कर्नाटक में ईवीएम (EVM) को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला और महत्वपूर्ण खुलासा हुआ है। जिस राज्य की कांग्रेस सरकार ने हाल ही में स्थानीय निकाय चुनाव बैलेट पेपर से कराने का निर्णय लिया था, उसी राज्य के आधिकारिक सर्वे में जनता ने ईवीएम पर ‘अटूट’ भरोसा जताया है।
“क्या ईवीएम सच में ‘हैक’ हो सकती है? जब राजनीतिक गलियारों में इस पर संग्राम छिड़ा है, तब कर्नाटक की जनता ने एक ऐसे सर्वे में जवाब दिया है। जिसने देश की चुनावी राजनीति में भूचाल ला दिया है। खुद कांग्रेस शासित राज्य की मशीनरी द्वारा कराए गए सर्वे में ईवीएम ‘पास’ ही नहीं हुई, बल्कि ‘टॉप’ कर गई है!”

आपको बताते है कि कांग्रेस के नेतृत्व वाली कर्नाटक सरकार द्वारा किए गए एक सर्वे का हवाला देते हुए राहुल गांधी पर उनके ‘वोट चोरी’ के आरोपों को लेकर हमला किया। कर्नाटक सरकार ने लोकसभा चुनाव 2024 पर एक सर्वे के नतीजे जारी किए, जिसमें दिखाया गया कि ज़्यादातर वोटर इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (EVMs) पर भरोसा करते हैं और मानते हैं कि चुनाव ‘स्वतंत्र और निष्पक्ष’ हैं। कर्नाटक सरकार की एक एजेंसी के सर्वे में दावा किया गया है कि राज्य के 91% लोग मानते हैं कि भारत में चुनाव स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से कराए जाते हैं और EVM सटीक नतीजे देती हैं।
विवाद और राजनीति का मोड़
यह रिपोर्ट ऐसे समय में आई है जब कर्नाटक की सिद्धारमैया सरकार ने आगामी पंचायत और स्थानीय निकाय चुनावों में ईवीएम को हटाकर बैलेट पेपर (Ballot Paper) वापस लाने की सिफारिश की है। भाजपा ने इस सर्वे रिपोर्ट को हथियार बनाकर कांग्रेस पर हमला बोला है, इसे “कांग्रेस के मुंह पर करारा तमाचा” और “राहुल गांधी के नैरेटिव की हार” बताया है।

कर्नाटक सरकार ने ही राहुल गांधी का ‘फैक्ट-चेक‘ कर दिया- BJP
एक X पोस्ट में, बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा कि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी EVM और भारतीय चुनाव आयोग (ECI) के बारे में ‘झूठ’ बोलते रहते हैं, लेकिन कर्नाटक में उनकी अपनी सरकार ने ही उनका ‘फैक्ट-चेक’ कर दिया। पूनावाला ने कहा कि सर्वे में दावा किया गया है कि कर्नाटक में वोटर EVM पर भरोसा करते हैं और मानते हैं कि भारत में चुनाव स्वतंत्र और निष्पक्ष होते हैं।
पूनवाला ने कहा, “‘सभी डिवीजनों में ज़्यादातर जवाब देने वालों का मानना है कि भारत में चुनाव आज़ादी और निष्पक्ष तरीके से होते हैं,’ सर्वे में यह पाया गया, जिसमें 84.55% नागरिकों ने सहमति जताई। सर्वे में 83.61% नागरिक ऐसे पाए गए जो मानते थे कि EVM भरोसेमंद हैं।” असल में, सर्वे में कहा गया कि ज़्यादा नागरिकों को EVM पर भरोसा है, 2023 में 77.9% से बढ़कर अब 83.61% हो गया है।

सर्वे के मुख्य आंकड़े
83.61% जनता का भरोसा: सर्वे में शामिल कुल उत्तरदाताओं में से लगभग 83.61% ने ईवीएम को पूरी तरह भरोसेमंद और विश्वसनीय माना है।
सटीकता पर मुहर: करीब 69.39% लोगों ने माना कि ईवीएम के नतीजे बिल्कुल सटीक होते हैं, जबकि 14.22% ने इस पर ‘अत्यधिक विश्वास’ व्यक्त किया।
क्षेत्रवार नतीजे: कलबुर्गी संभाग: यहां सबसे ज्यादा 94.48% (सहमति + पूर्ण सहमति) लोगों ने ईवीएम पर भरोसा दिखाया।
मैसूर संभाग: यहाँ 88.59% जनता ईवीएम के पक्ष में दिखी।
बेंगलुरु संभाग: यहाँ का आंकड़ा सबसे कम रहा, लेकिन फिर भी 72.95% लोग ईवीएम के साथ खड़े दिखे।
निष्कर्ष
भले ही राजनीतिक दल तकनीक पर सवाल उठाएं, लेकिन जमीनी स्तर पर मतदाताओं का मानना है कि ईवीएम प्रक्रिया पारदर्शी और सुरक्षित है। कर्नाटक चुनाव आयोग के इस डेटा ने अब राष्ट्रीय स्तर पर ईवीएम बनाम बैलेट पेपर की बहस को एक नया मोड़ दे दिया है।









