Varanasi: वाराणसी में प्रतिदिन कचरे की मात्रा बढ़कर 1,100 टन हो गई है, जिसके बाद नगर निगम ने ‘स्वच्छ काशी, सुंदर काशी’ के अभियान को तेज करने के लिए कमर कस ली है। शहर में बढ़ते कचरे के इस दबाव को देखते हुए वाराणसी के नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने रविवार, 13 सितंबर 2026 को करसड़ा स्थित ठोस अपशिष्ट प्रसंस्करण संयंत्र (Solid Waste Processing Plant) का औचक निरीक्षण किया और प्लांट की प्रसंस्करण क्षमता को तुरंत बढ़ाने के कड़े निर्देश जारी किए हैं।
Varanasi: क्या काशी संभाल पाएगी 1,100 टन कचरे का बोझ?
धार्मिक, सांस्कृतिक और पर्यटन के वैश्विक केंद्र वाराणसी में पिछले कुछ सालों में बुनियादी ढांचे और विकास के मोर्चे पर अभूतपूर्व बदलाव आए हैं। देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों और स्थानीय आबादी में वृद्धि के कारण आज काशी आर्थिक रूप से चमक रही है, लेकिन इस चमक के पीछे एक बड़ी चुनौती भी खड़ी हो गई है- ठोस अपशिष्ट प्रबंधन (Solid Waste Management)।
हाल ही में आए आंकड़े बताते हैं कि वाराणसी में रोजाना निकलने वाला कचरा अब 1,100 टन के आंकड़े को पार कर चुका है। यह स्थिति शहर की स्वच्छता व्यवस्था के लिए एक अलार्म की तरह है, जिसके बाद प्रशासन पूरी तरह से मुस्तैद हो गया है। (Varanasi)
कचरे के आंकड़ों में चौंकाने वाला उछाल
नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल के अनुसार, कुछ समय पहले तक वाराणसी में रोजाना लगभग 600 से 700 टन कचरा एकत्र होता था। लेकिन पिछले तीन सालों में बुनियादी बदलावों, बढ़ती जनसंख्या और पर्यटकों की भारी आमद के कारण यह मात्रा बढ़कर 1,100 से 1,200 टन प्रतिदिन तक पहुंच गई है। कचरे की मात्रा में इस भारी बढ़ोतरी का सीधा मतलब है कि शहर के मौजूदा डंपिंग और प्रोसेसिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर पर दबाव दोगुना हो गया है।
नगर आयुक्त का करसड़ा प्लांट का दौरा और सख्त निर्देश
कचरे के इस बढ़ते पहाड़ से निपटने के लिए वाराणसी नगर निगम (VMC) एक्शन मोड में आ गया है। रविवार को नगर आयुक्त ने करसड़ा कचरा निस्तारण प्लांट का स्थलीय निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने प्लांट का संचालन करने वाली संस्था के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की कड़े आदेश जारी किए। वर्तमान में करसड़ा प्लांट की स्वीकृत प्रसंस्करण क्षमता करीब 600 मीट्रिक टन प्रतिदिन है, जबकि शहर से इससे कहीं अधिक कचरा निकल रहा है। इसलिए, नगर आयुक्त ने इसकी क्षमता को तुरंत अपग्रेड करने का प्रस्ताव तैयार करने को कहा है। (Varanasi)
प्लांट परिसर और डंपिंग साइट की वास्तविक स्थिति, कचरे के फैलाव और प्रसंस्करण की गति की निगरानी के लिए हर महीने ड्रोन से वीडियोग्राफी और सर्वे कराने का आदेश दिया गया है। प्लांट में कचरे से तैयार होने वाली जैविक खाद को सुरक्षित रखने के लिए पक्का फ्लोर और शेड बनाने के निर्देश दिए गए हैं ताकि बारिश या मौसम की मार से खाद खराब न हो। इसके अलावा, खाद की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए इसकी नियमित लैब जांच अनिवार्य कर दी गई है।
कचरे से खाद और ईंधन तक, वाराणसी ने बढ़ाई वेस्ट प्रोसेसिंग की रफ्तार
चुनौतियों के बावजूद, वाराणसी ने कचरे को संसाधन में बदलने की दिशा में सराहनीय कार्य किया है। वित्तीय वर्ष 2025-26 और हालिया महीनों के आंकड़े इसकी गवाही देते हैं। जनवरी की तुलना में जुलाई में कचरे के प्रोसेसिंग में काफी बढ़ोतरी हुई है। आंकड़ों के अनुसार, जनवरी में जहां 23,569 टन कचरे का किया गया, वहीं जुलाई में यह आंकड़ा बढ़कर 31,940 टन हो गया। प्रतिशत के हिसाब से देखें, तो यह कचरा प्रोसेसिंग में लगभग 35.52% की शानदार वृद्धि को दर्शाता है। (Varanasi)
करसड़ा प्लांट से लगभग 50 हजार टन जैविक खाद तैयार कर विभिन्न उर्वरक कंपनियों को भेजी जा चुकी है। इसके अलावा, कचरे से करीब 52 हजार टन आरडीएफ तैयार किया गया, जिसका इस्तेमाल सीमेंट उद्योगों और वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांटों में ईंधन के रूप में किया जा रहा है। करसड़ा के अलावा, रमना स्थित वेस्ट-टू-चारकोल प्लांट में भी प्रतिदिन 600 टन कचरे से लगभग 200 टन कोयला तैयार किया जा रहा है।
मशीनों से नहीं, जनभागीदारी से होगा कचरा प्रबंधन का असली समाधान
1,100 टन कचरे को सिर्फ मशीनों और प्लांट के सहारे नहीं संभाला जा सकता। इसके लिए लोगों का सहयोग और भागीदारी भी बहुत जरूरी है। नगर निगम लगातार लोगों से अपील कर रहा है कि वे अपने घरों में ही गीले और सूखे कचरे को अलग-अलग करें। जब तक लोग कचरा अलग करके नहीं देंगे, तब तक शत-प्रतिशत रीसाइक्लिंग और प्रोसेसिंग मुमकिन नहीं है। वहीं, बढ़ते पर्यटन के साथ सिंगल-यूज़ प्लास्टिक और पैकेजिंग कचरे में भारी वृद्धि हुई है, जिसे नियंत्रित करने के लिए सख्त नियमों और जन-जागरूकता अभियानों की आवश्यकता है। (Varanasi)
वाराणसी जैसी घनी आबादी और ऐतिहासिक बनावट वाले शहर में कचरा प्रबंधन एक बड़ी चुनौती है। नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल द्वारा करसड़ा प्लांट की क्षमता बढ़ाने और ड्रोन जैसी आधुनिक तकनीक से निगरानी रखने का फैसला समय की मांग है।









