“योगी का ‘रिपोर्ट कार्ड’ तैयार: बजट खर्च न करने वाले मंत्रियों की खैर नहीं, CM खुद भेजेंगे चेतावनी पत्र!”

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने नए साल की शुरुआत के साथ ही शासन व्यवस्था में कसावट लाने के लिए एक बड़ा और सख्त कदम उठाया है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के अंतिम महीने (Quarter) की शुरुआत होते ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उन विभागों को निशाने पर लिया है जो जनता के विकास के लिए आवंटित बजट खर्च करने में सुस्ती दिखा रहे हैं।

क्या अधिकारियों और मंत्रियों की सुस्ती यूपी के विकास में रोड़ा बन रही है?  

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने साफ कर दिया है कि तिजोरी में पड़ा पैसा जनता की भलाई के लिए है, फाइलों में बंद रहने के लिए नहीं। अब उन मंत्रियों की शामत आने वाली है जो बजट तो ले लेते हैं लेकिन उसे धरातल पर उतारने में पीछे रह जाते हैं। क्या CM का यह ‘लेटर बम’ उत्तर प्रदेश के विकास की रफ्तार बदल पाएगा?”

उत्तर प्रदेश में वित्तीय वर्ष समाप्ति की ओर है और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बजट उपयोग (Budget Utilization) की समीक्षा के बाद कड़ा रुख अपनाया है। शासन के सूत्रों के अनुसार, कई प्रमुख विभागों ने अब तक आवंटित बजट का 50% हिस्सा भी खर्च नहीं किया है।

मुख्यमंत्री का ‘एक्शन प्लान’

सीधा संवाद (लेटर): मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) उन विभागों की सूची तैयार कर रहा है, जिनका प्रदर्शन सबसे खराब रहा है। इन विभागों के मंत्रियों को मुख्यमंत्री की ओर से व्यक्तिगत पत्र भेजा जाएगा, जिसे एक तरह की ‘प्रशासनिक चेतावनी’ माना जा रहा है।

परफॉरमेंस ऑडिट: सीएम ने निर्देश दिया है कि केवल बजट खर्च करना ही काफी नहीं है, खर्च की गई राशि का ‘क्वालिटी आउटपुट’ भी दिखना चाहिए।

31 मार्च की डेडलाइन: सभी विभागों को निर्देश दिया गया है कि वे 31 मार्च 2026 तक अपने शत-प्रतिशत लक्ष्यों को पूरा करें, अन्यथा बजट सरेंडर करना होगा और संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी।

कौन से विभाग हैं रडार पर?

समीक्षा में पाया गया है कि लोक निर्माण विभाग (PWD), समाज कल्याण, और अल्पसंख्यक कल्याण जैसे कुछ बड़े विभाग बजट खर्च करने के मामले में औसत से पीछे चल रहे हैं। वहीं, कुछ विभागों ने नई योजनाओं के लिए टोकन बजट तो लिया, लेकिन विस्तृत कार्ययोजना (DPR) समय पर तैयार नहीं की।

बाबा की सख्ती करने का क्या है उद्देश्य

भ्रष्टाचार पर रोक: वित्तीय वर्ष के अंत में आनन-फानन में बजट खपाने (March Loot) की प्रवृत्ति को रोकना।

विकास में तेजी: चुनावी साल के करीब आते ही जनता से जुड़े प्रोजेक्ट्स (सड़क, बिजली, स्वास्थ्य) को समय पर पूरा करना।

पारदर्शिता: सरकारी धन का सही समय पर सही जगह उपयोग सुनिश्चित करना।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट लहजे में कहा है कि “जनता का पैसा जनता के काम आना चाहिए, लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।”

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