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PDA मतदाताओं को वोटर लिस्ट से हटाने की साजिश…, अखिलेश यादव ने यूपी SIR पर फिर उठाए सवाल; रखीं चार मांगें

UP Politics

UP Politics: समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची के चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) पर तीखा हमला किया, जिसमें पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक (PDA) समुदायों के मतदाताओं को हटाने की साजिश का आरोप लगाया।

UP Politics: SIR प्रक्रिया पर गंभीर आरोप

सोशल मीडिया एक्स पर एक पोस्ट में यादव ने मांग की कि SIR प्रक्रिया को तुरंत रोका जाए और उसकी समीक्षा की जाए। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि पात्र मतदाताओं को हटाने के किसी भी प्रयास की बिना किसी देरी के जाँच की जानी चाहिए। उन्होंने भारत निर्वाचन आयोग (ECI) और SIR प्रक्रिया की निगरानी करने वाले अधिकारियों के लिए चार प्रमुख माँगें रखीं।

सपा प्रमुख ने लिखा, “श्रीमान से सीधी मांगः- यूपी में कितने प्रतिशत एसआईआर हुआ है, इसका डेटा आज ही प्रकाशित किया जाए। बीएलओ पर जानलेवा दबाव हटाकर समयावधि के अनुसार अतिरिक्त अधिकृत लोगों को इस कार्य में लगाया जाए। सुनिश्चित करें कि सत्ताधारी दल का समूह और उनके सहयोगी पिछले दरवाजे से इस कार्य में अभी शामिल नहीं हैं और भविष्य में कभी नहीं होंगे।” (UP Politics)

अखिलेश यादव ने अपने आरोप को आगे बढ़ाते हुए कहा कि इस बात की गहन जांच होनी चाहिए कि प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में पीडीए सोसायटी के कितने लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाने की साजिश की जा रही है और इसे हर हाल में रोका जाना चाहिए।

चुनाव आयोग के कर्मचारियों पर दबाव (UP Politics)

इससे पहले, सपा प्रमुख यादव ने आरोप लगाया कि भारत निर्वाचन आयोग के कर्मचारियों पर SIR प्रक्रिया पूरी करने के लिए दबाव डाला जा रहा है और सवाल किया कि आखिर इतनी जल्दी क्या है? उन्होंने आगे दावा किया कि पश्चिम बंगाल में भी लोग इस प्रक्रिया के बारे में शिकायतें उठा रहे हैं।

Akhilesh Yadav

फतेहपुर में एक सुपरवाइजर की मौत का हवाला देते हुए, जिसकी कथित तौर पर SIR प्रक्रिया के दबाव के कारण मौत हो गई। समाजवादी पार्टी प्रमुख ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में सवाल किया कि एसआईआर प्रक्रिया के दौरान मरने वाले चुनाव आयोग के कर्मचारियों की मदद कौन करेगा? उन्होंने आगे कहा कि चुनाव आयोग को आगे आकर अधिकारियों का समर्थन करना चाहिए। (UP Politics)

यादव ने कहा, “जब मैं सुपरवाइजर (जिनकी एसआईआर प्रक्रिया के दौरान मृत्यु हो गई) के परिवार से मिलने फतेहपुर गया था, तो परिवार ने मुझे बताया कि उन पर प्रक्रिया जल्दी पूरी करने के लिए सरकार का भारी दबाव था। नतीजतन, उन्होंने आत्महत्या कर ली। इतनी जल्दी क्या थी? पश्चिम बंगाल के लोग भी कह रहे हैं कि चुनाव आयोग के हाथ खून से सने हैं। SIR प्रक्रिया के दौरान मर रहे चुनाव आयोग के कर्मचारियों की मदद कौन करेगा? चुनाव आयोग को आगे आकर मदद करनी चाहिए।”

भारत निर्वाचन आयोग 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाता सूचियों के SIR का दूसरा चरण आयोजित करेगा, जिसकी अंतिम मतदाता सूची 7 फरवरी, 2026 को प्रकाशित की जाएगी। SIR का पहला चरण बिहार में विधानसभा चुनाव से पहले सितंबर में पूरा हो गया था। इस प्रक्रिया में अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, छत्तीसगढ़, गोवा, गुजरात, केरल, लक्षद्वीप, मध्य प्रदेश, पुडुचेरी, राजस्थान, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल शामिल हैं। (UP Politics)


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