लखनऊ ट्रिपल मर्डर: पार्किंग विवाद में पिता-पुत्र समेत तीन की हत्या, आरोपी के फायरिंग करते VIDEO वायरल; जानें पूरा मामला ग्रेटर नोएडा में दर्दनाक हादसा, 23वीं मंजिल से गिरकर पिता-पुत्र की मौत; बेटे को बचाने में गई जान दुलारचंद मर्डर केस में अनंत सिंह को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका, जमानत रद्द; 1 दिसंबर तक करना होगा सरेंडर इजरायल चुनाव नतीजे घोषित: 53 सीटों के साथ नेतन्याहू सबसे आगे, लेकिन बहुमत से दूर; सरकार बनाने की राह मुश्किल ‘बहन जी, बार-बार मेरी परीक्षा क्यों लेती हैं?’ आकाश के सवाल पर मायावती ने दिया भावुक जवाब; जानिए क्या हुई दोनों के बीच बात UP Politics: मांग 200 सीटों की, मगर MLC चुनावों में ‘शून्य’ का झटका; यूपी में कांग्रेस की दावेदारी पर उठे सवाल
लखनऊ ट्रिपल मर्डर: पार्किंग विवाद में पिता-पुत्र समेत तीन की हत्या, आरोपी के फायरिंग करते VIDEO वायरल; जानें पूरा मामला ग्रेटर नोएडा में दर्दनाक हादसा, 23वीं मंजिल से गिरकर पिता-पुत्र की मौत; बेटे को बचाने में गई जान दुलारचंद मर्डर केस में अनंत सिंह को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका, जमानत रद्द; 1 दिसंबर तक करना होगा सरेंडर इजरायल चुनाव नतीजे घोषित: 53 सीटों के साथ नेतन्याहू सबसे आगे, लेकिन बहुमत से दूर; सरकार बनाने की राह मुश्किल ‘बहन जी, बार-बार मेरी परीक्षा क्यों लेती हैं?’ आकाश के सवाल पर मायावती ने दिया भावुक जवाब; जानिए क्या हुई दोनों के बीच बात UP Politics: मांग 200 सीटों की, मगर MLC चुनावों में ‘शून्य’ का झटका; यूपी में कांग्रेस की दावेदारी पर उठे सवाल

दुलारचंद मर्डर केस में अनंत सिंह को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका, जमानत रद्द; 1 दिसंबर तक करना होगा सरेंडर

Anant Singh

Anant Singh: सुप्रीम कोर्ट ने बिहार के बाहुबली नेता और मोकामा से विधायक अनंत सिंह की जमानत रद्द कर दी है और उन्हें 1 दिसंबर 2026 तक या उससे पहले सरेंडर करने का सख्त आदेश दिया है। दुलारचंद यादव हत्याकांड में जस्टिस एम.एम. सुंद्रेश और जस्टिस पी.वी. वराले की पीठ ने यह बड़ा फैसला सुनाया। शीर्ष अदालत ने पटना हाईकोर्ट के उस आदेश को पूरी तरह खारिज कर दिया, जिसके तहत अनंत सिंह को मार्च 2026 में जमानत मिली थी। हाल ही में जनता दल (यूनाइटेड) से 6 साल के लिए निष्कासित होने के बाद, अनंत सिंह के राजनीतिक और कानूनी करियर के लिए इसे अब तक का सबसे बड़ा झटका माना जा रहा है।

Anant Singh: सुप्रीम कोर्ट का कड़ा रुख और हाईकोर्ट के फैसले पर सवाल

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई करते हुए साफ किया कि पटना हाईकोर्ट ने अनंत सिंह को जमानत देते समय अपराध की गंभीर प्रकृति और उनके लंबे आपराधिक इतिहास को पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया था।अदालत ने अनंत सिंह की उस याचिका को भी सिरे से खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने अपनी बेटी की शादी का हवाला देकर सरेंडर के लिए कुछ और समय मांगा था। सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि हत्या जैसे जघन्य और गंभीर आपराधिक मामले को केवल एक राजनीतिक विवाद के रूप में नहीं देखा जा सकता।

अदालत ने बिहार पुलिस को निर्देश दिया है कि वह अगले चार महीनों के भीतर इस पूरे मामले की जांच पूरी करे। यह पूरी कानूनी लड़ाई दुलारचंद यादव के पोते नीरज कुमार की याचिका पर आगे बढ़ी, जिन्होंने पटना हाईकोर्ट के जमानत के फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। (Anant Singh)

दुलारचंद मर्डर केस- आखिर क्या था पूरा मामला?

