देश में सोना और चांदी पिछले साल से धीरे- धीरे उसके रेट बढ़ते जा रहे हैं। जिसकी वजह से लोगों को शादी बारात में गहने बनवाने में काफी मश्क्कत करनी पड़ती है। लेकिन सोना और चांदी इतिहास में पहली बार इतनी महंगी हो गई कि लोगों के खरीद से बहार हो चुकी हैं।
हालांकि आज अचानक से चांदी के रेट में काफी बड़ी गिरावट देखने को मिली। जिससे खरीदारों के चेहरे पर खुशी की लहर दौड़ गई।

देश के वायदा बाजार मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर कुछ ही घंटों में चांदी 21 हजार रुपए तक सस्ती हो गई है. सुबह जब 9 बजे बाजार ओपन हुआ था, उसके कुछ ही मिनटों में चांदी की कीमतों में 14 हजार रुपए से ज्यादा का इजाफा देखने को मिला था और दाम पहली बार 2.50 लाख रुपए को पार करते हुए नए रिकॉर्ड लेवल पर पहुंच गए थे. जिसके बाद शुरू हो गई निवेशकों की बिकवाली। खास बात तो ये है कि चांदी के दाम रिकॉर्ड लेवल से करीब 21 हज़ार रुपए से ज्यादा नीचे चली गई है। इसके पीछे तीन बड़े कारण बताए जा रहे हैं। सबसे बड़ा कारण प्रॉफिट बुकिंग बताया जा रहा है। वहीं दूसरी ओर रूस और यूक्रेन के बीच एक बार फिर से पीस वार्ता शुरू हो गई है, जिसकी वजह से सेफ हैवन डिमांड कम हो गई है। जिसकी वजह से चांदी की कीमतें अपने रिकॉर्ड हाई से 8 फीसदी से ज्यादा टूट गई हैं। आइए आपको भी बताते हैं कि आखिर चांदी के आंकड़े किस तरह की कहानी बयां कर रहे है।

चांदी में तूफानी तेजी के पीछे कारण
बता दें, सबसे पहले चांदी पर अंतरराष्ट्रीय बाजार ने दबाव बनाया। वैश्विक सिल्वर की कीमतें पहले $80 प्रति औंस तक पहुंच गईं। लेकिन उसके बाद लुढ़क कर $75 पर पहुंच गई, जिससे घरेलू भावों पर असर पड़ा है।
गौरतलब है कि चांदी ने पिछले एक साल में जबरदस्त रिटर्न दिया है। दिसंबर 2024 में चांदी का भाव करीब 90 लाख रुपये किलो था। जहां से भाव 150% से ज्यादा उछल चुका है। सोमवार को चांदी की कीमत MCX पर 254000 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई।

विशेषज्ञों का कहना है कि चांदी की कीमतों में कई कारणों से बढ़ोतरी देखी जा रही है। औद्योगिक मांग में उछाल, निवेशकों की सुरक्षित संपत्तियों की ओर बढ़ती रुचि और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के कारण चांदी की डिमांड बढ़ती जा रही है। खास तौर पर ग्रीन एनर्जी टेक्नोलॉजी, इलेक्ट्रिक वाहनों और सोलर पैनल्स में चांदी की बढ़ती मांग ने कीमतों को उछलने में मदद की है।

‘10% हाई के बाद 25% गिरी चांदी‘
BTIG के एनालिस्ट जोनाथन क्रिन्स्की (Jonathan Krinsky) ने 1987 का उदाहरण देते हुए कहा कि जब-जब चांदी ने मल्टी-मंथ हाई पर 10% की एक दिन की छलांग लगाई, उसके बाद 25% तक की गिरावट भी देखी गई। ICICI Prudential Mutual Fund के CIO (फिक्स्ड इनकम) मनीष बंथिया भी मानते हैं कि, “इतनी शानदार रैलियां अक्सर नरमी से नहीं, झटके से ठंडी पड़ती हैं।”









