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“मिशन 2027 का नया दांव: अखिलेश यादव ने लॉन्च किया ‘PDA पंचांग 2026’, जानिए इसमें क्या है खास ?

“अब पंचांग तय करेगा यूपी की सत्ता का भविष्य! अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) के ‘PDA कैलेंडर'(PDA Calender) ने छेड़ी नई बहस, क्या यह 2027 की जीत का मास्टर स्ट्रोक है या विवादों का नया घर?”

समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने 2027 के ‘मिशन यूपी’ को साधने के लिए एक नया और दिलचस्प दांव चला है। नए साल 2026 की शुरुआत में उन्होंने ‘समाजवादी पीडीए पंचांग-2026’ जारी किया है, जो केवल एक कैलेंडर नहीं बल्कि आने वाले चुनावों के लिए सपा का ‘वैचारिक घोषणापत्र’ माना जा रहा है। अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने इस पंचांग को ‘पीडीए’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) (PDA) राजनीति को घर-घर तक पहुँचाने का जरिया बनाया है।

महापुरुषों का संगम

इस पंचांग में पारंपरिक तिथियों के साथ-साथ PDA समाज के नायकों को विशेष स्थान दिया गया है। इसमें डॉ. बी.आर. अंबेडकर, (BR Ambedkar) राम मनोहर लोहिया, (Ram Manohar Lohiya) मुलायम सिंह यादव, (Mulayam Singh Yadav) कांशीराम और सावित्रीबाई फुले जैसे महापुरुषों की जयंती और पुण्यतिथि को प्रमुखता से दर्ज किया गया है। इसका उद्देश्य नई पीढ़ी को इन नायकों के संघर्षों से जोड़ना है।

 सामाजिक और ऐतिहासिक तिथियां

कैलेंडर में केवल त्यौहार ही नहीं, बल्कि सामाजिक आंदोलनों से जुड़े महत्वपूर्ण दिनों का भी उल्लेख है। अखिलेश यादव का तर्क है कि इतिहास तभी जीवित रहता है जब वह लोगों के दैनिक जीवन का हिस्सा बने।

‘डिजिटल प्लस ट्रेडिशनल’ कनेक्ट

पंचांग को पारंपरिक हिंदू पंचांग की तर्ज पर बनाया गया है ताकि ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के लोग इसे सहजता से अपना सकें। इसमें रोज़मर्रा की ज़रूरतों के लिए उपयोगी कॉलम भी दिए गए हैं।

 सियासी बवाल और विवाद

पंचांग जारी होते ही इस पर राजनीति भी शुरू हो गई है। भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने इसे ‘पाकिस्तानी कैलेंडर’ तक कह डाला। वहीं, भाजपा ने इसमें राम मंदिर निर्माण की तिथि का उल्लेख न होने पर इसे ‘तुष्टिकरण’ की राजनीति बताया है। जिसको लेकर सपा का कहना है कि यह पंचांग समाज के उन वर्गों को सम्मान देने के लिए है जिन्हें मुख्यधारा की राजनीति ने हाशिए पर रखा।

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