बलिदान और शौर्य की स्मृति! आज देश मना रहा है ‘वीर बाल दिवस’

​आज पूरा राष्ट्र साहिबजादा जोरावर सिंह और साहिबजादा फतेह सिंह के अतुलनीय बलिदान को नमन करते हुए ‘वीर बाल दिवस’ मना रहा है। यह दिन न केवल इतिहास के उस अदम्य साहस की याद दिलाता है, बल्कि देश की युवा पीढ़ी के लिए ‘सौम्य वीरता’ और अडिग सिद्धांतों का प्रतीक भी है। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दिल्ली के भव्य आयोजन में शामिल होंगे। कार्यक्रम की गरिमा को बढ़ाते हुए, प्रधानमंत्री देश के उन 20 असाधारण बच्चों को ‘प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार’ से सम्मानित करेंगे, जिन्होंने विपरीत परिस्थितियों में अदम्य साहस, नवाचार और सेवा का परिचय दिया है।

वीर बाल दिवस क्या सिखाता है?

वीर बाल दिवस हमें सिखाता है कि सत्य और धर्म की रक्षा के लिए दिया गया बलिदान कभी व्यर्थ नहीं जाता। आज सम्मानित होने वाले बच्चे नए भारत के उसी अटूट साहस के प्रतिबिंब हैं।” वहीं दूसरी तरफ कार्यक्रम में अरदास, कीर्तन तथा विचार गोष्ठी का आयोजन हुआ। भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के पदाधिकारियों व स्थानीय लोगों ने भाग लेकर बच्चों और युवाओं को सत्य, साहस और राष्ट्रभक्ति के मार्ग पर चलने का संदेश दिया। झारखंड प्रदेश भाजपा ने भी वीर बाल दिवस पर गुरु गोबिंद सिंह के साहिबजादों के बलिदान को नमन किया है। 

वीर बाल दिवस क्यों मनाया जाता है?

वीर बाल दिवस देश में हर साल 26 दिसंबर को मनाया जाता है। यह दिवस सिखों के दसवें गुरु गुरु गोबिंद सिंह के छोटे साहिबजादों—साहिबजादा जोरावर सिंह (9 वर्ष) और साहिबजादा फतेह सिंह (7 वर्ष) की अद्वितीय वीरता और बलिदान की स्मृति में मनाया जाता है। मुगल शासक वज़ीर ख़ान के अत्याचारों के सामने दोनों बालक धर्म और सत्य से डिगे नहीं और 1705 में सरहिंद में उन्हें दीवार में ज़िंदा चुनवा दिया गया। उनका साहस भारतीय इतिहास में अद्वितीय उदाहरण है।

वीर बाल दिवस की शुरुआत वर्ष 2022 में हुई। इसकी घोषणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जनवरी 2022 में की थी, ताकि बच्चों और युवाओं को साहस, नैतिकता, आत्मबल और राष्ट्रप्रेम के मूल्यों से प्रेरित किया जा सके। यह दिवस देशभर में शैक्षणिक कार्यक्रमों, संगोष्ठियों और श्रद्धांजलि आयोजनों के माध्यम से मनाया जाता है, जिससे आने वाली पीढ़ियाँ वीर बालकों के त्याग से प्रेरणा लें।

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