Abhijeet Dipke on SIR Controversy: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की लगातार चुनावी जीत पर सवाल उठाते हुए कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के कार्यकर्ता अभिजीत दिपके ने आरोप लगाया है कि पार्टी उन राज्यों में भी जीत दर्ज कर रही है, जहां कथित तौर पर ‘मोदी लहर’ के चरम के दौरान भी उसे सफलता नहीं मिली थी। उन्होंने इन चुनावी नतीजों को मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व में कथित संस्थागत हस्तक्षेप से जोड़ते हुए इसकी जांच की मांग की।
दिपके ने रविवार को मीडिया से बात करते हुए कहा, “भाजपा उन राज्यों में जीत हासिल कर रही है, जहां मोदी लहर के चरम पर भी उसे जीत नहीं मिली थी। यह सब ज्ञानेश कुमार की वजह से हो रहा है। ज्ञानेश कुमार के पद से हटने और SIR के स्थिर होने के बाद ही पता चलेगा कि भाजपा वास्तव में कितनी सीटें जीतती है।”
Abhijeet Dipke on SIR Controversy: ‘नतीजे पहले से तय हैं’- अभिजीत दिपके ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल
उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त से इस्तीफे की मांग करते हुए आरोप लगाया कि देश में चुनावी नतीजे पहले से तय किए जा रहे हैं। दिपके ने कहा, “मुझे लगता है कि जब तक ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देते और स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित नहीं करते, तब तक ऐसे चुनावों में भाग लेने का कोई मतलब नहीं है, क्योंकि विजेता पहले से ही तय है।”
MPSC छात्रों के समर्थन में पुणे पहुंचे दिपके, पेपर लीक मामलों को लेकर सरकार पर उठाए सवाल
दिपके ने ये बयान पुणे दौरे के दौरान दिए, जहां वह महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (MPSC) की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और भर्ती प्रक्रिया में लंबित पदों को लेकर प्रदर्शन कर रहे छात्रों के प्रति समर्थन जताने पहुंचे थे। उन्होंने एमपीएससी अध्यक्ष के इस्तीफे की मांग करते हुए कहा कि लगातार पेपर लीक की घटनाओं से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों का भविष्य प्रभावित हो रहा है। उन्होंने सरकार पर इन मामलों को गंभीरता से नहीं लेने का आरोप लगाया और कहा कि जब तक छात्रों की मांगें पूरी नहीं होतीं, विरोध जारी रहेगा। (Abhijeet Dipke on SIR Controversy)
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में चुनाव आयुक्तों की 14 औपचारिक आपत्तियों का दावा
दिपके की टिप्पणियां ऐसे समय में आई हैं, जब द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने मतदाता सूची, मतदाता पंजीकरण और निर्वाचन आयोग के टेक्नोलॉजी सिस्टम से जुड़े फैसलों पर 10 महीनों के दौरान कम से कम 14 बार औपचारिक आपत्तियां दर्ज की थीं।
हालांकि, निर्वाचन आयोग ने इस दावे को खारिज किया है कि इन आपत्तियों का अर्थ अंतिम फैसलों को लेकर संस्थागत असहमति था। आयोग के अनुसार, मसौदा तैयार करने के चरण में उठाए गए ऑपरेशनल सवाल, इनपुट और सुझाव उसकी स्टैंडर्ड एडमिनिस्ट्रेटिव और फ़ैसला लेने की प्रक्रिया का हिस्सा थे। ECI ने कहा कि SIR प्रक्रिया के शेड्यूल से जुड़े फ़ैसले सर्वसम्मति से लिए गए थे। (Abhijeet Dipke on SIR Controversy)









