Swatantra Bharadwaj: एक इंटरव्यू, एक कबूलनामा, और एक ऐसा तूफान जिसने पूरी दिल्ली को हिला दिया। स्वतंत्र भारद्वाज नाम का एक शख्स जो कल तक सिर्फ सोशल मीडिया पर एक इन्फ्लुएंसर था, आज पुलिस कस्टडी में है, और उसकी वजह बना एक पॉडकास्ट, जिसमें उसने खुद अपने मुंह से अपना गुनाह कबूल कर लिया।
Swatantra Bharadwaj: प्रदर्शन में लगी चोट, फिर वायरल हुआ कबूलनामा
मामला शुरू होता है जुलाई महीने से, जब दिल्ली के जंतर मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी का बड़ा प्रदर्शन चल रहा था। इसी प्रदर्शन में शामिल थे CJP कार्यकर्ता निशु आजाद और उनके पिता संजय कुमार। पुलिस के मुताबिक 23 जून को संजय कुमार के सिर पर एक कड़ा यानी ब्रेसलेट लगने से चोट आई, और मेडिकल जांच में इसे साधारण चोट बताया गया। संजय को RML हॉस्पिटल ले जाया गया, और पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने में केस दर्ज हुआ।
लेकिन असली तूफान तब आया जब करीब डेढ़ महीने बाद स्वतंत्र भारद्वाज (Swatantra Bharadwaj) का एक पॉडकास्ट इंटरव्यू वायरल हो गया। इस वीडियो में स्वतंत्र ने खुलेआम दावा किया कि उसने ही संजय कुमार का सिर फोड़ा था, और उन्हें 60 टांके आए थे। उसने ये भी बोला कि इतना गंभीर मामला होने के बावजूद उसे एक रात भी जेल में नहीं बिताना पड़ा। यही वो लाइन थी जिसने पूरे मामले को नई दिशा दे दी।
स्वतंत्र भारद्वाज कौन है?
वह बिहार के दरभंगा या पटना का रहने वाला एक 21-22 साल का लड़का है, जो दिल्ली यूनिवर्सिटी का स्टूडेंट रहा है। इंस्टाग्राम पर उसके करीब 1 लाख 84 हजार फॉलोअर्स हैं, और वो खुद को स्वतंत्र सनातनी योद्धा कहता है। वो खुद को गोरक्षक भी बताता है, और हिंदुत्व से जुड़े मुद्दों पर बहुत मुखर होकर बोलता है। अपनी पहचान के बारे में उसने खुद बताया था कि वो एक मैथिल ब्राह्मण है, और पटना यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के दौरान एक व्यक्ति द्वारा भगवा झंडा जलाए जाने के बाद उसने पहली बार प्रोटेस्ट किया था, और तभी से उसे आंदोलनों में मजा आने लगा।
बड़े नेताओं से करीबी का दावा, चिराग पासवान ने किया किनारा!
अब सबसे विवादित हिस्सा। उसी पॉडकास्ट में स्वतंत्र ने ये भी दावा किया कि भाजपा नेता कपिल मिश्रा, केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान, और खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उसके “बड़े भाई” जैसे हैं, और उन्हीं के रसूख की वजह से पुलिस ने उसे 24 घंटे में छोड़ दिया। बस यही बयान उसके गले की हड्डी बन गया। चिराग पासवान और उनकी पार्टी LJP रामविलास ने तुरंत इन दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया और स्वतंत्र के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई कि उसने झूठा राजनीतिक कनेक्शन बताकर उनके नाम का गलत इस्तेमाल किया। (Swatantra Bharadwaj)
CJP के प्रदर्शन से गिरफ्तारी तक: 72 घंटे का अल्टीमेटम, अगले ही दिन पकड़ा गया स्वतंत्र
इसी बीच CJP पूरी तरह एक्टिव हो गई। पार्टी के सह संयोजक सौरव दास और आशुतोष रांका खुद पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने पहुंचे और स्वतंत्र की गिरफ्तारी की मांग की। CJP का सीधा सवाल था कि जब आरोपी खुद अपना गुनाह कबूल कर रहा है, तो पुलिस उस पर एक्शन क्यों नहीं ले रही। निशु की तरफ से वकील ऋषभ रंजन ने मांग की कि केस में हत्या के प्रयास, आपराधिक धमकी और SC-ST एक्ट की धाराएं जोड़ी जाएं, क्योंकि निशु और उनका परिवार दलित समुदाय से आते हैं। CJP के दबाव में पुलिस ने 4 सितंबर को ये सारी धाराएं जोड़ दीं।
