Saharanpur Mosque Demolition: उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले में शनिवार तड़के कलेक्ट्रेट परिसर में बनी एक मस्जिद पर प्रशासन का बुलडोजर गरजा है। जिला न्यायालय के अंतिम आदेश के बाद, जिला प्रशासन ने भारी पुलिस बल की मौजूदगी में इस ढांचे को ढहा दिया। इस कार्रवाई को लेकर क्षेत्र में भारी राजनीतिक और सामाजिक हलचल शुरू हो गई है, जहाँ सुरक्षा के लिहाज से कलेक्ट्रेट के चारों ओर कड़ा पहरा बैठा दिया गया है।
Saharanpur Mosque Demolition: शिकायत से शुरू हुआ कानूनी विवाद, सिटी मजिस्ट्रेट ने निर्माण को माना अवैध
कलेक्ट्रेट परिसर में बने इस धार्मिक ढांचे को लेकर विवाद पिछले काफी समय से कानूनी प्रक्रिया के अधीन था। यह मामला पूर्व बजरंग दल प्रांतीय संयोजक विकास त्यागी की शिकायत के बाद शुरू हुआ था। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि एक संवेदनशील सरकारी परिसर के भीतर यह निर्माण अवैध रूप से किया गया है और इसका इस्तेमाल कमरे किराए पर देना आदि के लिए भी किया जा रहा था। प्रशासन ने सुरक्षा और गोपनीयता का हवाला देते हुए इस अतिक्रमण का विरोध किया था।
17 जुलाई 2026 को सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत ने सार्वजनिक परिसर (अवैध कब्जाधारियों की बेदखली) अधिनियम के तहत इस निर्माण को अवैध माना था और इसे हटाने का आदेश दिया। साथ ही सरकारी जमीन के गलत इस्तेमाल के लिए मस्जिद समिति पर करीब 6.41 करोड़ रुपये का जुर्माना भी लगाया गया था। मस्जिद कमेटी ने इस ढांचे को पुराना बताते हुए अदालत में साक्ष्य के रूप में 1 जनवरी 1911 का एक बिजली बिल पेश किया था। हालांकि, सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार सहारनपुर में बिजली की शुरुआत ही 1912 में हुई थी, जिसके कारण इस साक्ष्य की विश्वसनीयता पर सवाल उठे। (Saharanpur Mosque Demolition)
जिला जज का अंतिम फैसला
मुस्लिम पक्ष ने सिटी मजिस्ट्रेट के इस आदेश को जिला न्यायालय में चुनौती दी थी। जिला जज की अदालत ने शुरुआत में इस पर रोक लगाई थी, लेकिन 4 सितंबर 2026 को दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और साक्ष्यों की समीक्षा के बाद अपील को खारिज कर दिया और बेदखली के पुराने आदेश को बरकरार रखा।
शनिवार तड़के की बड़ी कार्रवाई
जिला अदालत से हरी झंडी मिलते ही प्रशासन ने बेहद गोपनीय और त्वरित योजना बनाई। 5 सितंबर की सुबह करीब 4 बजे से ही कलेक्ट्रेट परिसर के सभी प्रवेश द्वारों को बंद कर दिया गया और 6 बुलडोजरों (जेसीबी) की मदद से ध्वस्तीकरण शुरू किया गया। सुबह होते-होते इस ढांचे का एक बड़ा हिस्सा जमींदोज किया जा चुका था। (Saharanpur Mosque Demolition)
कलेक्ट्रेट परिसर और उसके आसपास 10 से अधिक थानों की पुलिस के साथ-साथ प्रांतीय आर्म्ड कांस्टेबुलरी (PAC) और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) के जवानों को तैनात किया गया। किसी भी बाहरी व्यक्ति या आम जनता को कलेक्ट्रेट परिसर की तरफ जाने की अनुमति नहीं दी गई। डीआईजी अभिषेक सिंह के अनुसार, यह पूरी कार्रवाई अदालत के आदेश के क्रम में निर्धारित कानूनी प्रक्रिया को पूरा करने के बाद ही अमल में लाई गई है।
विपक्षी नेताओं की नजरबंदी और राजनीतिक बवाल
इस बुलडोजर कार्रवाई की खबर फैलते ही जिले में राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गईं और विपक्ष ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। स्थिति को बिगड़ने से रोकने के लिए पुलिस ने कई विपक्षी नेताओं को नजरबंद (हाउस अरेस्ट) कर दिया। कैराना से समाजवादी पार्टी की सांसद इकरा हसन को सहारनपुर रवाना होने से पहले ही उनके आवास पर हाउस अरेस्ट कर लिया गया। उन्होंने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए इसे त्वरित राजनीतिक लाभ के लिए की गई कार्रवाई बताया। (Saharanpur Mosque Demolition)
सहारनपुर के सांसद इमरान मसूद ने इस कार्रवाई पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन ने निचली अदालत के फैसले के बाद हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट में अपील करने का उचित समय नहीं दिया। उन्होंने कहा कि वे इस मामले को लेकर देश की शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे।
बहुजन समाज पार्टी (BSP) की प्रमुख मायावती ने सोशल मीडिया पर इस अभियान का विरोध किया। उन्होंने सरकार से इस तरह के अभियानों को रोकने की अपील करते हुए कहा कि धार्मिक स्थलों का भारतीय परंपरा के अनुसार सम्मान होना चाहिए और कानून का राज स्थापित रहना चाहिए, न कि मनमाना बुलडोजर एक्शन। वहीं, फिलहाल सहारनपुर में वर्तमान में स्थिति नियंत्रण में है और प्रशासन लगातार क्षेत्र में शांति और सौहार्द बनाए रखने के लिए फ्लैग मार्च और निगरानी कर रहा है। (Saharanpur Mosque Demolition)









