Deputy CM Brajesh Pathak: उत्तर प्रदेश की राजनीति में जातिगत समीकरण हमेशा से सत्ता की चाबी रहे हैं। राज्य में लगभग 11 से 12 प्रतिशत की आबादी रखने वाला ब्राह्मण मतदाता वर्ग पारंपरिक रूप से बेहद प्रभावशाली और निर्णायक माना जाता है। हाल ही में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा को अंडमान और निकोबार द्वीप समूह का उपराज्यपाल (LG) नियुक्त किया गया है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा की गई इस घोषणा के बाद से, यूपी के राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई है कि दिनेश शर्मा के सक्रिय चुनावी राजनीति से हटने के बाद, क्या वर्तमान उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक अब राज्य में ब्राह्मण समाज के सबसे बड़े और निर्विवाद चेहरा बनकर उभरेंगे?
Deputy CM Brajesh Pathak: दिनेश शर्मा की विदाई और भाजपा की रणनीति
यूपी में पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सदस्य दिनेश शर्मा को अंडमान-निकोबार का उपराज्यपाल बनाया गया है। उनको यूपी में ब्राह्मण चेहरे के रूप में देखा जाता है। दिनेश शर्मा लंबे समय से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और भाजपा से जुड़े रहे हैं, उनकी छवि एक सौम्य, अकादमिक और पारंपरिक भाजपाई नेता की रही है। वे लखनऊ के मेयर रहे और योगी आदित्यनाथ सरकार के पहले कार्यकाल (2017-2022) में उपमुख्यमंत्री की भूमिका में थे।
2027 के महासंग्राम से पहले दिनेश शर्मा को एक संवैधानिक पद सौंपकर मुख्यधारा की सक्रिय राजनीति से दूर करने के पीछे भाजपा की गहरी सोशल इंजीनियरिंग मानी जा रही है। नए चेहरों को आगे लाने के लिए पुराने और वरिष्ठ नेताओं को सम्मानजनक विदाई देना भाजपा की कार्यशैली का हिस्सा रहा है। पारंपरिक और शांत राजनीति के बजाय, भाजपा अब ज़मीनी स्तर पर अधिक आक्रामक और सीधे जनता से जुड़ने वाले चेहरों पर दांव लगा रही है। (Deputy CM Brajesh Pathak)
क्या ब्रजेश पाठक होंगे ब्राह्मण वर्ग का सबसे बड़ा चेहरा?
दिनेश शर्मा के जाने के बाद अब सबकी नजरें ब्रजेश पाठक पर टिक गई हैं। ब्रजेश पाठक वर्तमान में उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री हैं और योगी कैबिनेट में उन्हें दिनेश शर्मा की जगह ही मुख्य ब्राह्मण चेहरे के तौर पर शामिल किया गया था। दिनेश शर्मा के विपरीत, ब्रजेश पाठक की छवि एक ‘मास लीडर’ की है। वे कार्यकर्ताओं के बीच बेहद लोकप्रिय हैं और जनता की समस्याओं को लेकर सीधे मैदान में उतरने के लिए जाने जाते हैं।
बहुजन समाज पार्टी (BSP) से भाजपा में आने के बाद भी पाठक ने पार्टी के भीतर अपनी वफादारी और उपयोगिता को साबित किया है। वे लगातार ब्राह्मणों से जुड़े मुद्दों को उठाते रहे हैं। वर्तमान में उपमुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री होने के नाते, वे यूपी सरकार में सबसे शक्तिशाली ब्राह्मण चेहरा हैं।
छात्र राजनीति से सत्ता के शिखर तक का सफर
ब्रजेश पाठक की सबसे बड़ी ताकत उनकी जमीनी पकड़ और संगठनात्मक कौशल है। पाठक ने अपने करियर की शुरुआत लखनऊ विश्वविद्यालय से की, जहाँ वे छात्र संघ अध्यक्ष चुने गए। इसके बाद वे बसपा में शामिल हुए और साल 2004 में उन्नाव से लोकसभा सांसद बने। मायावती के सोशल इंजीनियरिंग (ब्राह्मण-दलित गठबंधन) के दौर में पाठक पार्टी के भीतर एक प्रमुख ब्राह्मण चेहरा बनकर उभरे थे।
साल 2016 में वे भाजपा में शामिल हुए। 2017 में भाजपा सरकार बनने पर उन्हें कानून मंत्री बनाया गया। लेकिन उनकी राजनीतिक किस्मत का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट 2022 का विधानसभा चुनाव रहा, जब पार्टी ने दिनेश शर्मा की जगह ब्रजेश पाठक को उपमुख्यमंत्री बनाकर राज्य में ब्राह्मणों का मुख्य चेहरा घोषित कर दिया। (Deputy CM Brajesh Pathak)
ब्राह्मण समाज में स्वीकार्यता और ‘संकटमोचक’ की भूमिका
