Donald Trump Russia Diesel Deal: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा अक्टूबर 2026 में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ किए गए एक बड़े डीजल समझौते ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में हड़कंप मचा दिया है। हाल ही में अमेरिका ने ‘द लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट 2026’ पारित कर भारत और चीन जैसे देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने की खुली धमकी दी थी ताकि वे रूस से तेल न खरीदें।
लेकिन अब, घरेलू राजनीतिक दबाव और तेल की बढ़ती कीमतों के आगे झुकते हुए स्वयं अमेरिका ने रूस से डीजल खरीदने की घोषणा कर दी है। इस विरोधाभासी कदम के बाद वैश्विक मंच पर यह सवाल उठ खड़ा हुआ है क्या अमेरिका, अपने ही बनाए नियमों के उल्लंघन के लिए स्वयं पर प्रतिबंध लगाएगा?
Donald Trump Russia Diesel Deal: भारत को 100% टैरिफ की धमकी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार भारत की स्वतंत्र विदेश नीति और रूस के साथ तेल व्यापार पर आपत्ति जताते रहे हैं। सितंबर 2026 में अमेरिकी संसद ने ‘द लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट 2026’ पारित किया, जिस पर ट्रंप ने हस्ताक्षर किए।
इस कानून के तहत अमेरिका को अधिकार मिल गया कि वह रूस से कच्चा तेल या गैस खरीदने वाले देशों पर 100% तक का दंडात्मक टैरिफ लगा सकता है। ट्रंप प्रशासन का तर्क था कि भारत द्वारा रूसी तेल खरीदे जाने से मॉस्को को पैसा मिल रहा है, जिससे वह यूक्रेन में युद्ध जारी रखे हुए है। इसी दबाव नीति के कारण अमेरिका पहले भी भारतीय उत्पादों पर 25% का अतिरिक्त टैरिफ लगा चुका था। (Donald Trump Russia Diesel Deal)
बड़ा यू-टर्न: ट्रंप ने पुतिन से मांगा ‘समर्थन’ और की बड़ी डीजल डील
भारत और चीन को प्रतिबंधों की घुड़की देने के ठीक कुछ हफ्ते बाद, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अचानक एक बड़ा नीतिगत बदलाव किया। वाशिंगटन ने वैश्विक बाजारों और अपनी घरेलू जरूरतों के लिए रूसी डीजल की बिक्री पर लगे अमेरिकी प्रतिबंधों को 7 अप्रैल 2027 तक के लिए अस्थायी रूप से हटा दिया।
ट्रंप ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से सीधे संपर्क साधा और अमेरिका के लिए लाखों टन डीजल की तत्काल आपूर्ति का सौदा पक्का किया। इस सौदे के बाद व्हाइट हाउस में बोलते हुए ट्रंप ने खुले तौर पर कहा, “हम अपने देश में भारी मात्रा में तेल (डीजल) ला रहे हैं। मैं इसके लिए राष्ट्रपति पुतिन को धन्यवाद देना चाहता हूँ।”
ट्रंप ने कहा कि रूस तुरंत 3 लाख टन से अधिक डीजल की आपूर्ति करेगा। इसके बाद नवंबर में 5 लाख टन डीजल भेजा जाएगा और फिर उसके तुरंत बाद 10 लाख टन की आपूर्ति की जाएगी। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया मंच ट्रुथ सोशल पर पोस्ट में बताया कि इसके बाद रूस की रिफाइनरियों की स्थिति के आधार पर 30 लाख टन डीजल की अतिरिक्त आपूर्ति की जाएगी। इस तरह रूस की ओर से घोषित शुरुआती और बाद की आपूर्ति की मात्रा वैश्विक ईंधन बाजार के लिए अहम हो सकती है। (Donald Trump Russia Diesel Deal)

ट्रंप की इस लाचारी की वजह क्या है?
जो राष्ट्रपति दुनिया को प्रतिबंधों की धमकी दे रहा था, उसे अचानक पुतिन के सामने क्यों झुकना पड़ा? इसकी मुख्य वजहें अमेरिकी घरेलू संकट हैं। ईरान द्वारा होर्मुज़ जलडमरू मध्य (Strait of Hormuz) को बंद करने की धमकियों और मध्य-पूर्व के युद्ध के कारण वैश्विक स्तर पर ऊर्जा संकट गहरा गया है, जिससे अमेरिका में तेल की कीमतें आसमान छूने लगीं
अमेरिका में डीजल की कमी के कारण कृषि मशीनरी ठप होने लगी और माल ढुलाई महंगी हो गई। अमेरिका में डीजल की कीमतें 70% तक बढ़ गईं। अमेरिका में नवंबर में होने वाले मिडटर्म चुनाव ट्रंप के लिए सबसे बड़ी चुनौती हैं। महंगाई और ईंधन की कमी से जनता में भारी गुस्सा था। अपनी राजनीतिक जमीन बचाने के लिए ट्रंप को यूक्रेन युद्ध और प्रतिबंधों के सिद्धांतों को दरकिनार कर रूस का दामन थामना पड़ा। (Donald Trump Russia Diesel Deal)
भारत के लिए इसके क्या मायने हैं?
भू-राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप के इस कदम से भारत का रुख पूरी तरह सही साबित हुआ है।भारत के विदेश मंत्रालय ने हमेशा यह रुख अपनाया है कि नई दिल्ली किसी महाशक्ति के दबाव में फैसले नहीं लेती और उसके निर्णय केवल देशहित में होते हैं। अमेरिका के इस यू-टर्न ने भारत पर प्रतिबंध लगाने की उसकी नैतिक और कानूनी धमकियों को पूरी तरह कमजोर कर दिया है।
हालांकि, अमेरिका ने स्वयं के लिए नियमों को शिथिल कर दिया है, लेकिन भारत और चीन के लिए 100% टैरिफ वाले कानून को वापस लेने की कोई घोषणा नहीं की है। ट्रंप प्रशासन अभी भी भारत को व्यापारिक मोर्चे पर दबाने की कोशिश कर सकता है। (Donald Trump Russia Diesel Deal)









