उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से उनके आवास पर मुलाकात की। यह बैठक केवल एक शिष्टाचार भेंट नहीं, बल्कि आगामी राजनीतिक और प्रशासनिक बदलावों के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। “2027 का विजय पथ और यूपी कैबिनेट का नया चेहरा! दिल्ली में मोदी-योगी की एक घंटे की ‘पावर मीटिंग’ ने यूपी की सियासत में हलचल तेज कर दी है। क्या होने वाला है बड़ा उलटफेर?”
सीएम योगी दिल्ली में बीजेपी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन और जेपी नड्डा से भी मुलाकात करेंगे।
मुलाकात के मुख्य बिंदु
यूपी कैबिनेट विस्तार (Cabinet Expansion): 2024 के लोकसभा चुनावों के बाद खाली हुए मंत्री पदों को भरने और 2027 के विधानसभा चुनावों को देखते हुए ‘जातीय और क्षेत्रीय’ समीकरणों को साधने पर चर्चा हुई। पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी समेत कई नए चेहरों को जगह मिल सकती है।

संगठनात्मक बदलाव: मुख्यमंत्री के साथ दोनों डिप्टी सीएम (केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक) भी दिल्ली में हैं। चर्चा है कि संगठन से कुछ चेहरों को सरकार में और कुछ मंत्रियों को संगठन की जिम्मेदारी दी जा सकती है।
यूपी दिवस 2026 और ग्लोबल ब्रांडिंग: 24 से 26 जनवरी तक होने वाले ‘यूपी दिवस’ को वैश्विक स्तर पर मनाने और निवेशकों को आकर्षित करने के लिए मुख्यमंत्री ने पीएम को रोडमैप सौंपा।
इंफ्रास्ट्रक्चर और AI हब: लखनऊ और नोएडा में बन रही ‘AI सिटी’ और जेवर में बन रहे 3,700 करोड़ के सेमीकंडक्टर यूनिट की प्रगति पर पीएम मोदी को अपडेट दिया गया।
प्रयागराज माघ मेला: आगामी माघ मेले की तैयारियों और श्रद्धालुओं की सुविधाओं को लेकर भी बातचीत हुई।
Viksit UP @ 2047: ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य में यूपी के डिजिटल इकोनॉमी और डेटा सेंटर पार्क्स के योगदान पर मंथन हुआ।

मंत्रिमंंडल में कई जगहें खाली
यूपी मंत्रिमंडल में इस समय 54 मंत्री हैं। जबकि अधिकतम 60 मंत्री हो सकते हैं। अगले साल यानी की 2027 में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं. यही वजह है कि अभी इसकी तैयारियां तेज कर दी गई हैं। इसी को देखते हुए बचे हुए पदों को भरने की तैयारी हो रही है. इस मंत्रिमंडल विस्तार में जातिगत समीकरणों के साथ-साथ क्षेत्रीय समीकरणों को भी साधने की कोशिश रहेगी।