यूपी में ब्राह्मण आबादी लगभग 11 से 12 प्रतिशत है, जो किसी भी दल की हार-जीत तय करने में सक्षम है। ब्रजेश पाठक ने इस वोट बैंक को साधे रखने के लिए लगातार काम किया है। 2020 में विकास दुबे एनकाउंटर कांड के बाद जब विपक्ष ने योगी सरकार पर ‘ब्राह्मण विरोधी’ होने का नैरेटिव गढ़ने की कोशिश की, तब ब्रजेश पाठक ही वह नेता थे, जिन्होंने जमीन पर उतरकर ब्राह्मण समाज के गुस्से को शांत किया और उन्हें भाजपा के पाले में बनाए रखा।
सामाजिक और सांस्कृतिक आउटरीच
ब्रजेश पाठक केवल प्रशासनिक पदों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे समाज के सांस्कृतिक और धार्मिक आयोजनों में भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं। हालिया ब्राह्मण सम्मेलनों और सांस्कृतिक मंचों पर पाठक ने चाणक्य, आर्यभट्ट और ऋषि दधिचि जैसे महापुरुषों का जिक्र करते हुए राष्ट्र निर्माण में ब्राह्मणों के योगदान का जिक्र किया है। समय-समय पर प्रयागराज माघ मेला और विभिन्न धार्मिक आयोजनों के माध्यम से वे हिंदू संतों और ब्राह्मण समाज के धार्मिक अगुआओं के बीच अपनी उपस्थिति दर्ज कराते रहे हैं। (Deputy CM Brajesh Pathak)
क्या राह इतनी आसान है? अन्य दावेदार भी रेस में
भले ही ब्रजेश पाठक सबसे आगे दिख रहे हों, लेकिन भाजपा के भीतर और बाहर कई ऐसे नाम हैं, जो यूपी में ब्राह्मणों के नेतृत्व को चुनौती दे रहे हैं। भाजपा ने अपनी रणनीति के तहत किसी एक नेता पर निर्भर रहने के बजाय नेतृत्व की एक पूरी शृंखला तैयार की है। भाजपा ने हाल ही में ब्राह्मण वर्ग के उभरते नेता हरीश द्विवेदी को संगठन में राष्ट्रीय महामंत्री की बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है। यह संकेत देता है कि केंद्रीय नेतृत्व युवाओं को भी आगे बढ़ा रहा है।
कांग्रेस से भाजपा में आए जितिन प्रसाद केंद्रीय कैबिनेट में मंत्री हैं और उनकी छवि एक बड़े और सुशिक्षित ब्राह्मण नेता की है। ‘ब्राह्मण चेतना परिषद’ के माध्यम से वे पहले भी इस वर्ग को लामबंद करते रहे हैं।पश्चिमी यूपी से आने वाले वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सदस्य लक्ष्मीकांत बाजपेयी भी पार्टी के भीतर अपनी मजबूत पकड़ रखते हैं। (Deputy CM Brajesh Pathak)
ब्रजेश पाठक के सामने बड़ी चुनौतियाँ
समाजवादी पार्टी (SP) अपने ‘PDA’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले में ‘P’ का मतलब ‘पंडित’ बताकर ब्राह्मणों को रिझाने की कोशिश कर रही है। पारंपरिक भाजपा कैडर और बाहर से आए नेताओं जैसे ब्रजेश पाठक और जितिन प्रसाद के बीच संतुलन बनाए रखना एक बड़ी चुनौती है। ब्राह्मण समुदाय के युवा अब नौकरियों, प्रतियोगी परीक्षाओं (जैसे UGC नेट विवाद) और विकास के मुद्दों पर अधिक मुखर हैं।
2027 चुनाव पर इस बदलाव का असर
उत्तर प्रदेश में लगभग 12% ब्राह्मण मतदाता हैं, जो अपनी संख्या और सामाजिक प्रभाव के कारण राज्य की कम से कम 100 विधानसभा सीटों के नतीजों को सीधे प्रभावित करने की क्षमता रखते हैं। दिनेश शर्मा को अंडमान का एलजी बनाकर भाजपा ने एक तरफ वरिष्ठ नेतृत्व को सम्मान दिया है, तो दूसरी तरफ यूपी की पिच पूरी तरह से ब्रजेश पाठक और नए सांगठनिक चेहरों के लिए खाली कर दी है। अब पूरी जिम्मेदारी ब्रजेश पाठक के कंधों पर होगी कि वे न केवल सरकारी स्तर पर बल्कि सामाजिक स्तर पर भी खुद को ब्राह्मणों का सबसे भरोसेमंद रक्षक साबित कर सकें। (Deputy CM Brajesh Pathak)
सरकारी पद और रसूख के मामले में फिलहाल ब्रजेश पाठक यूपी में ब्राह्मण वर्ग का सबसे बड़ा चेहरा बन चुके हैं। हालांकि, विपक्ष के चौतरफा हमलों और भाजपा के भीतर बढ़ती आंतरिक प्रतिस्पर्धा को देखते हुए, उन्हें इस पायदान पर बने रहने के लिए 2027 के चुनावों में ब्राह्मण वोटों को पूरी तरह से भाजपा के पाले में लाकर दिखाना होगा।









