पश्चिम बंगाल की राजनीतिक पारा काफी हाई है। वहीं बीजेपी और टीएमसी की तरफ से एक दूसरे पर तीखा हमला बोला गया है। हालांकि SIR को लेकर ममता बैनर्जी पूरी तरह से बौखला गई है. जिसको लेकर वो केद्र सरकार पर उट-पटांग आरोप लगा रही है। अब इसी कड़ी में ममता बैनर्जी के भातीजा अभिषेक बैनर्जी नें मुख्य चुनाव आयुक्त से बैठक दौरान तीखी नोकझोंक हुई है।
उन्होंने कहा, ‘पिछली बार जो पांच सवाल पूछे थे, उनका जवाब नहीं मिला है। दो तीन मुद्दों को छोड़कर किसी का जवाब नहीं मिला। 1 करोड़ 36 लाख लोगों का नाम संदेह में है, हमने उसको लेकर सवाल पूछा, लेकिन उसकी लिस्ट अब तक नहीं दी गई.’

अभिषेक बैनर्जी और चुनाव आयुक्त के बीच क्या हुआ
SIR की मीटिंग के बाद अभिषेक बनर्जी ने जब मीडिया के समाने आए और मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि मेरी बात पर मुख्य चुनाव आयुक्त को गुस्सा होने लगे, मेरी तरफ उंगली उठाने लगे, मैंने उनसे कहा कि आप नॉमिनेटेड हैं और मैं जनता से चुना हुआ है। आप अपने बॉस के प्रति जिम्मेदार हैं। मैं बंगाल की जनता के प्रति जिम्मेदार हूं। उंगली नीचे करके बात करिए। उन्होंने कहा कि चुनाव आयुक्त उनके सवालों का जवाब देने में नाकाम रहे। अभिषेक बनर्जी ने कहा कि ढाई घंटे की चर्चा, जिसमें उनकी पार्टी की तरफ से उठाई गई आठ से दस चिंताओं पर बात हुई, उसमें सिर्फ दो या तीन पॉइंट्स पर क्लैरिटी के अलावा “किसी भी चीज का कोई ठोस जवाब नहीं मिला।” उन्होंने आगे कहा कि SIR पर कमीशन से सवाल पूछने की कोशिशों को बार-बार नागरिकता जैसे अलग-अलग टॉपिक पर मोड़ दिया जाता है।

जिनके नाम काटे उनमें कितने बांग्लादेशी और रोहिंग्या?
उन्होंने कहा, ’60 से ऊपर जिसकी उम्र है और बीमार है, उसको भी चुनाव आयोग के दफ्तर में ना बुलाकर, उसके घर भी जाकर वेरिफिकेशन किया जा सकता है। जो बीजेपी की तरफ से आरोप लगाया जा रहा है, कहा जाता है 1 करोड़ रोहिंग्या और बांग्लादेशी है, 58 लाख जो नाम हटाए जा रहे हैं, उसमें कितने बांग्लादेशी और रोहिंग्या हैं?, इसका जवाब मांगा है।’ उन्होंने कहा, ‘ERO से बिना पूछे जो नाम हटाए जा रहे हैं. उस पर सवाल पूछा कि जिस फार्म नहीं भरा उसका नाम हटाना चाहिए, लेकिन जिसने फॉर्म भरा उसका नाम कैसे डिलीट हो रहा है?’