यह पूरा विवाद साल 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान शुरू हुआ था। मोकामा विधानसभा सीट से अनंत सिंह जनता दल यूनाइटेड (JDU) के टिकट पर चुनाव मैदान में थे। वहीं, चुनावी रण में उतरी प्रशांत किशोर की ‘जन सुराज पार्टी’ ने पीयूष प्रियदर्शी को अपना उम्मीदवार बनाया था। आरजेडी से जुड़े नेता दुलारचंद यादव उस चुनाव में जन सुराज के प्रत्याशी पीयूष प्रियदर्शी के समर्थन में बढ़-चढ़कर प्रचार कर रहे थे।

30 अक्टूबर, 2025 को चुनावी प्रचार के दौरान मोकामा में अनंत सिंह और दुलारचंद यादव के समर्थकों का काफिला आमने-सामने आ गया। दोनों गुटों में तीखी बहस हुई, जिसने देखते ही देखते हिंसक मोड़ ले लिया। दोनों पक्षों की ओर से ताबड़तोड़ गोलियां चलीं, जिसमें गोली लगने के कारण दुलारचंद यादव की मौके पर ही मौत हो गई। इस हाई-प्रोफाइल मर्डर केस में अनंत सिंह को मुख्य आरोपी बनाते हुए गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था। हालांकि, जेल की सलाखों के पीछे रहते हुए भी अनंत सिंह ने मोकामा सीट से चुनाव जीत लिया था। (Anant Singh)

पटना हाई कोर्ट से मिली थी राहत, सुप्रीम कोर्ट में पोते ने दी चुनौती

जेल में रहने के बाद, मार्च 2026 में पटना हाई कोर्ट ने अनंत सिंह को राहत देते हुए इस मामले में जमानत मंजूर कर ली थी, जिसके बाद वह जेल से बाहर आ गए थे। लेकिन यह राहत ज्यादा दिनों तक नहीं टिक सकी। मृतक दुलारचंद यादव के पोते नीरज कुमार ने पटना हाई कोर्ट के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। नीरज कुमार की याचिका में दलील दी गई कि हाई कोर्ट ने जमानत देते समय अनंत सिंह के रसूख, गवाहों को प्रभावित करने की उनकी क्षमता और उनके व्यापक आपराधिक रिकॉर्ड पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया।

सुनवाई के दौरान सरकार की दलीलें और सुप्रीम कोर्ट की तल्ख टिप्पणी

30 अक्टूबर, 2026 को हुई इस महत्वपूर्ण सुनवाई के दौरान बिहार सरकार ने भी सुप्रीम कोर्ट के सामने अनंत सिंह के पूरे आपराधिक इतिहास का कच्चा चिट्ठा रख दिया। सरकारी वकील ने अदालत को बताया कि अनंत सिंह के खिलाफ हत्या, हत्या के प्रयास, अपहरण, रंगदारी और आर्म्स एक्ट जैसी बेहद गंभीर धाराओं के तहत 62 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद देश की सर्वोच्च अदालत ने बेहद कड़ा रुख अपनाया। (Anant Singh)

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पटना हाई कोर्ट का जमानत देने का फैसला पूरी तरह त्रुटिपूर्ण था, क्योंकि ऐसे गंभीर मामले में आरोपी की पृष्ठभूमि और अपराध की प्रकृति को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। अदालत ने साफ तौर पर कहा कि किसी व्यक्ति की हत्या को केवल चुनावी या राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता का नाम देकर हलके में नहीं लिया जा सकता। यह एक गंभीर आपराधिक कृत्य है।

कानूनी सूत्रों के अनुसार, अनंत सिंह के वकीलों ने बेटी की शादी का हवाला देकर अदालत से तत्काल सरेंडर करने से थोड़ी मोहलत मांगी थी, जिसे पीठ ने सिरे से खारिज कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने बिहार पुलिस को कड़े निर्देश देते हुए कहा है कि वह चार महीने के भीतर इस पूरे मामले की जांच मुकम्मल करे और अदालत के समक्ष रिपोर्ट पेश करे। (Anant Singh)

चौतरफा मुश्किलों में घिरे ‘छोटे सरकार’

जेडीयू से निष्कासन और अब सुप्रीम कोर्ट से जमानत रद्द होने के बाद अनंत सिंह उर्फ ‘छोटे सरकार’ की मुश्किलें चौतरफा बढ़ गई हैं। एक तरफ जहां उन्हें 1 दिसंबर, 2026 तक जेल की सलाखों के पीछे वापस जाना ही होगा, वहीं दूसरी तरफ उनकी पत्नी और पूर्व विधायक नीलम देवी को भी प्रशासन की ओर से उनका वर्तमान सरकारी आवास खाली करने का नोटिस थमा दिया गया है।

बिहार की राजनीति और बाहुबल के इस बड़े गठजोड़ पर सुप्रीम कोर्ट के इस ऐतिहासिक फैसले ने एक बार फिर यह साफ कर दिया है कि कानून की नजर में कोई भी रसूखदार व्यक्ति अपराध की प्रकृति और अपने अतीत की बदौलत राहत नहीं पा सकता। अब पूरे बिहार की निगाहें 1 दिसंबर की समयसीमा और राज्य पुलिस द्वारा अगले चार महीनों में की जाने वाली त्वरित जांच पर टिकी हैं। (Anant Singh)

यह भी पढे़ें: अनंत सिंह पर JDU का बड़ा एक्शन, 6 साल के लिए पार्टी से निकाला; विधायकी पर भी खतरा!

Vaishali
Author: Vaishali

Comments are closed.

और पढ़ें