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राहुल-सोनिया के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट ने जारी किया नोटिस, जानिए क्या है पूरा मामला

देश में भ्रष्टाचार को लेकर हमेशा से राजनीतिक पार्टियां हों या देश की जनता हो सब जानती हैं. उसके बाद भी देश में भ्रष्टाचार ख़त्म होने का नाम नहीं ले रहा हैं। आपको याद होगा साल 2014 में जब बीजेपी ने उस समय के गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना पीएम कैंडिडेट घोषित किया था, जिसके बाद बीजेपी और पीएम मोदी ने कांग्रेस पर भ्रष्टाचार के संगीन आरोप लगाए थे और ये आरोप कांग्रेस के साथ साथ गांधी परिवार पर भी लगाए गए थे। जिसमे सोनिया गांधी और राहुल गांधी का नाम खुले तौर पर शामिल था और आज भी बीजेपी कांग्रेस पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाती रहती है। इसी कड़ी में आज एक बार फिर से सोनिया और राहुल के नाम भ्रष्टाचार को लेकर सामने आए हैं।

नेशनल हेराल्ड केस में राहुल-सोनिया को झटका

नेशनल हेराल्ड केस में कांग्रेस नेता राहुल गांधी और सोनिया गांधी को दिल्ली हाईकोर्ट ने नोटिस जारी किया है। ईडी ने इस मामले में चार्जशीट दाखिल की थी, लेकिन राउज एवेन्यू कोर्ट ने संज्ञान लेने से मना कर दिया था। राउज एवेन्यू कोर्ट के फैसले के खिलाफ ईडी ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी और अब दिल्ली हाईकोर्ट ने इस मामले में सभी आरोपियों को नोटिस भेजा है। दिल्ली हाईकोर्ट ने ईडी की याचिका पर सोनिया गांधी, राहुल गांधी समेत सात आरोपियों को नोटिस जारी किया है।

दिल्ली हाईकोर्ट में सोमवार को नेशनल हेराल्ड केस में ईडी की अपील पर सुनवाई हुई. ईडी की पैरवी सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता कर रहे हैं. मेहता ने दलील दी कि निचली अदालत का संज्ञान लेने से इनकार करने का आदेश पीएमएलए को निरर्थक बनाने के बराबर है। हमने पूरे तथ्यात्मक आधार और टाइम लाइन का विस्तृत ब्यौरा दिया है। एसोसिएटटेड जर्नल लिमिटेड यानी एजेएल को निगमित किया गया है। इसके बाद 2002-2003 के दौरान एजेएल को कांग्रेस का ऋण लगभग 88 करोड़ रुपये होता है। इस मामले में अगली सुनवाई 12 मार्च को होगी।

कोर्ट ने पूछा कि ये एजेएल क्या है?

इस पर ईडी ने कहा कि एसोसिएटेड जर्नल लिमिटेड नामक ये एक गैर-सूचीबद्ध सार्वजनिक कंपनी है। ईडी ने आगे बताया कि यंग इंडिया की ओर से एजेएल को पत्र भेजा गया था। उसमें पहले लिए गए कर्ज की अदायगी या इसे इक्विटी में बदलने की बात कही गई थी। ये सब क्रमबद्ध और सुनियोजित ढंग से एक के बाद एक हुआ है। एजेएल अपनी वार्षिक आम सभा में यानी एजीएम के लिए नोटिस जारी करता है। एआईसीसी के ऋण के वास्तविक तरीके से पहले संपत्ति को हस्तांतरित करने से पहले ही प्रस्ताव पारित कर दिया जाता है। ईडी ने कहा कि असली कहानी अगस्त 2010 से शुरू होती है। एजेएल को ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी ने कुल 90 करोड़ रुपये का ऋण दिया था। इसके 20 दिनों के भीतर नए सिरे से एजेएल में निदेशकों की नियुक्ति की गई थी।

निचली अदालत ने बड़ी गलती की तुषार मेहता

इन सबके बीच एसजी तुषार मेहता ने निचली अदालत पर आरोप लगते हुए कहा कि निचली अदालत ने बड़ी गलती की है। यह सिर्फ इसी केस की बात नहीं है, बल्कि इसका असर कई दूसरे मामलों पर भी पड़ेगा। क्योंकि कोर्ट ने कहा है कि अगर किसी कोर्ट ने प्राइवेट शिकायत पर संज्ञान लिया है, तो ईडी कुछ नहीं कर सकती है।

जानते हैं क्या है नेशनल हेराल्ड केस

2013 में भारतीय जनता पार्टी के पूर्व सांसद डॉ. सुब्रमण्यम स्वामी ने अदालत में एक शिकायत दर्ज की थी। इसमें उन्होंने कहा कि सोनिया और राहुल गांधी समेत कई लोगों ने ‘एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (एजेएल)’ की क़रीब 2000 करोड़ रुपए की संपत्ति को केवल 50 लाख रुपए में ‘यंग इंडियन’ नाम की एक कंपनी को दे दिया था। आपको जानकारी के लिए बता दें कि एजेएल वही कंपनी है, जो नेशनल हेराल्ड अख़बार को छापती है। इसकी शुरुआत देश के पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने की थी।

सुब्रमण्यम स्वामी ने इसमें ‘धोखाधड़ी’ और ‘आपराधिक षड्यंत्र’, समेत अन्य आरोप लगाए। उनकी याचिका पर कोर्ट ने 2014 में सोनिया गांधी, राहुल गांधी, और अन्य लोगों को पेश होने का आदेश दिया था।  ये कार्यवाही कोर्ट में चल रही थी कि 2021 में ईडी ने इस आधार पर एक शिकायत दर्ज की थी। ईडी की इस शिकायत को ‘एनफ़ोर्समेंट केस इनफ़ॉर्मेशन रिपोर्ट’ कहते हैं। ये पुलिस में दर्ज एफ़आईआर जैसा होता है। इस शिकायत की जाँच करने के बाद ईडी ने इस साल अपनी चार्जशीट दायर की थी।  इसमें उन्होंने राहुल गांधी और सोनिया गांधी, समेत अन्य लोगों पर पैसों के घोटाले का आरोप लगाया और इस चार्जशीट में कुल सात अभियुक्त थे, जिसमें यंग इंडियन कंपनी के साथ-साथ उनके निदेशक सुमन दूबे और सैम पित्रोदा भी शामिल थे।

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