Ayodhya Ram Mandir Staff Dress Code: अयोध्या के भव्य श्रीराम मंदिर में पुजारियों के बाद अब मंदिर परिसर में अलग-अलग जिम्मेदारियां संभालने वाले कर्मचारियों के लिए भी ड्रेस कोड लागू करने की तैयारी है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट मंदिर की व्यवस्थाओं को अधिक व्यवस्थित, अनुशासित और गरिमामय बनाने के लिए नई कर्मचारी नीति तैयार कर रहा है।
इसमें कर्मचारियों के पहनावे के साथ उनके आचरण, कार्यशैली और अनुशासन को लेकर भी विस्तृत नियम तय किए जाएंगे। ट्रस्ट की 2 दिसंबर को प्रस्तावित बैठक में इस नीति को अंतिम मंजूरी मिलने की उम्मीद है। मंजूरी के बाद इसे मंदिर परिसर में तैनात विभिन्न श्रेणियों के कर्मचारियों और सेवादारों पर लागू किया जा सकता है।
पुजारियों के बाद अब कर्मचारियों की बारी
श्रीराम मंदिर में देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। रोजाना आने वाली भारी भीड़ के बीच श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा और अन्य व्यवस्थाओं को सुचारु बनाए रखना मंदिर प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती है। इसी को ध्यान में रखते हुए ट्रस्ट कर्मचारियों के लिए एक समान और स्पष्ट व्यवस्था तैयार कर रहा है।
अगस्त 2026 में ट्रस्ट ने रामलला के मुख्य अर्चकों और सहायक पुजारियों के लिए रामानंदी परंपरा के अनुरूप पीले रंग के रेशमी वस्त्र, बूटियां और पारंपरिक रामानंदी तिलक अनिवार्य किया था। इसके साथ ही ग्रूमिंग से जुड़े नियम भी लागू किए गए थे। अब इसी तरह प्रशासन, सुरक्षा, सफाई, स्वागत और अन्य सेवाओं से जुड़े कर्मचारियों के लिए भी विशेष ड्रेस कोड तैयार किया जा रहा है। (Ayodhya Ram Mandir Staff Dress Code)
विभाग के अनुसार अलग हो सकता है ड्रेस कोड
नई व्यवस्था के तहत मंदिर में काम करने वाले अलग-अलग विभागों के कर्मचारियों के लिए अलग रंग या डिजाइन की वेशभूषा निर्धारित की जा सकती है। इससे श्रद्धालुओं को भीड़ के बीच संबंधित कर्मचारी की पहचान करने में आसानी होगी। मंदिर परिसर में काम करने वाली सेवा प्रदाता एजेंसियों के कर्मचारी भी इस व्यवस्था के दायरे में होंगे। सफाईकर्मी, सुरक्षाकर्मी, स्वागत कक्ष के कर्मचारी और अन्य आउटसोर्स कर्मचारियों को भी निर्धारित ड्रेस कोड और आचार संहिता का पालन करना पड़ सकता है।
सिर्फ पहनावे तक सीमित नहीं होगी नई कर्मचारी नीति
ट्रस्ट के महासचिव स्वामी गोविंद देव गिरि के अनुसार, नई कर्मचारी नीति का मसौदा तैयार किया जा रहा है। इसमें केवल वेशभूषा तय करने के बजाय कर्मचारियों के कार्य, जिम्मेदारियों, अनुशासन और मंदिर परिसर में उनके आचरण से जुड़े दिशा-निर्देश भी शामिल किए जाएंगे। नई व्यवस्था को प्रभावी तरीके से लागू करने के लिए नवनियुक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) जितेन्द्र मिश्रा को विशेष प्रशासनिक जिम्मेदारियां दिए जाने की तैयारी है। धार्मिक समिति जहां पूजा-पाठ और अनुष्ठानों से जुड़े मामलों को देखेगी, वहीं प्रशासनिक संचालन और कर्मचारी प्रबंधन की जिम्मेदारी CEO के स्तर पर रहेगी। (Ayodhya Ram Mandir Staff Dress Code)
सुरक्षा और पारदर्शिता पर भी रहेगा जोर
कर्मचारियों के लिए ड्रेस कोड लागू करने का मकसद केवल एकरूपता और मंदिर की गरिमा बनाए रखना नहीं है। इसके पीछे सुरक्षा और वित्तीय पारदर्शिता भी अहम पहलू हैं। जुलाई 2026 में मंदिर के दानपात्रों और काउंटिंग रूम में वित्तीय गड़बड़ी की शिकायतों के बाद नकदी की गिनती करने वाले कर्मचारियों के लिए डार्क ब्लू रंग का कुर्ता-पायजामा निर्धारित किया गया था। इन कपड़ों में जेब नहीं रखी गई थी। अब पूरे मंदिर परिसर के लिए तैयार की जा रही कर्मचारी नीति में भी सुरक्षा संबंधी मानकों को प्राथमिकता दिए जाने की संभावना है।
श्रद्धालुओं को आसानी से मिलेगी मदद
मंदिर परिसर में लाखों की भीड़ के बीच एक समान और विभागवार ड्रेस कोड से श्रद्धालुओं को जरूरत पड़ने पर संबंधित कर्मचारी की पहचान करने में आसानी होगी। साथ ही कर्मचारियों और अधिकृत सेवा प्रदाताओं की पहचान स्पष्ट होने से अनधिकृत लोगों के कर्मचारियों के बीच घुलने-मिलने की आशंका को भी कम किया जा सकेगा। एक समान वेशभूषा से कर्मचारियों के बीच टीम भावना को बढ़ावा देने और मंदिर परिसर में सेवा व्यवस्था को अधिक अनुशासित बनाने में भी मदद मिल सकती है। (Ayodhya Ram Mandir Staff Dress Code)
तकनीक और बदलती जरूरतों के साथ आधुनिक हो रहा प्रबंधन
अयोध्या का श्रीराम मंदिर धार्मिक आस्था के साथ-साथ भारत की सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण केंद्र बन चुका है। यहां लगातार बढ़ रही श्रद्धालुओं की संख्या को देखते हुए मंदिर प्रबंधन में सुरक्षा, अनुशासन, पारदर्शिता और बेहतर सेवा व्यवस्था पर लगातार जोर दिया जा रहा है। नई कर्मचारी नीति और प्रस्तावित ड्रेस कोड इसी दिशा में एक और कदम माना जा रहा है। 2 दिसंबर की बैठक में यदि नीति को मंजूरी मिलती है, तो इसके लागू होने के बाद मंदिर परिसर में कर्मचारियों की पहचान, अनुशासन और सेवा व्यवस्था को और अधिक व्यवस्थित रूप दिया जा सकेगा।









