Dhruv Rathee London Protest: इंडियन यूट्यूबर और सोशल मीडिया एक्टिविस्ट ध्रुव राठी ने एक बार फिर भारतीय राजनीति और डिजिटल स्पेस में हलचल तेज कर दी है। हाल ही में भारत दौरे के दौरान कई विवादों और कानूनी अड़चनों का सामना करने के बाद, ध्रुव राठी लंदन पहुंच चुके हैं और उन्होंने वहां से भारतीय चुनावी प्रक्रिया व लोकतंत्र की स्थिति को लेकर अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी बात रखने का बड़ा ऐलान किया है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर एक पोस्ट शेयर करते हुए राठी ने लिखा, “मैं अभी लंदन पहुंचा हूं। अब समय आ गया है कि दुनिया ‘वोट चोर’ और लोकतंत्र के हत्यारे की असलियत देखे। इंटरनेशनल डंका बजने का समय आ गया है।” उन्होंने लंदन के पार्लियामेंट स्क्वायर में महात्मा गांधी की प्रतिमा के सामने 17 अक्टूबर को दोपहर 12 बजे एक बड़े विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया है।
Dhruv Rathee London Protest: भारत में हिरासत और बढ़ता विवाद
ध्रुव राठी का यह अंतरराष्ट्रीय कदम उनके हालिया भारत दौरे के दौरान उपजे भारी तनाव के बाद आया है। दरअसल, वह 9 अक्टूबर को जर्मनी से भारत पहुंचे थे। वह नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) द्वारा आयोजित एक प्रस्तावित प्रदर्शन में शामिल होने वाले थे, जो मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ था। CJP ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में कथित अनियमितताओं और वोटर रजिस्ट्रेशन के फॉर्म-6 में हुए बदलावों को लेकर ‘वोट चोरी’ के आरोप लगाए थे और चुनाव आयोग की जवाबदेही तय करने की मांग की थी।
हालांकि, प्रदर्शन से पहले दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा कारणों और जरूरी मंजूरी नहीं मिलने का हवाला देते हुए इसकी अनुमति देने से इनकार कर दिया था। इसके बाद 10 अक्टूबर की सुबह पुलिस ने ध्रुव राठी को गुरुग्राम के सेक्टर-56 स्थित उनके घर से एहतियातन हिरासत में ले लिया। हालांकि, उन्हें उसी दिन देर रात छोड़ दिया गया। इस घटना को लेकर सोशल मीडिया पर काफी नाराजगी देखने को मिली। कुछ दिनों बाद राठी ने CJP से किसी भी तरह का औपचारिक संबंध होने से इनकार किया। उन्होंने कहा कि वह किसी राजनीतिक पार्टी के लिए नहीं, बल्कि मुद्दों के आधार पर अपनी आवाज उठाते हैं। (Dhruv Rathee London Protest)
कानूनी अड़चनें और लंदन रवानगी
भारत प्रवास के दौरान ध्रुव राठी की मुश्किलें केवल हिरासत तक सीमित नहीं रहीं। साल 2018 में उनके यूट्यूब चैनल पर अपलोड किए गए वीडियो ‘बीजेपी आईटी सेल पार्ट-2’ को लेकर बीजेपी आईटी सेल के सदस्य विकास पांडे द्वारा दायर एक आपराधिक मानहानि मामले में दिल्ली की साकेत कोर्ट ने उनके खिलाफ जमानती वारंट जारी कर दिया।
शिकायतकर्ता का आरोप था कि राठी ने वीडियो में उन पर झूठे आरोप लगाए, जिससे उनकी प्रतिष्ठा को भारी नुकसान पहुंचा। जब अदालत में सुनवाई हुई, तो राठी के वकील ने सूचित किया कि वह व्यक्तिगत पेशी के लिए उपलब्ध नहीं हैं क्योंकि वह देश से बाहर जा चुके हैं। इन कानूनी घेरेबंदियों और विवादों के बीच, ध्रुव राठी ने भारत छोड़कर लंदन जाने का फैसला किया। (Dhruv Rathee London Protest)
‘इंटरनेशनल डंका’: वैश्विक मंच का रणनीतिक उपयोग
ध्रुव राठी ने लंदन के पार्लियामेंट स्क्वायर को प्रदर्शन के लिए चुना है, जिसे एक सोची-समझी रणनीति माना जा रहा है। महात्मा गांधी की प्रतिमा के सामने भारत में चुनाव सुधार और लोकतंत्र से जुड़े मुद्दे उठाकर वह ब्रिटिश मीडिया और दुनिया का ध्यान खींचना चाहते हैं। राठी का कहना है कि अगर भारत में शांतिपूर्ण प्रदर्शनों पर पुलिस की कार्रवाई और प्रतिबंध लगाए जाते हैं, तो प्रवासी भारतीयों और अंतरराष्ट्रीय मंचों के जरिए भी अपनी बात उठाना जरूरी है। इस कदम के जरिए वह भारत के लोकतंत्र से जुड़े सवालों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में लाना चाहते हैं।
विदेशों में रह रहे गैर-नागरिकों के लिए प्रदर्शन के नियम
जब कोई व्यक्ति अपने देश से बाहर किसी अन्य देश जैसे यूके, यूएसए या यूरोपीय संघ में वर्क वीजा, स्टूडेंट वीजा या स्थायी निवास (PR) पर रह रहा होता है, तो उसके प्रदर्शन करने और अपनी अभिव्यक्ति रखने के अधिकार नागरिकों की तुलना में थोड़े अलग और ज्यादा जोखिम भरे हो जाते हैं। (Dhruv Rathee London Protest)
