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ध्रुव राठी की बढ़ीं कानूनी मुश्किलें? 8 साल पुराने मानहानि केस में साकेत कोर्ट ने जारी किया जमानती वारंट; 31 अक्टूबर को अगली सुनवाई

Dhruv Rathee Defamation Case

Dhruv Rathee Defamation Case: दिल्ली की साकेत कोर्ट ने शनिवार को मशहूर यूट्यूबर और डिजिटल कंटेंट क्रिएटर ध्रुव राठी के खिलाफ एक आपराधिक मानहानि मामले में जमानती वारंट जारी किया है। यह मामला करीब 8 साल पुराना है, जो साल 2018 में दर्ज कराया गया था। अदालत ने यह कदम तब उठाया, जब समन तामील कराने पहुंचे प्रोसेस सर्वर ने जानकारी दी कि राठी का घर बंद था। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 31 अक्टूबर 2026 को निर्धारित की है।

Dhruv Rathee Defamation Case: क्या है पूरा मामला?

यह कानूनी विवाद साल 2018 का है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के आईटी सेल के सदस्य विकास सांकरित्यायन उर्फ विकास पांडे ने ध्रुव राठी के खिलाफ साकेत कोर्ट में आपराधिक मानहानि की शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत के अनुसार, ध्रुव राठी ने अपने यूट्यूब चैनल पर ‘BJP IT Cell Part II’ शीर्षक से एक वीडियो अपलोड किया था।

    विकास पांडे का आरोप था कि राठी ने इस वीडियो के जरिए उनके खिलाफ झूठे और भ्रामक दावे किए, जिससे समाज में उनकी प्रतिष्ठा को गंभीर ठेस पहुंची। वीडियो में कथित तौर पर यह दावा किया गया था कि भाजपा आईटी सेल के सदस्यों ने पांडे को बदनाम करने या प्रभावित करने के लिए रिश्वत देने की कोशिश की थी।

    बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, इस वीडियो को दिल्ली के तत्कालीन मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी रीट्वीट किया था, जिसके बाद विकास पांडे ने दोनों के खिलाफ कानूनी कार्यवाही शुरू की थी। हालांकि, अरविंद केजरीवाल ने बाद में इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के सामने माफी मांग ली थी, लेकिन ध्रुव राठी के खिलाफ यह केस जारी रहा। (Dhruv Rathee Defamation Case)

    जमानती वारंट जारी होने की मुख्य वजह

    मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी (दक्षिण-पूर्व) राहुल जैन ने यह वारंट जारी किया है। अदालत को सूचित किया गया कि इससे पहले जारी किए गए समन की तामील पूरी नहीं हो सकी, क्योंकि जब कोर्ट का नोटिस लेकर तामीलकर्ता राठी के आवास पर पहुंचा, तो वहां ताला लटका मिला।

      शिकायतकर्ता के वकील समक्ष शर्मा ने अदालत के सामने दलील दी थी कि ध्रुव राठी आमतौर पर ऑस्ट्रिया में रहते हैं। लंबे समय से विदेशी धरती पर रहने के कारण उन्हें भारतीय पते पर समन तामील कराने में कई वर्षों से दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था। अदालत ने रिकॉर्ड का हवाला देते हुए बताया कि राठी को सबसे पहले जुलाई 2019 में समन जारी किया गया था। (Dhruv Rathee Defamation Case)

      हाल ही में जब जानकारी मिली कि ध्रुव राठी दिल्ली में ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के विरोध प्रदर्शनों में शामिल होने के लिए भारत आए हुए हैं और गुरुग्राम में रुके हैं, तो शिकायतकर्ता ने मामले की जल्द सुनवाई की अपील की थी। इसके बाद कोर्ट ने 12 अक्टूबर को उनके गुरुग्राम पते पर नया समन जारी करने का आदेश दिया था, लेकिन घर बंद पाए जाने पर अब कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए जमानती वारंट जारी कर दिया है।

      जमानती वारंट का कानूनी मतलब: क्या यह राहत है?

      आम जनता के बीच ‘वारंट’ शब्द को लेकर अक्सर भ्रम की स्थिति बन जाती है, लेकिन कानूनी रूप से जमानती वारंट जारी होना गैर-जमानती वारंट की तुलना में राहत भरा माना जाता है। जमानती वारंट जारी करने का मकसद आरोपी को जेल भेजना नहीं, बल्कि अदालत में उसकी पेशी सुनिश्चित करना है। इस वारंट में एक निश्चित मुचलके और शर्तों के तहत पुलिस स्टेशन या कोर्ट से ही तुरंत जमानत मिलने का प्रावधान होता है। यानी आरोपी को हिरासत में लेकर जेल नहीं भेजा जाता, बशर्ते वह कोर्ट द्वारा तय शर्तों को पूरा करे।

        कानूनी जानकारों के मुताबिक, अदालत द्वारा वारंट जारी किए जाने का यह अर्थ कतई नहीं है कि मानहानि के आरोप साबित हो गए हैं। यह न्याय प्रक्रिया का एक हिस्सा है और मामले का अंतिम फैसला आगे की जिरह और साक्ष्यों के आधार पर ही होगा। (Dhruv Rathee Defamation Case)

        लंदन से अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी बात रखने का ऐलान

        ध्रुव राठी पिछले कुछ दिनों से लगातार सुर्खियों में बने हुए हैं। इस मानहानि मामले से इतर, हाल ही में दिल्ली के जंतर-मंतर पर एक प्रदर्शन में शामिल होने से पहले दिल्ली पुलिस द्वारा उन्हें उनके गुरुग्राम आवास से हिरासत में लिए जाने की खबरें भी सामने आई थीं। रिहाई के बाद राठी ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए थे। ताजा रिपोर्ट्स और सोशल मीडिया पोस्ट्स के मुताबिक, इन घटनाक्रमों के बीच ध्रुव राठी भारत से लंदन के लिए रवाना हो चुके हैं और उन्होंने वहां से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी बात रखने की घोषणा की है।

        यह 8 साल पुराना आपराधिक मानहानि मामला अब एक निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। कोर्ट ने अगली सुनवाई के लिए 31 अक्टूबर 2026 की तारीख मुकर्रर की है। अब कानूनी विशेषज्ञों और सोशल मीडिया दोनों की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि ध्रुव राठी के कानूनी सलाहकार इस जमानती वारंट पर अदालत के समक्ष क्या रुख अपनाते हैं और 31 तारीख को होने वाली सुनवाई में राठी खुद या अपने वकीलों के माध्यम से किस प्रकार पक्ष रखते हैं। (Dhruv Rathee Defamation Case)

        Vaishali
        Author: Vaishali

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