अगर आप यूपी में किराए के घर में रहते हैं या अपना मकान किराए पर देना चाहते हैं, तो अब आपको कचहरी के चक्कर काटने और भारी-भरकम स्टांप ड्यूटी देने की जरूरत नहीं है। सीएम योगी ने एक झटके में रेंट एग्रीमेंट की लागत को 90% तक कम कर दिया है। इतना ही नहीं, अब ‘मालिक’ और ‘किरायेदार’ के बीच होने वाली खींचतान को खत्म करने के लिए सरकार ने डिजिटल सुरक्षा का कवच तैयार कर दिया है।
उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने नए साल 2026 की शुरुआत में ही प्रदेश के करोड़ों मकान मालिकों और किरायेदारों को अब तक का सबसे बड़ा तोहफा दिया है। सालों से रेंट एग्रीमेंट और प्रॉपर्टी के विवादों में उलझे लोगों के लिए सीएम योगी का यह फैसला किसी वरदान से कम नहीं है।

मकान मालिक और किरायेदार दोनों को फायदा
सरकार के इस फैसले से मकान मालिक और किरायेदार, दोनों को कई स्तर पर राहत मिलेगी. रजिस्टर्ड रेंट एग्रीमेंट होने से मकान मालिक को यह सुरक्षा मिलेगी कि किरायेदार समय पर किराया देगा और तय अवधि के बाद मकान खाली करेगा। वहीं किरायेदार को भी मनमानी किराया वृद्धि या जबरन मकान खाली कराने जैसी समस्याओं से बचाव मिलेगा। सरकार का मानना है कि इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और कानूनी सुरक्षा मजबूत होगी. साथ ही अवैध और कच्चे समझौतों पर भी रोक लगेगी, जो अक्सर विवाद की जड़ बनते हैं। उत्तर प्रदेश में किराये और संपत्ति से जुड़े विवाद लंबे समय से अदालतों में लंबित रहते हैं। रेंट एग्रीमेंट के रजिस्टर्ड होने से किरायेदार और मकान मालिक के अधिकार और जिम्मेदारियां साफ होंगी, जिससे विवाद की गुंजाइश काफी हद तक कम हो जाएगी। सरकार को उम्मीद है कि इससे अदालतों पर भी बोझ घटेगा।
पैतृक संपत्ति के बंटवारे में बड़ी राहत
परिवारों के बीच होने वाले झगड़ों को खत्म करने के लिए सीएम योगी ने एक ऐतिहासिक आदेश दिया है। अब आवासीय, कृषि और व्यावसायिक संपत्तियों का बंटवारा परिवार के सदस्यों के बीच केवल ₹5000 के स्टांप शुल्क (Stamp Rate) पर हो सकेगा। कुल रजिस्ट्री खर्च महज ₹10,000 के आसपास सिमट जाएगा, जो पहले लाखों में होता था।

3. डिजिटल रेंट पोर्टल की शुरुआत
यूपी में अब रेंट एग्रीमेंट (Rent Aggrement) ऑनलाइन होगा। मकान मालिक और किरायेदार को रेंट अथॉरिटी के पोर्टल पर 60 दिनों के भीतर समझौते की जानकारी देनी होगी। इससे फर्जीवाड़ा रुकेगा और किरायेदार द्वारा मकान कब्जा करने जैसी समस्याओं पर लगाम लगेगी।









