बांग्लादेश में जारी हिंसा और हिंदुओं पर अत्याचार को लेकर पूरे भारत में गुस्सा भरा हुआ है। इसको लेकर देश की राजधानी दिल्ली समेत देश के कई राज्यों में प्रदर्शन हुआ है। इतना ही नहीं अब भारत और बांग्लादेश के सम्बन्धो को लेकर रूस ने भी अपनी राय रखी है और बांग्लादेश को उसी की भाषा में समझाया भी है।
हालांकि माना जा रहा है कि बांग्लादेश में अगले 2 महीनो के अंदर चुनाव होने वाले हैं। जिसको लेकर बांग्लादेश में चुनावी सरगर्मीयां तेज़ हो गई हैं। अब इसी को लेकर बांग्लादेश के पूर्व राष्ट्रपति जियाउर रहमान और पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के सबसे बड़े बेटे हैं तारिक रहमान। वह पिछले 17 साल से बांग्लादेश छोड़कर लंदन में रह रहे थे। लेकिन फरवरी में होने वाले चुनाव से पहले वह अपने वतन लौटे हैं। उनकी पत्नी जुबैदा रहमान और बेटी जायमा रहमान भी उनके साथ बांग्लादेश आई हैं। उनकी पार्टी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के कार्यकर्ताओं में इसको लेकर जश्न का माहौल है। रिपोर्ट्स के मुताबिक लाखों की संख्या में ढाका में उनकी पार्टी के कार्यकर्ता उनके स्वागत के लिए इकट्ठा हुए हैं।

पीएम पद के बड़े दावेदार हैं रहमान
तारिक रहमान की अपने वतन वापसी होने के पीछे आगामी फरवरी में होने वाले आम चुनाव लड़ने के लिए वापस आए हैं, और माना जा रहा है कि वो प्रधानमंत्री पद के प्रमुख दावेदार के रूप में उभर रहे हैं। बीएनपी के प्रवक्ता रुहुल कबीर रिज़वी ने जिया के बड़े बेटे रहमान की वापसी का जिक्र करते हुए कहा, “यह एक निर्णायक राजनीतिक क्षण होगा।” उनके पिता ज़ियाउर रहमान सैन्य शासक से नेता बने थे। जियाउर ने बीएनपी की स्थापना की। वह 1977 से 1981 तक राष्ट्रपति थे, जब उनकी हत्या कर दी गई थी। मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने रहमान की वापसी के मद्देनजर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था का आदेश दिया है, जबकि बीएनपी ने ताकत दिखाने के लिए उनके स्वागत के दौरान लाखों समर्थकों को इकट्ठा करने का लक्ष्य रखा है।

अगस्त में शेख हसीना से छिनी थी सत्ता
रहमान की वापसी ऐसे वक्त हो रही है, जब छात्रों के नेतृत्व में हिंसक प्रदर्शन के कारण पांच अगस्त, 2024 को तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना की अवामी लीग सरकार के गिरने के बाद बदली हुई राजनीतिक में बीएनपी फिर से अग्रणी बनकर उभरी है। सत्ता में 2001-2006 के कार्यकाल के दौरान बीएनपी की साझेदार, जमात-ए-इस्लामी और उसके इस्लामी सहयोगी अब बीएनपी की मुख्य प्रतिद्वंद्वी के रूप में हैं। अंतरिम सरकार ने एक आदेश के माध्यम से देश के सख्त आतंकवाद विरोधी अधिनियम के तहत अवामी लीग को भंग कर दिया था।

क्या दो महीने में दिखा पाएंगे कमाल
बांग्लादेश में संसदीय चुनाव 12 फरवरी 2026 को होने हैं। ऐसे में रहमान के पास दो महीने से भी कम समय बचा है। इस दौरान उन्हें स्थानीय नेताओं के साथ ही पार्टी कार्यकर्ताओं का भरोसा जीतना होगा। इसके साथ ही बांग्लादेश के उन मतदाताओं को लुभाना होगा, जो आवामी लीग जैसे कट्टरपंथाी संगठनों की बजाय थोड़ी लिबरल पार्टी को सत्ता में लाना चाहते हैं।









