Bihar Floods: पटना के निचले इलाकों में गंगा और पुनपुन नदी का पानी घुसने से हालात एक बार फिर से गंभीर हो चुके हैं। सड़कों पर गाड़ियां चलने के बजाय नावें चल रही हैं और कई इलाकों में बिजली काट दी गई है ताकि कोई बड़ा हादसा न हो। पानी लोगों के घरों की पहली मंजिल तक पहुंच चुका है। जब ऐसी तबाही आती है, तो सबसे पहले दो ही चीजों का संकट खड़ा होता है—खाने के लिए राशन और जेब में कैश। बाढ़ के इस मुश्किल दौर में एक चेहरा फिर से सड़कों पर उतरा है, और वो नाम है पूर्णिया के सांसद पप्पू यादव।
Bihar Floods: बाढ़ पीड़ित परिवारों को 500-500 रुपये और राशन बांटा
इस मुश्किल घड़ी में पूर्णिया के सांसद पप्पू यादव एक बार फिर बाढ़ पीड़ितों के बीच ग्राउंड पर नजर आए। रात के अंधेरे से लेकर सुबह तक वे घाटों पर खुद मौजूद रहे, लोगों की तकलीफें सुनीं और राहत पहुंचाने का काम किया। बाढ़ की इस तबाही के बीच पप्पू यादव की तरफ से अब तक 20 लाख रुपये से ज्यादा की आर्थिक मदद दी जा चुकी है।
घाटों पर जो परिवार बेघर होकर रह रहे हैं, उनमें से कई लोगों के पास न तो खाने के लिए राशन बचा था और न ही पैसे। ऐसे में हर जरूरतमंद परिवार को 500-500 रुपये कैश दिए गए ताकि वे अपनी रोजमर्रा की छोटी-मोटी जरूरतें तुरंत पूरी कर सकें। इसके साथ ही कई क्विंटल चूड़ा, पांच-पांच किलो चावल और आटे के पैकेट भी लोगों के बीच बांटे गए हैं।
बच्चों और मवेशियों की हालत देख जताई चिंता; बोले- राहत सिर्फ खानापूर्ति
घाटों पर अपनी रात बिता रहे इन परिवारों के बीच जाकर जब सांसद ने हालात का जायजा लिया, तो सरकारी बदहाली खुलकर सामने आई। दियारा से जान बचाकर आए लोग बच्चों और मवेशियों के साथ खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं। सबसे बड़ी दिक्कत पीने के साफ पानी की है, जो पीड़ितों तक नहीं पहुंच पा रहा है। छोटे-छोटे मासूम बच्चों के लिए दूध का कोई इंतजाम नहीं है और मवेशियों के चारे का भी बुरा हाल है।
पप्पू यादव ने खुद ग्राउंड जीरो का अनुभव शेयर करते हुए बताया कि वे जमीनी हकीकत देखने के लिए कुरसेला से भागलपुर तक रातभर नाव में घूमते रहे। वहां जो सरकारी राहत का दावा किया जा रहा है, वह सिर्फ कागजों या खानापूर्ति तक सीमित दिखता है। राहत के नाम पर दिन में 11-12 बजे खाना बांटना शुरू किया जाता है और महज घंटे भर के भीतर ही उसे बंद कर दिया जाता है। इस थोड़ी सी देर में जितने लोगों को खाना मिल पाया ठीक, वरना बाकी लोग भूखे ही रह जाते हैं। (Bihar Floods)
सरकारी राहत व्यवस्था और एंटी-वेनम की कमी पर उठाए सवाल
पानी बढ़ने के साथ-साथ एक और बड़ा खतरा जो सामने आया है, वह है सांप के काटने का। पानी के साथ जहरीले सांप भी घाटों और सूखी जगहों की तरफ आ रहे हैं। सांसद पप्पू यादव ने दावा किया है कि इस गंभीर खतरे से निपटने के लिए घाटों पर एंटी-वेनम दवा तक मौजूद नहीं है। अगर इस बीच किसी को सांप काट ले, तो इलाज के अभाव में स्थिति कितनी खतरनाक हो सकती है, इसका अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।
यह कोई पहला मौका नहीं है जब बाढ़ के बीच पप्पू यादव का यह अंदाज सामने आया हो। इससे पहले 2019 में जब पटना में भीषण बाढ़ आई थी, तब भी वो घुटने तक भरे पानी में उतरकर लोगों को पानी की बोतलें, खाना और पैसे बांटते दिखे थे। इस बार भी उनका वही पुराना अंदाज देखने को मिल रहा है। (Bihar Floods)









