UP Politics: उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर बड़ा उलटफेर होने जा रहा है। समाजवादी पार्टी के तीन बागी विधायक राकेश प्रताप सिंह, अभय सिंह और विनोद चतुर्वेदी 14 अक्टूबर 2026 को आधिकारिक तौर पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल होने जा रहे हैं। अमेठी के गौरीगंज में आयोजित होने वाले एक भव्य कार्यक्रम में इन नेताओं को भाजपा की सदस्यता दिलाई जाएगी।
इस बड़े राजनीतिक घटनाक्रम में पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी और राज्य सरकार के कई मंत्रियों व दिग्गज नेताओं की मौजूदगी रहने की उम्मीद है। 2027 में होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों से ठीक पहले इस दलबदल को अखिलेश यादव के लिए एक बड़ा झटका और भाजपा के लिए क्षेत्रीय समीकरणों को साधने की एक बड़ी रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। आइए समझते हैं कि इन तीनों विधायकों का राजनीतिक रसूख क्या है और इनके भाजपा में आने से उत्तर प्रदेश का पूरा सियासी समीकरण कैसे बदलने वाला है।
UP Politics: कौन हैं ये तीन बागी विधायक और क्या है इनका प्रभाव?
राकेश प्रताप सिंह
राकेश प्रताप सिंह अमेठी की गौरीगंज सदर सीट से लगातार तीन बार (2012, 2017, और 2022) के विधायक हैं। 2022 के विधानसभा चुनाव में ‘योगी लहर’ के बावजूद उन्होंने भाजपा के चंद्र प्रकाश मिश्रा को 6,963 वोटों के अंतर से हराया था। भाजपा में शामिल होने की घोषणा करते हुए राकेश प्रताप सिंह ने सपा नेतृत्व पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, “जो राम और राष्ट्र का नहीं, उसके साथ राजनीति संभव नहीं है। हमने सनातन विरोधी और धार्मिक ग्रंथों का अपमान करने वालों के खिलाफ आवाज उठाई थी, जिसे दबा दिया गया।” (UP Politics)
कांग्रेस और सपा के गढ़ माने जाने वाले अमेठी में राकेश प्रताप सिंह का व्यक्तिगत आधार बेहद मजबूत है। उनके भाजपा में आने से इस क्षेत्र में भगवा दल को भारी मजबूती मिलेगी।
अभय सिंह
अभय सिंह अयोध्या जिले की चर्चित गोसाईंगंज विधानसभा सीट से सपा के विधायक हैं। 2022 के चुनाव में उन्होंने इस सीट पर कड़े मुकाबले में भाजपा समर्थित खब्बू तिवारी की पत्नी आरती तिवारी को 13,079 वोटों के अंतर से मात दी थी। अयोध्या और आसपास के जिलों में ठाकुर (क्षत्रिय) मतदाताओं के बीच अभय सिंह की मजबूत पैठ मानी जाती है। अयोध्या में हालिया लोकसभा चुनावों में भाजपा को मिली शिकस्त के बाद, अभय सिंह का साथ आना अयोध्या और अवध क्षेत्र के राजपूत वोट बैंक को फिर से भाजपा के पाले में लाने की कोशिश माना जा रहा है।
विनोद चतुर्वेदी
विनोद चतुर्वेदी बुंदेलखंड के जालौन जिले की कालपी विधानसभा सीट से विधायक हैं। वह पूर्व में कांग्रेस में भी रह चुके हैं और क्षेत्र के बड़े ब्राह्मण चेहरों में गिने जाते हैं। 2022 के चुनाव में उन्होंने भाजपा-निषाद पार्टी गठबंधन के प्रत्याशी छोटे सिंह को करीबी मुकाबले में 2,816 वोटों से हराया था। बुंदेलखंड में ब्राह्मण और सवर्ण समाज के बीच विनोद चतुर्वेदी का अच्छा प्रभाव है। उनके भाजपा में आने से जालौन और बुंदेलखंड क्षेत्र में भाजपा का सामाजिक समीकरण और अधिक मजबूत होगा। (UP Politics)