CJP ने पुलिस के सामने 3 घंटे तक प्रदर्शन भी किया, जिसके बाद पुलिस ने 72 घंटे के अंदर गिरफ्तारी का आश्वासन दिया। और वाकई अगले ही दिन, यानी शुक्रवार को, स्वतंत्र भारद्वाज को उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से पकड़ लिया गया। शनिवार को उसे दिल्ली में कोर्ट में पेश किया गया, जहां जज ने उसे एक दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया। लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती। जैसे ही स्वतंत्र की गिरफ्तारी हुई, दिल्ली के संसद मार्ग थाने के बाहर एक बिल्कुल उल्टी तस्वीर देखने को मिली।
स्वतंत्र के समर्थन में उतरे हिंदूवादी संगठन, SC-ST एक्ट पर उठे सवाल
कई हिंदूवादी संगठनों के कार्यकर्ता स्वतंत्र के सपोर्ट में सड़क पर उतर आए, और थाने के बाहर जमकर प्रदर्शन किया। इनका नेतृत्व दक्ष चौधरी नाम के एक शख्स ने किया, जो पहले भी हाई प्रोफाइल लोगों से मारपीट और थप्पड़बाजी के लिए जाना जाता रहा है, और इसने पहले कन्हैया कुमार को भी थप्पड़ मारा था। इन कार्यकर्ताओं की सबसे बड़ी दलील ये थी कि स्वतंत्र ने कभी कोई जातिसूचक शब्द इस्तेमाल नहीं किया, फिर भी उसके खिलाफ SC-ST एक्ट लगाया गया। (Swatantra Bharadwaj)
एक कार्यकर्ता ने तो सीधा सवाल उठाया, क्या स्वतंत्र भारद्वाज की एकमात्र गलती यही है कि वो ब्राह्मण समाज से आता है? उन्होंने ये भी कहा कि आज कोई ब्राह्मण नेता उसके सपोर्ट में आगे नहीं आ रहा, और कोई भी जनरल कैटेगरी के हितों की बात नहीं करता। इसी प्रदर्शन में एक और सवाल उठा, कि जब CJP और सौरव दास ने NEET प्रोटेस्ट से जुड़ी सभी FIR वापस लेने की मांग की थी, तो स्वतंत्र की FIR क्यों नहीं वापस ली जा रही, और जिन लोगों ने PM मोदी के खिलाफ अपशब्द बोले, उन पर UAPA जैसा सख्त कानून क्यों नहीं लगाया गया।
पहले गुनाह का दावा, फिर सेल्फ डिफेंस की दलील
अब जरा दूसरी तरफ की कहानी भी सुन लीजिए, यानी खुद स्वतंत्र भारद्वाज का पक्ष। जब मामला गरमाया, तो उसने अपने बयान से पूरी तरह पलटी मार ली। उसने कहा कि जो कुछ उसने पॉडकास्ट में बोला था वो सिर्फ एक मजाक या सार्काज्म था, असल में तो 10 से 15 लोगों ने उसे घेर लिया था, और अगर वो बचाव में हाथ नहीं उठाता तो शायद भीड़ उसे मार ही देती। यानी अब वो इसे सेल्फ डिफेंस बता रहा है, ना कि हमला।
राहुल गांधी की एंट्री से गरमाया मामला, राजनीतिक संरक्षण के आरोपों पर घिरी सरकार
इस पूरे मामले ने एक और बड़ा पॉलिटिकल टर्न भी लिया। लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने खुद निशु आजाद के सपोर्ट में X पर पोस्ट किया। उन्होंने आरोप लगाया कि निशु और उनके परिवार को दलित होने की वजह से भी टारगेट किया जा रहा है। राहुल गांधी ने लिखा कि निशु अकेली नहीं हैं, उनकी लड़ाई में साथ दिया जाएगा, और उन्होंने गृह मंत्री अमित शाह से भी सीधा जवाब मांगा कि आखिर आरोपी इतने दिनों तक खुलेआम कैसे घूमता रहा। उन्होंने ये भी आरोप लगाया कि आरोपी को राजनीतिक संरक्षण मिला हुआ है। (Swatantra Bharadwaj)
कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने भी अपनी लीगल टीम भेजी, जो CJP के वकीलों के साथ मिलकर अतिरिक्त DCP से मिली और कार्रवाई की मांग की। पुलिस अधिकारियों को साफ बताया गया कि राष्ट्रीय राजधानी में इस तरह की हिंसा किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं है।
दो नैरेटिव, एक विवाद: अब अदालत तय करेगी किसका दावा कितना मजबूत
तो अब कुल मिलाकर स्थिति ये है कि एक तरफ CJP, कांग्रेस के छात्र संगठन NSUI, और खुद राहुल गांधी इस मामले को दलित उत्पीड़न और राजनीतिक संरक्षण से जोड़ रहे हैं। दूसरी तरफ हिंदूवादी संगठन इसे जातिगत भेदभाव और ब्राह्मण समाज के साथ नाइंसाफी बता रहे हैं। और बीच में फंसा है स्वतंत्र भारद्वाज, जो कभी अपने गुनाह पर गर्व से बोल रहा था, तो अब उसी बयान को मजाक बताकर बचाव की कोशिश कर रहा है। फिलहाल वो पुलिस कस्टडी में है, और अगली सुनवाई में ये तय होगा कि आखिर उसके खिलाफ लगी SC-ST एक्ट और हत्या के प्रयास जैसी गंभीर धाराएं टिकती हैं या नहीं। (Swatantra Bharadwaj)









