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BrahMos Missiles: राजनाथ सिंह ने लखनऊ में ब्रह्मोस मिसाइलों के पहले बैच को दिखाई हरी झंडी, सीएम योगी भी रहे मौजूद

BrahMos Missiles

BrahMos Missiles: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शनिवार को ‘आत्मनिर्भर भारत’ मिशन के तहत उत्तर प्रदेश के लखनऊ में ब्रह्मोस एयरोस्पेस प्रोडक्शन यूनिट में ब्रह्मोस मिसाइलों के पहले बैच को हरी झंडी दिखाई। इस अवसर पर सिंह के साथ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी मौजूद थे। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उस घोषणा के कुछ महीने बाद आया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि ब्रह्मोस मिसाइलों का निर्माण अब लखनऊ में किया जाएगा।

यह कार्यक्रम रक्षा विनिर्माण के क्षेत्र में भारत की आत्मनिर्भरता हासिल करने की प्रतिबद्धता का प्रतीक है। जानकारी के मुताबिक, यह ब्रह्मोस यूनिट उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (UPDIC) का हिस्सा है और मई 2025 में इसका उद्घाटन हुआ था। इस यूनिट में मिसाइल सिस्टम के निर्माण से लेकर अंतिम परीक्षण तक की पूरी प्रक्रिया स्वदेशी रूप से की जाती है। ₹300 करोड़ की लागत से 80 हेक्टेयर भूमि पर स्थापित यह अत्याधुनिक इकाई प्रति वर्ष 80 से 100 ब्रह्मोस मिसाइलों का उत्पादन करेगी। (BrahMos Missiles)

यह कदम भारत के रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देने और देश की रणनीतिक क्षमताओं को बढ़ाने के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। लखनऊ में निर्मित ब्रह्मोस मिसाइलों का यह पहला बैच भारतीय सशस्त्र बलों को दिया जाएगा। यह भारत और रूस का एक संयुक्त उद्यम है, और इसे दुनिया की सबसे तेज सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों में से एक माना जाता है।

ऑपरेशन सिंदूर: ब्रह्मोस की भूमिका और प्रभाव (BrahMos Missiles)

अगस्त में उत्तर प्रदेश के वाराणसी में एक जनसभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की वायु रक्षा प्रणाली की सराहना की थी, जिसने सैन्य अभियान के दौरान पाकिस्तानी ड्रोन और मिसाइलों का मुकाबला किया था। उन्होंने कहा था कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान दुनिया ने हमारे स्वदेशी हथियारों की क्षमताओं को देखा। हमारी वायु रक्षा प्रणालियों, मिसाइलों और ड्रोनों ने ‘आत्मनिर्भर भारत’ की ताकत साबित की है, खासकर ब्रह्मोस मिसाइलों ने। ब्रह्मोस मिसाइलों का निर्माण अब लखनऊ में किया जाएगा।

रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) और रूसी रक्षा कंपनी एनपीओ मशीनोस्ट्रोयेनिया द्वारा डिजाइन की गई ब्रह्मोस ने भयावह पहलगाम आतंकवादी हमले के बाद ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान के सैन्य बुनियादी ढांचे पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाला। चार दिनों तक चले संघर्ष के दौरान पूरे पाकिस्तान में स्थित पाकिस्तानी हवाई अड्डों और सेना की छावनियों पर मिसाइलों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया गया।

संघर्ष के पहले चरण में, जब भारत ने पाकिस्तान में आतंकवादी ढाँचे पर हमले शुरू किए, जिसमें पाकिस्तानी पंजाब प्रांत में जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा के आतंकवादी मुख्यालय भी शामिल थे, तो ब्रह्मोस मिसाइल भारतीय वायु सेना का पसंदीदा हथियार था, जिसने लक्ष्यों पर बड़ी सटीकता से प्रहार किया। ब्रह्मोस ने पाकिस्तानी हवाई ठिकानों को और अधिक नुकसान पहुंचाया, जिसके बाद पाकिस्तानी सेना ने आतंकवादियों और उनके बुनियादी ढांचे की रक्षा करते हुए जवाबी कार्रवाई करने की कोशिश की। (BrahMos Missiles)

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