिता, माता, पति, पत्नी, बहू, सगा भाई या सगी बहन को अपनी अचल संपत्ति दान (Gift) करता है, तो उसे बाज़ार मूल्य (Circle Rate) के हिसाब से भारी स्टाम्प शुल्क नहीं देना होगा। सरकार ने इसे घटाकर नाममात्र का शुल्क कर दिया है।

शहर में सात प्रतिशत और गांव में पांच प्रतिशत स्टाम्प शुल्क से मिली राहत

स्टांप तथा पंजीयन मंत्री रवींद्र जायसवाल ने बताया कि वर्ष 2022 से पहले पारिवारिक रिश्तों में संपत्ति दान करने पर पूरे सर्किल रेट के अनुसार स्टाम्प शुल्क देना पड़ता था। मुख्यमंत्री के नेतृत्व में यह तय किया गया कि पारिवारिक दान पर केवल पांच हजार रुपये स्टाम्प शुल्क लिया जाएगा। पहले शहरों में कॉमर्शियल प्रॉपर्टी पर सात प्रतिशत और गांवों में पांच प्रतिशत स्टाम्प शुल्क लगता था, लेकिन अब गांव या शहर कहीं भी पारिवारिक दान पर केवल पांच हजार रुपये ही देने होंगे।

कैबिनेट के निर्णय में रिश्तेदारों की परिभाषा और अन्य प्रावधानों को भी स्पष्ट किया गया है, ताकि नियमों के क्रियान्वयन में किसी तरह का भ्रम न रहे. यह छूट अधिसूचना के राजपत्र में प्रकाशित होने की तिथि से तत्काल प्रभाव से लागू होगी।  सरकार का मानना है कि इससे पारिवारिक संपत्ति का वैधानिक हस्तांतरण बढ़ेगा और विवादों में कमी आएगी।

 किसे मिलेगा लाभ

यह छूट केवल परिवार के करीबी सदस्यों के बीच लागू होगी, जिसमें शामिल हैं

  • माता-पिता
  • पति-पत्नी
  • पुत्र-पुत्री
  • पुत्रवधू (बहू)
  • दामाद
  • सगा भाई-सगी बहन
  • पौत्र-पौत्री (पोता-पोती) और नाती-नातिन।

विवादों में कमी: सरकार का मानना है कि इस कदम से परिवारों के बीच संपत्ति को लेकर होने वाले आपसी मनमुटाव और मुकदमों में कमी आएगी, क्योंकि लोग अब कानूनी तौर पर आसानी से मालिकाना हक बदल सकेंगे।

 समय सीमा: यह योजना पहले प्रायोगिक तौर पर लागू की गई थी, लेकिन इसकी अपार सफलता और जनता की मांग को देखते हुए सरकार ने इसे स्थायी या लंबी अवधि के लिए विस्तार देने का निर्णय लिया है।

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