बगावत की पटकथा: राज्यसभा चुनाव से शाह-योगी से मुलाकात तक
इस पूरे घटनाक्रम की पटकथा फरवरी 2024 में हुए राज्यसभा चुनाव के दौरान ही लिख दी गई थी। उस समय सपा के इन तीनों विधायकों राकेश प्रताप सिंह, अभय सिंह, विनोद चतुर्वेदी ने पार्टी लाइन से अलग हटकर अपनी ‘अंतरात्मा की आवाज’ पर भाजपा उम्मीदवार संजय सेठ के पक्ष में क्रॉस वोटिंग की थी। क्रॉस वोटिंग के ठीक बाद केंद्र सरकार ने इन तीनों विधायकों को सुरक्षा कवर मुहैया कराया था।
इसके बाद समाजवादी पार्टी ने इन तीनों विधायकों को पार्टी से निष्कासित कर दिया। अप्रैल 2025 में इन नेताओं ने दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की थी। अक्टूबर 2026 की शुरुआत में ही इन विधायकों ने लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात कर विकास कार्यों पर चर्चा की, जिसके बाद इनके औपचारिक रूप से भाजपा में शामिल होने की तारीख 14 अक्टूबर तय हो गई। (UP Politics)
क्या है उत्तर प्रदेश का पूरा सियासी समीकरण?
क्षत्रिय-ब्राह्मण सामाजिक समीकरण को साधना
उत्तर प्रदेश की राजनीति में सवर्ण जातियों (ब्राह्मण और ठाकुर) का संतुलन बनाए रखना भाजपा के लिए हमेशा से अहम रहा है। अभय सिंह और राकेश प्रताप सिंह के जरिए भाजपा अवध क्षेत्र में क्षत्रिय समाज को बड़ा संदेश दे रही है, वहीं विनोद चतुर्वेदी के माध्यम से बुंदेलखंड के ब्राह्मणों के बीच अपनी पकड़ को और पुख्ता कर रही है।
अमेठी और अयोध्या में सपा की घेराबंदी
लोकसभा चुनाव के बाद समाजवादी पार्टी और कांग्रेस का हौसला बुलंद था। अमेठी और अयोध्या जैसी हाई-प्रोफाइल सीटों पर सपा के मौजूदा विधायकों को अपने पाले में लाकर भाजपा ने यह संदेश दिया है कि जमीनी स्तर पर उसकी पकड़ आज भी मजबूत है। राकेश सिंह के भाजपा में आने से अमेठी की गौरीगंज सीट पर भाजपा 21 साल बाद फिर से अपना प्रतिनिधित्व दर्ज कराने में सफल होगी। (UP Politics)
अखिलेश यादव के ‘PDA’ फॉर्मूले को चुनौती
अखिलेश यादव लगातार PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) के नारे के साथ आगे बढ़ रहे हैं। भाजपा इस फॉर्मूले के जवाब में विपक्षी दलों के मजबूत सवर्ण चेहरों और क्षेत्रीय क्षत्रपों को तोड़कर अपने पाले में ला रही है, जिससे सपा का आंतरिक संगठनात्मक ढांचा कमजोर हो सके।
14 अक्टूबर को होने जा रही यह जॉइनिंग उत्तर प्रदेश की सियासत में आगामी 2027 के महासंग्राम की तैयारियों का शंखनाद है। जहां एक ओर अखिलेश यादव अपने बागी विधायकों के जाने से खाली हुए प्रभाव को भरने की कोशिश करेंगे, वहीं भाजपा इन तीनों नेताओं के क्षेत्रीय रसूख का इस्तेमाल कर अवध और बुंदेलखंड में अपनी सीटों का दायरा बढ़ाने का प्रयास करेगी। राजनीति के लिहाज से यह घटनाक्रम आने वाले दिनों में यूपी के भीतर कई नए सियासी गठजोड़ों और बयानों को जन्म देने वाला है। (UP Politics)