1 मौलिक अधिकार बनाम वीजा की शर्तें (UK, USA, और Europe में)
अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानूनों और अधिकांश लोकतांत्रिक देशों के संविधानों जैसे यूके का ह्यूमन राइट्स एक्ट 1998 या अमेरिका का फर्स्ट अमेंडमेंट के तहत शांतिपूर्ण सभा और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार सभी व्यक्तियों को मिलता है, चाहे वे वहां के नागरिक हों या विदेशी।
- यूनाइटेड किंगडम (UK): यूके में ह्यूमन राइट्स एक्ट का आर्टिकल 11 शांतिपूर्ण प्रदर्शन की गारंटी देता है। हालांकि, हाल के वर्षों में लागू पब्लिक ऑर्डर एक्ट के तहत पुलिस को प्रदर्शनों पर रूट, समय और शोर के स्तर को लेकर कड़ी शर्तें लगाने का अधिकार प्राप्त है। सार्वजनिक बुनियादी ढांचे को बाधित करने या ‘लॉकिंग-ऑन’ जैसी गतिविधियों को अब वहां गंभीर अपराध माना जाता है।
- संयुक्त राज्य अमेरिका (USA): अमेरिकी धरती पर मौजूद किसी भी विदेशी नागरिक को शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार है, लेकिन वहां स्थानीय प्रशासन द्वारा तय समय, स्थान और तरीके के नियमों का पालन करना अनिवार्य होता है।
2. वीजा और देश निकाला का जोखिम
नागरिकों और प्रवासियों के बीच सबसे बड़ा अंतर यह है कि नागरिकों को उनके देश से निकाला नहीं जा सकता, जबकि प्रवासियों का वीजा रद्द किया जा सकता है। यूके जैसे देशों में वीजा विस्तार या स्थायी निवास देते समय ‘गुड कैरेक्टर’ देखा जाता है। यदि कोई विदेशी नागरिक किसी हिंसक प्रदर्शन, दंगे या किसी प्रतिबंधित संगठन के समर्थन में पकड़ा जाता है, तो उसे राष्ट्रीय सुरक्षा या लोक व्यवस्था के लिए खतरा मानकर डिपोर्ट किया जा सकता है। (Dhruv Rathee London Protest)
विदेशी छात्र (जैसे यूएस में F-1 या यूके में स्टूडेंट वीजा धारक) अगर किसी प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा गिरफ्तार या चार्ज किए जाते हैं, तो उनका विश्वविद्यालय उनका वीजा प्रायोजन रद्द कर सकता है, जिससे उनका स्टेटस तुरंत अवैध हो जाता है।
3. स्थानीय कानूनों का पालन और पूर्व सूचना
यूरोप और यूके के कई शहरों में किसी भी बड़े मार्च या सार्वजनिक सभा के लिए स्थानीय पुलिस या प्रशासन को पहले से सूचित करना या अनुमति लेना कानूनी रूप से आवश्यक होता है। बिना अनुमति के अचानक की गई सभाएं अवैध घोषित की जा सकती हैं, और पुलिस को उन्हें हटाने का पूरा अधिकार होता है।
प्रवासियों के लिए सुरक्षित प्रदर्शन के व्यावहारिक नियम
विदेशी धरती पर किसी भी राजनीतिक या सामाजिक मुद्दे पर आवाज उठाते समय प्रवासियों को किसी भी प्रकार की तोड़फोड़, पुलिस के काम में बाधा डालना, या उग्र नारेबाजी कानूनी पचड़े में डाल सकती है। मेजबान देश द्वारा आतंकवादी या चरमपंथी घोषित किए गए संगठनों के झंडे, बैनर या प्रतीकों का इस्तेमाल करने पर तत्काल गिरफ्तारी और डिपोर्टीशन की कार्रवाई हो सकती है। जिस स्थान पर प्रदर्शन हो रहा है (जैसे लंदन का पार्लियामेंट स्क्वायर), वहां की पुलिस द्वारा जारी दिशा-निर्देशों और बैरिकेडिंग नियमों का पालन करना चाहिए। (Dhruv Rathee London Protest)
तीखी राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और सोशल मीडिया पर विभाजन
ध्रुव राठी के इस ऐलान ने सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों को दो धड़ों में बांट दिया है। राठी के समर्थकों और सरकार विरोधी कार्यकर्ताओं का मानना है कि भारत में जब मुख्यधारा की मीडिया निष्पक्षता खो चुकी है और प्रदर्शन करने के लोकतांत्रिक अधिकारों को सीमित किया जा रहा है, तब राठी का अंतरराष्ट्रीय मंच का उपयोग करना पूरी तरह जायज है। वे इसे तानाशाही और चुनावी धांधली के खिलाफ एक ‘वन मैन आर्मी’ की लड़ाई के रूप में देख रहे हैं।
दूसरी तरफ, सत्तारूढ़ दल के समर्थकों और आलोचकों ने इसे भारत की छवि को वैश्विक स्तर पर धूमिल करने की एक साजिश करार दिया है। आलोचकों का आरोप है कि ध्रुव राठी भारत में कानून और अदालती समन का सामना करने से बचने के लिए विदेश भाग गए हैं और वहां से विदेशी ताकतों या निहित स्वार्थों के इशारे पर भारत के लोकतांत्रिक संस्थानों (जैसे चुनाव आयोग) पर कीचड़ उछाल रहे हैं। कइयों ने सोशल मीडिया पर तंज कसते हुए उन्हें ‘कायर’ और ‘विदेशी धरती से जहर उगलने वाला’ कहा है। (Dhruv Rathee London Protest)









