देश में राजनीतिक उथल-पुथल और राजनीतिक परिदृश्य में एक बड़े बदलाव के बीच, बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने पुष्टि की है कि अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना के नेतृत्व वाली अवामी लीग, अपनी गतिविधियों पर प्रतिबंध के कारण फरवरी 2026 के राष्ट्रीय संसदीय चुनावों में भाग नहीं लेगी। बांग्लादेश में 13वें राष्ट्रीय संसदीय चुनाव 12 फरवरी, 2026 को होने तय हुए हैं।
बांग्लादेश के अंदर मची कलह ने पूरे देश को आग में झोंक दिया हैऔर वहां की सरकार पूरी तरह से हाथ पर हाथ धरे बैठी हुई है। बांग्लादेश में हो रहे बवाल का आंच भारत तक पहुंच गई है। वहा हो रहे अत्याचार को देखते हुए यहां पर भी इसका जमकर विरोध किया गया है। बांग्लादेश में उपद्रव के बीद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अलावा बसपा सुप्रीमो मायावती का भी बयान सामने आया है। जिसके बाद फिर बांग्लादेश में हिंदुओं का उत्पीड़न चर्चा में है।

बांग्लादेश पर क्या बोले सीएम योगी
यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्याथ ने विधानसभा में मुख्य विपक्षी पार्टी समाजवादी पार्टी को ललकारते हुए कहा कि बांग्लादेश में एक हिंदू की लिंचिंग हुई पर विपक्ष कुछ बोल नहीं रहा है। गाजा में मुसलमानों के साथ यही अत्याचार होता है तो विपक्ष उस पर मुखर हो जाता है। योगी ने कहा कि याद रखिए जो लोग अभी बांग्लादेश के अत्याचार पर नहीं बोल रहे हैं कल को जब यूपी सरकार रोहिंग्या और बांग्लादेशियों पर एक्शन लेगी तो इन लोगों को बोलने का अधिकार नहीं होगा। योगी के इस बयान के बाद समाजवादी पार्टी और कांग्रेस की ओर से तो हिंदुओं के उत्पीड़न पर कोई बयान नहीं आया पर बहुजन समाज पार्टी की मुखिया ने जरूर एक्स पर एक पोस्ट करके अपनी चिंता जताई है।
मायावती नें जानिए क्या कहा
मायावती ने पिछले साल भी बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचारों की कड़ी निंदा की थी। सबसे खास बात यह रही कि उन्होंने इस उत्पीड़न को केवल दलितों तक ही सीमित नहीं रखा है,बल्कि समस्त हिंदू समाज की बात कर रही हैं। भारत का विपक्ष, विशेष रूप से कांग्रेस और समाजवादी पार्टी, बांग्लादेश में हिंदुओं पर उत्पीड़न के मुद्दे पर बोलने से बच रहा है। हालांकि इस पर बीजेपी का कहना है कि मुस्लिम वोट बैंक कहीं खिसक ना जाए इस वजह से यो दोनें पार्टियों ने चुप्पी साध रखी है। उदाहरण के लिए, कांग्रेस ने इस मुद्दे पर संसद में कोई बड़ा बयान नहीं दिया, बल्कि संभल हिंसा जैसे घरेलू मुद्दों पर फोकस किया, जहां मुस्लिम समुदाय को निशाना बनाए जाने का आरोप लगाया गया था।

सपा प्रमुख अखिलेश यादव का रिएक्शन बांग्लादेश को लेकर
सपा प्रमुख अखिलेश यादवभी बांग्लादेश मुद्दे को भाजपा की डायवर्सन टैक्टिस बताया और इसे भारत-बांग्लादेश संबंधों का डिप्लोमैटिक मामला करार दिया था। इससे ज़्यादा कुछ भी बोलने से बचते रहे।
विपक्षी दलों का मानना है कि इस मुद्दे पर बोलने से हिंदुत्व की राजनीति को बढ़ावा मिलेगा, जो भाजपा को फायदा पहुंचाएगा। बीजेपी समर्थक कहते हैं कि गाजा जैसे अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर विपक्ष ने मुस्लिम समुदाय के पक्ष में आवाज उठाई है, इसलिए बांग्लादेश पर चुप्पी न साधकर कम से कम दिखावे के लिए ही बैलेंसिंग एक्ट करना चाहिए।
यह तटस्थता उत्तर प्रदेश जैसे राज्य में और भी स्पष्ट है, जहां करीब 19% मुस्लिम वोटर हैं। 2024 के लोकसभा चुनावों में SP-कांग्रेस गठबंधन ने मुस्लिम-दलित-ओबीसी वोटों पर फोकस किया था जिसने 2024 लोकसभा के परिणाम नें यूपी में बीजेपी को बहुत बड़ा डेंट दिया था। सपा और कांग्रेस का मानना है कि अगर बांग्लादेश का मुद्दा उठाने से मुस्लिम वोटर्स में असुरक्षा की भावना बढ़ सकती है। कुल मिलाकर, विपक्ष इस मुद्दे को भाजपा का पोलराइजेशन टूल मानकर उससे दूरी बनाता रहा है।









