INDIA bloc Leaders met President Murmu: इंडिया गठबंधन के घटक दलों के दस प्रमुख नेताओं ने शुक्रवार रात 8 बजे राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात की। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और तृणमूल कांग्रेस (TMC) की प्रमुख ममता बनर्जी के नेतृत्व में गए इस 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने देश की चुनावी प्रक्रिया, मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों और भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) की कार्यप्रणाली को लेकर एक चार सूत्रीय ज्ञापन सौंपा। विपक्ष ने इस दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की भी पुरजोर मांग की है।
INDIA bloc Leaders met President Murmu: राष्ट्रपति को सौंपा गया ‘चार सूत्रीय ज्ञापन’
राष्ट्रपति भवन में हुई इस महत्वपूर्ण बैठक में विपक्षी दलों ने दो पन्नों का ज्ञापन पेश किया, जिसमें चार प्रमुख मांगें रखी गईं।
- मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा: विपक्ष ने मांग की है कि वर्तमान मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को तुरंत उनके पद से बर्खास्त किया जाए। साथ ही 2023 के उस कानून को निरस्त करने की मांग की गई जो चुनाव आयुक्तों को जीवन भर के लिए आपराधिक मामलों से कानूनी सुरक्षा प्रदान करता है।
- विशेष गहन संशोधन (SIR) पर रोक और मतदाता बहाली: निर्वाचन आयोग द्वारा चलाए गए स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) कार्यक्रम को तत्काल निलंबित करने की मांग की गई है। विपक्ष का आरोप है कि इस प्रक्रिया के तहत 13.30 करोड़ मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से अवैध रूप से हटा दिए गए हैं, जिन्हें तुरंत वापस जोड़ा जाए।
- बैलेट पेपर से चुनाव की वापसी: ईवीएम की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठाते हुए मांग की गई है कि भविष्य के सभी चुनावों में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों का इस्तेमाल पूरी तरह बंद कर पुराने बैलेट पेपर सिस्टम को वापस लागू किया जाए।
- पिछले दो वर्षों के चुनावों की समीक्षा: पिछले दो वर्षों के भीतर जिन राज्यों जैसे हरियाणा, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, बिहार, दिल्ली और पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव हुए हैं और जहां विपक्ष के अनुसार वोट चोरी के पुख्ता सबूत मिले हैं, उन चुनावों के नतीजों की गहन समीक्षा कर उचित कार्रवाई की जाए। (INDIA bloc Leaders met President Murmu)
“वोट चोरी”: विपक्ष के तीखे आरोप
मुलाकात के बाद मीडिया से मुखातिब होते हुए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकाजुर्न खड़गे, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और तृणमूल कांग्रेस (TMC) प्रमुख ममता बनर्जी समेत कई नेताओं ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर तीखे हमले किए।
राहुल गांधी ने कहा कि यह बैठक उनके लिए बेहद हैरान करने वाली रही। उन्होंने कहा, “मुझे उम्मीद थी कि राष्ट्रपति कहेंगी कि देश में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव व्यवस्था है और वोट चोरी नहीं हो रही है। लेकिन उन्होंने हमारी बात का खंडन नहीं किया और हमसे सीधे तौर पर धांधली के सबूत मांगे हैं।” राहुल गांधी ने सीधा आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और सीईसी ज्ञानेश कुमार मिलकर देश के लोकतंत्र को खत्म करने की आपराधिक साजिश रच रहे हैं। (INDIA bloc Leaders met President Murmu)
मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि देश में वोट का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 326 के तहत लोकतंत्र की नींव है और चुनाव आयोग इसका संरक्षक है, मालिक नहीं। उन्होंने कहा कि आयोग अपने राजनैतिक आकाओं के प्रति नहीं बल्कि संविधान के प्रति जवाबदेह है।
तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी ने कहा कि INDIA गठबंधन एकजुट और बेहद मजबूत है, जो देश की 60% से अधिक जनता का प्रतिनिधित्व करता है। उन्होंने राष्ट्रपति के रुख को सकारात्मक बताते हुए कहा कि विपक्ष जल्द ही सभी साक्ष्यों को संकलित कर राष्ट्रपति के समक्ष पेश करेगा।
संसद से सड़क और सुप्रीम कोर्ट तक की तैयारी
राष्ट्रपति से मिलने से पहले, INDIA गठबंधन के सांसदों ने संसद भवन के केंद्रीय कक्ष में एक बैठक की और रणनीति बनाई। इसके बाद सांसदों ने ‘सेव डेमोक्रेसी’ का बड़ा बैनर लेकर विजय चौक की तरफ मार्च किया, जहां पुलिस ने बैरिकेड्स लगाकर उन्हें रोक दिया। रोके जाने के बाद विपक्षी सांसद वहीं सड़क पर धरने पर बैठ गए और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर नारेबाजी की। (INDIA bloc Leaders met President Murmu)
विपक्ष ने साफ किया है कि यह लड़ाई केवल राष्ट्रपति भवन तक सीमित नहीं रहेगी। राहुल गांधी ने घोषणा की है कि आगामी सोमवार (12 अक्टूबर 2026) को विपक्षी दल सुप्रीम कोर्ट का रुख करेंगे और भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत के समक्ष भी यही ज्ञापन और एकत्रित सबूत सौंपेंगे। इसके अलावा, जनता के बीच जागरूकता फैलाने के लिए अक्टूबर और नवंबर के महीनों में देश के विभिन्न हिस्सों में पांच बड़ी रैलियां आयोजित की जाएंगी।
चुनाव आयोग का रुख
इस पूरे विवाद और विपक्ष के गंभीर आरोपों के बीच, भारत के निर्वाचन आयोग (ECI) ने पहले ही अपने एक बयान में साफ किया था कि संस्था के भीतर अलग-अलग राय होना एक सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है। आयोग का कहना है कि उसके सभी आदेश और चुनावी प्रक्रियाएं स्थापित कानूनी और वैधानिक प्रक्रियाओं के तहत ही संपन्न की जाती हैं। (INDIA bloc Leaders met President Murmu)
यह पूरा घटनाक्रम भारतीय राजनीति के इतिहास में एक अत्यंत संवेदनशील मोड़ माना जा रहा है, जहां देश की चुनावी शुचिता और लोकतांत्रिक संस्थाओं की निष्पक्षता को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच आर-पार की लड़ाई छिड़ गई है।









