UP Teacher Protest: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में शनिवार को एक बार फिर शिक्षक भर्ती का मुद्दा गरमा गया। साल 2018 की 68,500 सहायक शिक्षक भर्ती के सैकड़ों अभ्यर्थियों ने उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के आवास (7 कालिदास मार्ग) का घेराव किया। हाथों में तख्तियां और जुबान पर नारे लिए ये अभ्यर्थी अपनी नियुक्ति और आरक्षण के नियमों के पालन की मांग कर रहे थे।
UP Teacher Protest: विरोध प्रदर्शन और पुलिस की कार्रवाई
शनिवार सुबह ही प्रदेश के कोने-कोने से आए अभ्यर्थियों ने उपमुख्यमंत्री के आवास की ओर कूच किया। प्रदर्शनकारियों का उद्देश्य केशव प्रसाद मौर्य से मिलकर उन्हें अपनी व्यथा सुनाना था, लेकिन पुलिस ने बैरिकेडिंग लगाकर उन्हें रोक दिया। इस दौरान पुलिस और अभ्यर्थियों के बीच तीखी नोकझोंक और धक्का-मुक्की हुई।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए बल प्रयोग किया और प्रदर्शनकारियों को जबरन बसों में भरकर इको गार्डन (धरना स्थल) भेज दिया। कई अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया कि पुलिस की खींचतान में उनके कपड़े फट गए और उनके साथ बदसलूकी की गई। (UP Teacher Protest)
अभ्यर्थियों की प्रमुख मांगें: 5% की छूट और आयोग का आदेश
यह पूरा विवाद 2018 की शिक्षक भर्ती परीक्षा के पासिंग मार्क्स और आरक्षण के नियमों से जुड़ा है। अभ्यर्थियों का कहना है कि 68,500 भर्ती प्रक्रिया में आरक्षित वर्ग (OBC, SC) और दिव्यांग अभ्यर्थियों को पासिंग मार्क्स में 5% की छूट दी जानी चाहिए थी, जैसा कि अन्य भर्तियों में होता है। उनकी मांग है कि कट-ऑफ को संशोधित कर नियुक्ति दी जाए।
अभ्यर्थियों का दावा है कि राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग ने इस मामले में आरक्षण विसंगति को स्वीकार किया था और अभ्यर्थियों के पक्ष में फैसला देते हुए नियुक्ति का आदेश दिया था। इसके बावजूद, बेसिक शिक्षा विभाग और सरकार ने इस आदेश को अब तक लागू नहीं किया है। अभ्यर्थियों के अनुसार, भर्ती के कई पद अभी भी रिक्त हैं, जबकि योग्य उम्मीदवार पिछले 8 सालों से सड़कों पर हैं। (UP Teacher Protest)
“8 साल से चप्पल घिस रहे हैं…”
प्रदर्शन में शामिल सीतापुर से आए एक अभ्यर्थी, आशुतोष वर्मा, ने अपना दर्द बयां करते हुए कहा, “हम पिछले 8 साल से नौकरी के लिए भटक रहे हैं। 2018 में फॉर्म भरा था, तब से अब तक सिर्फ आश्वासन मिला है। हम सरकार से कोई भीख नहीं मांग रहे, बस अपना संवैधानिक अधिकार मांग रहे हैं”।
वहीं, एक अन्य अभ्यर्थी ने कहा, “जब आयोग ने मान लिया है कि घोटाला हुआ है, और मंत्री भी अनौपचारिक रूप से इसे स्वीकारते हैं, तो फिर हमें नियुक्ति पत्र क्यों नहीं दिया जा रहा? हम तब तक नहीं हटेंगे जब तक हमें न्याय नहीं मिलता”। (UP Teacher Protest)
राजनीतिक और प्रशासनिक पेच
68,500 और 69,000 शिक्षक भर्तियों का मुद्दा उत्तर प्रदेश सरकार के लिए गले की फांस बना हुआ है। जहां एक तरफ सरकार निष्पक्ष भर्ती का दावा करती है, वहीं दूसरी तरफ ओबीसी और दलित अभ्यर्थी लगातार आरक्षण घोटाले का आरोप लगा रहे हैं।
केशव प्रसाद मौर्य, जो स्वयं पिछड़े वर्ग का प्रतिनिधित्व करने वाले एक बड़े चेहरा माने जाते हैं, उनके आवास पर यह प्रदर्शन सरकार पर इस वर्ग की नाराजगी का सीधा संकेत है।फिलहाल, पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को इको गार्डन में शिफ्ट कर दिया है, लेकिन अभ्यर्थियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो यह आंदोलन और उग्र रूप लेगा। (UP Teacher Protest)









